संवाददाता@संदीप अग्रहरी……

म्योरपुर कस्बे में वर्षों से लगने वाले शनिवार के साप्ताहिक बाजार को मुख्य मार्ग से हटाकर रामलीला मैदान की ओर स्थानांतरित कर दिया गया। इस निर्णय का उद्देश्य मुख्य सड़क पर लगने वाले जाम को खत्म करना, यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। लोगों को उम्मीद थी कि बाजार हटने के बाद कस्बे को जाम की समस्या से राहत मिलेगी, लेकिन कुछ महीने बीत जाने के बाद भी हालात में कोई खास बदलाव नहीं आया।
आज भी मुख्य बाजार और प्रमुख मार्गों पर सुबह से शाम तक वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। सड़क किनारे अतिक्रमण, बेतरतीब पार्किंग, मनमाने ढंग से खड़े ऑटो और अन्य वाहनों के कारण आए दिन जाम की स्थिति बनी रहती है। इससे स्कूली बच्चों, मरीजों, एंबुलेंस, व्यापारियों और आम राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बाजार को मुख्य सड़क से हटाकर रामलीला मैदान में स्थानांतरित कर दिया गया, तब भी जाम की समस्या क्यों खत्म नहीं हुई? क्या अतिक्रमण इसकी सबसे बड़ी वजह है? क्या अव्यवस्थित पार्किंग और यातायात नियंत्रण की कमी जिम्मेदार है? या फिर संबंधित विभाग प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम साबित हो रहा है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अतिक्रमण हटाने, पार्किंग की समुचित व्यवस्था करने और नियमित यातायात नियंत्रण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो म्योरपुर की जाम की समस्या आगे भी बनी रहेगी।
सबसे बड़ा सवाल… बाजार मुख्य सड़क से हट गया, फिर भी जाम क्यों नहीं हटा?, अतिक्रमण पर प्रभावी कार्रवाई कब होगी, अव्यवस्थित पार्किंग और सड़क पर खड़े वाहनों का जिम्मेदार कौन, आखिर म्योरपुर की जनता को जाम से स्थायी राहत कब मिलेगी?
अब निगाहें प्रशासन पर हैं। लोगों की मांग है कि केवल बाजार का स्थान बदलना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अतिक्रमण हटाने, पार्किंग व्यवस्था सुधारने और यातायात प्रबंधन को मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि म्योरपुर को जाम की समस्या से स्थायी राहत मिल सके।






