Moradabad Aligarh Greenfield Highway: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे को नई रफ्तार देने और प्रमुख औद्योगिक शहरों के बीच आवागमन को सुगम, सुरक्षित तथा बेहद तेज बनाने की दिशा में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक बड़ा कमद उठाया है. दिल्ली-लखनऊ एशियन हाईवे के जीरो प्वाइंट स्थित गजगोला नानकबाड़ी गांव से प्रस्तावित ‘मुरादाबाद-अलीगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे’ के निर्माण की प्रक्रिया तेजी से धरातल पर उतरने लगी है. 114.950 किलोमीटर लंबा यह आधुनिक 4-लेन हाई-स्पीड कॉरिडोर मुरादाबाद, अमरोहा, संभल और बुलंदशहर से होते हुए अलीगढ़ के निर्माणाधीन रिंग रोड से जुड़ेगा.
इस मेगा प्रोजेक्ट के पूरा होते ही मुरादाबाद से ताले और मूर्तियों की ऐतिहासिक नगरी अलीगढ़ की दूरी सिमटकर महज डेढ़ से दो घंटे रह जाएगी, जबकि ताजनगरी आगरा तक का सफर मात्र तीन घंटे में पूरा किया जा सकेगा. परियोजना को लेकर एनएचएआई ने भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक औपचारिकताओं की रफ्तार तेज कर दी है, जिससे क्षेत्र में औद्योगिक और व्यापारिक विकास के नए द्वार खुलेंगे.
मौजूदा जाम और जर्जर सफर से मिलेगी बड़ी निजात
वर्तमान समय में मुरादाबाद से अलीगढ़ के बीच लगभग 130 से 150 किलोमीटर का सफर तय करने में आम मुसाफिरों, निजी वाहनों और मालवाहक ट्रकों को 3.5 से लेकर 4.5 घंटे तक का लंबा समय लग जाता है. मार्ग में पड़ने वाले चंदौसी, बहजोई और बबराला जैसे घनी आबादी वाले कस्बों का भारी ट्रैफिक, संकरी सड़कें, अतिक्रमण और व्यस्त रेलवे क्रॉसिंग गाड़ियों की रफ्तार पर लगातार ब्रेक लगाते रहते हैं.
प्रस्तावित नया कॉरिडोर पूरी तरह से ‘एक्सेस कंट्रोल्ड’ होगा. इसका मतलब यह है कि यह स्थानीय भीड़भाड़, ग्रामीण तिराहों और आवारा मवेशियों के हस्तक्षेप से पूरी तरह मुक्त रहेगा. इस मार्ग पर वाहन 100 किमी प्रति घंटा की नियंत्रित और तेज रफ्तार से सरपट दौड़ सकेंगे, जिससे जाम और ईंधन की बर्बादी से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी.
129 ग्राम सभाओं की जमीन होगी अधिग्रहित, अक्टूबर अंत तक जारी होगा फाइनल गाटा
एनएचएआई की योजना के मुताबिक, इस 114.950 किमी लंबे प्रोजेक्ट के लिए कुल 129 ग्राम सभाओं की भूमि का अधिग्रहण किया जाना है. हाईवे की कुल लंबाई में से मुरादाबाद जिले में 15.60 किलोमीटर, संभल जिले में 56.75 किलोमीटर और अमरोहा जिले में लगभग 100 मीटर की हिस्सेदारी रहेगी. अमरोहा जिले के हसनपुर क्षेत्र का केवल एक गांव ‘इमरतपुर’ इस प्रोजेक्ट के दायरे में आ रहा है. संभल क्षेत्र की 38 ग्राम सभाएं और गुन्नौर तहसील के 31 गांवों की भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा.
प्रोजेक्ट डायरेक्टर (पीडी) एनएचएआई अरविंद कुमार के अनुसार, अक्टूबर महीने के आखिर तक गाटा संख्या के आधार पर सार्वजनिक सूचना जारी कर दी जाएगी. इसी समय फाइनल गाटा भी सार्वजनिक कर दिया जाएगा. इसके ठीक दो महीने बाद विधिवत भूमि अधिग्रहण और बैनामा/मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. फाइनल सर्वे के बाद गाटा प्रकाशन होते ही जमीन की सीधी खरीद शुरू होगी.
मुरादाबाद और संभल क्षेत्र के इन गांवों से गुजरेगा फोरलेन
प्रोजेक्ट के सर्वे और रूट मैप के अनुसार, मुरादाबाद और संभल क्षेत्र के जिन प्रमुख गांवों और क्षेत्रों से यह फोरलेन गुजरेगा. इन गांवों में शामिल हैं गजगोला नानकबाड़ी, उमरी, गिन्नौर देह माफी, कस्बा मुरादाबाद, रतनपुर कला, मालीपुर, करीमपुर जब्ती, रसूलपुर हमीर, जाफरपुर, लालपुर गंगवारी, फत्तेहपुर खास, मलकपुर, अजमतपुर, ललवारा, कुतबपुर रायब, खुर्रमनगर बिचौला, मदारपुरा, नौसना शेखूपुर, अल्लापुर भीकन, कलालखेड़ा उर्फ शहजाद खेड़ा, नगलिया मशमूला, महमूदपुर माफी, असालतनगर बगा और बहादुरपुर राजपूत.
एनएचएआई विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलओ) के माध्यम से भूमि अधिग्रहण की विधिवत अधिसूचना जारी होने के बाद जमीनों को चिन्हित करने का कार्य करेगा. मौके पर लेखपालों और राजस्व कर्मियों की संयुक्त टीमें तैनात की जाएंगी, जो जमीन मालिकों की पुख्ता पहचान और खतौनी-दस्तावेजों के सत्यापन का काम पूरा करेंगी. पारदर्शी तरीके से उचित मुआवजा वितरित कर निर्माण कार्य को रफ्तार दी जाएगी.
भविष्य की जरूरतों के लिए 6-लेन अपग्रेडेबल डिजाइन
एनएचएआई के तकनीकी खाके के अनुसार, यह हाईवे मुरादाबाद के बिलारी क्षेत्र से शुरू होगा. इसके बाद यह चंदौसी, बहजोई, बबराला और डिबाई से होते हुए अलीगढ़ पहुंचेगा. हाईवे को इस दूरदर्शी तकनीक से डिजाइन किया जा रहा है कि आने वाले समय में यातायात का दबाव बढ़ने पर इसे बिना किसी अतिरिक्त तोड़फोड़ के आसानी से 6-लेन में अपग्रेड किया जा सकेगा.
यह कॉरिडोर संभल जिले के पोटा और धूरा गांवों के निकट से जिले की सीमा में प्रवेश करेगा. संभल तहसील के लगभग 40 गांव इसके दायरे में आएंगे, जिसके बाद यह कैलादेवी क्षेत्र से होकर गुन्नौर तहसील पहुंचेगा (जहां 29 अन्य गांव कवर होंगे). इस प्रकार संभल और गुन्नौर के कुल 69 गांवों से गुजरते हुए यह मार्ग जिजोड़ा डंडा गांव के निकट पवित्र गंगा नदी को पार करेगा और बुलंदशहर की सीमा को छूते हुए सीधे अलीगढ़ के रिंग रोड में समाहित हो जाएगा.
गंगा एक्सप्रेसवे से बदायूं लिंक के जरिए सीधा जुड़ाव
इस नए फोरलेन हाईवे की सबसे बड़ी रणनीतिक और लॉजिस्टिक ताकत इसका गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ना है. मुरादाबाद-अलीगढ़ हाईवे को विशेष बदायूं लिंक के जरिए सीधे गंगा एक्सप्रेसवे से कनेक्ट किया जाएगा. इस कनेक्टिविटी के तैयार होने के बाद मुरादाबाद, अलीगढ़ और आसपास के मुसाफिर सीधे एक्सप्रेसवे के रास्ते बहुत कम समय में प्रयागराज (इलाहाबाद) और समूचे पूर्वांचल तक का सफर तय कर सकेंगे.
हाईवे पर स्थानीय वाहनों, भारी ट्रकों और कृषि यंत्रों (ट्रैक्टर-ट्रॉली) के सुरक्षित आवागमन के लिए पर्याप्त संख्या में अंडरपास, प्रमुख चौराहों पर एलिवेटेड बाईपास और ग्रामीणों की सुविधा के लिए पैदल पुलों (एफओबी) का निर्माण किया जाएगा. इसके अतिरिक्त, रूट पर पड़ने वाले मोहम्मद इब्राहिमपुर टोल प्लाजा पर टोल टैक्स की संशोधित नई दरें लागू कर दी गई हैं. वहीं, निर्माण कार्यों को गति देने के लिए अलीगढ़-मुरादाबाद खंड पर 12.5 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले एक बड़े पुल का टेंडर जून 2026 में पहले ही जारी किया जा चुका है.
आगरा तक का सफर आसान, रियल एस्टेट व लॉजिस्टिक्स में आया बूम
मुरादाबाद से अलीगढ़ ही नहीं, बल्कि ताजनगरी आगरा तक की राह भी बेहद सुगम होने जा रही है. आगरा-अलीगढ़ फोरलेन हाईवे के दूसरे रूट (आगरा से अलीगढ़, 28 किमी पैकेज 1) का चौड़ीकरण कार्य मार्च से शुरू हो चुका है, जिसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है. इसके बनते ही मुरादाबाद से अलीगढ़ होते हुए आगरा तक निर्बाध फोरलेन नेटवर्क पूरी तरह तैयार हो जाएगा.
हाईवे के सर्वे, गाटा प्रकाशन और प्रशासनिक सरगर्मियों के बीच अलीगढ़ के हरदुआगंज, पनेठी और गभाना के बाहरी इलाकों में रियल एस्टेट, कृषि भूमि और लॉजिस्टिक्स कंपनियों की गतिविधियों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है. एक्सप्रेसवे और रिंग रोड कनेक्टिविटी को देखते हुए बड़ी कंपनियां यहां वेयरहाउस और आधुनिक औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए जमीनें तलाश रही हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार को जबर्दस्त बूस्ट मिलेगा.

