नई दिल्ली. ग्लासगो के मैदान पर जब पुरुष जैवलिन थ्रो का फाइनल मुकाबला शुरू हुआ, तो हर खेल प्रेमी की निगाहें ट्रैक एंड फील्ड के उस दायरे पर टिकी थीं जहां भाला हवा को चीरते हुए नए इतिहास लिखता है. दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा की मौजूदगी ने इस प्रतियोगिता के रोमांच को कई गुना बढ़ा दिया था. भारत के इस स्टार एथलीट के साथ मैदान में दो और युवा भारतीय नाम मौजूद थे रोहित यादव और यशवीर सिंह.
नीरज चोपड़ा (Niraj Chopra) ने अपनी पहली कोशिश में 80.97 मीटर का थ्रो फेंककर प्रतियोगिता की सतर्क शुरुआत की. लेकिन उनका असली जलवा दूसरे ही प्रयास में देखने को मिला, जब उन्होंने ताकत और तकनीक के तालमेल के साथ भाला फेंका. उनका यह भाला 85.83 मीटर की दूरी पर जाकर गिरा, जो इस सत्र का उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (सीजन बेस्ट) साबित हुआ. इसके बाद नीरज ने तीसरे प्रयास में 81.29 मीटर और चौथे प्रयास में 80.73 मीटर की दूरी तय की, जबकि उनकी पांचवीं और छठी कोशिश फाउल रही. 85.83 मीटर का यह जबरदस्त थ्रो अंततः उन्हें रजत पदक (Silver Medal) दिलाने के लिए पर्याप्त साबित हुआ.
यशवीर सिंह का आखिरी थ्रो में कांस्य धमाका
इसी मुकाबले में भारत की झोली में दूसरा पदक डालने का श्रेय मिला युवा एथलीट यशवीर सिंह को. यशवीर की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही थी जब उनका पहला थ्रो फाउल हो गया. इसके बाद उन्होंने दूसरे प्रयास में 78.55 मीटर और तीसरे में 81.33 मीटर का थ्रो फेंककर वापसी की लय पकड़ी. चौथे प्रयास में एक बार फिर फाउल और पांचवें प्रयास में 76.95 मीटर के थ्रो के बाद ऐसा लगा कि शायद पदक उनसे दूर जा रहा है. लेकिन यशवीर ने अपने खेल का सबसे शानदार रूप आखिरी थ्रो के लिए बचाकर रखा था. अपने छठे और अंतिम प्रयास में यशवीर ने पूरी जान झोंक दी और 85.41 मीटर का थ्रो फेंक डाला. यह न केवल उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (पर्सनल बेस्ट) था, बल्कि इसने उन्हें कांस्य पदक (Bronze Medal) भी पक्का करा दिया.
रोहित यादव का संघर्षपूर्ण प्रदर्शन
प्रतियोगिता में भाग ले रहे तीसरे भारतीय एथलीट रोहित यादव ने भी कड़ी टक्कर दी. उन्होंने पहले प्रयास में 77.50 मीटर और दूसरे प्रयास में 81.56 मीटर का थ्रो फेंका. तीसरे प्रयास में फाउल होने के बाद, चौथे प्रयास में उन्होंने 73.70 मीटर की दूरी तय की. पांचवां प्रयास फाउल रहने के बाद छठे और आखिरी प्रयास में उनका भाला 79.55 मीटर तक गया.
अरशद नदीम का अप्रत्याशित रूप से बाहर होना
हालांकि, इस पूरे मुकाबले का सबसे चौंकाने वाला पल वह रहा जब बर्मिंघम 2022 के डिफेंडिंग चैंपियन और मौजूदा ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता, पाकिस्तान के अरशद नदीम का सफर बहुत जल्दी खत्म हो गया. नदीम की पहली कोशिश फाउल रही. इसके बाद वे दूसरे प्रयास में 77.41 मीटर और तीसरे प्रयास में केवल 75.39 मीटर की दूरी ही तय कर सके. शुरुआती तीन थ्रो के इस निराशाजनक प्रदर्शन के कारण वे शीर्ष खिलाड़ियों की रेस से बाहर (Eliminate) हो गए और उन्हें पदक तालिका के दावेदारों से हटना पड़ा.
रमेश पाथिरागे का स्वर्णिम थ्रो
लेकिन इस ऐतिहासिक मुकाबले का स्वर्ण पदक (Gold Medal) श्रीलंका के रुमेश थरंगा पाथिरागे (Rumesh Tharanga Pathirage) के नाम रहा, जिन्होंने अपनी किस्मत और ताकत का ऐसा प्रदर्शन किया जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा. रुमेश का पहला थ्रो फाउल रहा था. इसके बाद उन्होंने दूसरे प्रयास में ऐसा अकल्पनीय थ्रो फेंका जिसने स्टेडियम में मौजूद हर दर्शक को हैरान कर दिया. उनका भाला 89.75 मीटर की विशाल दूरी पर जा गिरा. दिलचस्प बात यह रही कि इसके बाद उनके बाकी चारों प्रयास (तीसरा, चौथा, पांचवां और छठा थ्रो) फाउल ही रहे, लेकिन केवल एक ही सही थ्रो 89.75 मीटर उन्हें स्वर्ण पदक जिताने के लिए काफी था.
भारत के लिए ऐतिहासिक दिन
ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों का यह मुकाबला न केवल रुमेश पाथिरागे के स्वर्णिम थ्रो और अरशद नदीम के अप्रत्याशित रूप से बाहर होने के लिए याद किया जाएगा, बल्कि भारत के दो धाकड़ एथलीटों नीरज चोपड़ा और यशवीर सिंह द्वारा एक ही मंच पर देश के लिए रजत और कांस्य पदक जीतने के उस गौरवशाली पल के लिए भी इतिहास में दर्ज हो गया.
प्रतियोगिता का माहौल पहले ही क्वालिफिकेशन राउंड के बाद से गर्म हो चुका था. बुधवार को हुए क्वालिफिकेशन दौर में नीरज चोपड़ा ने संभलकर शुरुआत करते हुए 79.61 मीटर के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ पांचवां स्थान हासिल किया था. वहीं रोहित यादव 78.37 मीटर के थ्रो के साथ नौवें और यशवीर सिंह 78.36 मीटर के प्रयास के साथ दसवें स्थान पर रहे. क्वालिफिकेशन का टिकट पक्का होते ही नीरज और रोहित ने जोखिम न लेते हुए अपने तीसरे और अंतिम थ्रो का इस्तेमाल भी नहीं किया.






