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5 साल की उम्र में पिता के शिष्य की पकड़ी गलती, फिर गाकर सिखाया सही सुर, जानें लता मंगेशकर कैसे बनीं ‘स्वर कोकिला’

Admin by Admin
September 28, 2026
in मनोरंजन
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5 साल की उम्र में पिता के शिष्य की पकड़ी गलती, फिर गाकर सिखाया सही सुर, जानें लता मंगेशकर कैसे बनीं ‘स्वर कोकिला’


Last Updated:September 28, 2026, 04:01 IST

भारतीय संगीत की ‘स्वर कोकिला’ लता मंगेशकर के सुरों का जादू आज भी हर दिल पर राज करता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस महान गायिका की पहचान की नींव महज 5 साल की उम्र में ही पड़ गई थी? जब नन्हीं लता मंगेशकर ने अपने पिता के शिष्य की गलती पकड़कर सही सुर में गाकर सिखाया, तो हर कोई दंग रह गया. पिता के निधन के बाद 13 साल की उम्र में परिवार की जिम्मेदारी उठाने वाली बेटी का सफर कितना संघर्षपूर्ण और हैरान कर देने वाला था.

नई दिल्ली. स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने सात दशकों से अधिक लंबे संगीत के सुनहरे सफर में अपनी रूहानी आवाज से हर पीढ़ी के दिल को छुआ है. प्यार की मिठास और दर्द की कसक से लेकर भक्ति के भाव और देशभक्ति के जज्बे तक, उन्होंने हर भावना को जीवंत कर दिया. महज 5 साल की उम्र में लता मंगेशकर ने अपने पिता के एक शिष्य को गलत गाने पर टोक दिया था. फिर उसे सही सुर में गाकर समझाया. यही छोटी-सी घटना उनके संगीत के सफर में एक बड़ा मोड़ बन गई. आज लता दी की बर्थ एनिवर्सरी है और इस मौके पर उनके करियर पर एक नजर डालते हैं.

लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था. उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर मराठी थिएटर के जाने-माने कलाकार और शास्त्रीय गायक थे. घर में संगीत का माहौल था और लता बचपन से अपने पिता को गाते और उनके शिष्यों को संगीत सिखाते हुए सुनती थीं. इसी माहौल में उनकी संगीत की समझ कम उम्र में बनने लगी. उनके परिवार में आगे चलकर आशा भोसले, उषा मंगेशकर, मीना मंगेशकर और हृदयनाथ मंगेशकर जैसे कलाकार भी संगीत से जुड़े. (फोटो साभार: IMDb)

लता मंगेशकर ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था, जिसमें उनके पिता ने पहली बार उनकी सुर की समझ की ओर ध्यान दिया था. उन्होंने बताया था कि वह करीब 5 साल की थीं. उनके पिता का एक शिष्य घर में रियाज कर रहा था. लता मंगेशकर ने उसकी आवाज सुनी और उन्हें लगा कि वह ठीक तरह से नहीं गा रहा. उन्होंने उसे रोककर वही राग अपने पिता से सुने तरीके से गाकर सुनाया. जब उनके पिता वापस आए तो उन्होंने बेटी से वही चीज दोबारा गाने को कहा. अगले दिन से दीनानाथ मंगेशकर ने लता को संगीत सिखाना शुरू कर दिया. (फोटो साभार: IMDb)

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लता मंगेशकर ने बचपन में अपने पिता के साथ मराठी थिएटर के नाटकों में भी काम किया और गाया लेकिन उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव तब आया, जब 1942 में उनके पिता का निधन हो गया. उस समय वह महज 13 साल की थीं. परिवार की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर आ गई. परिवार के करीबी मास्टर विनायक ने उन्हें एक्टिंग और सिंगिंग में आगे बढ़ने में मदद की. इसी दौरान लता ने फिल्मों के लिए गाना शुरू किया. (फोटो साभार: IMDb)

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स्वर कोकिला का पहला रिकॉर्ड किया गया गाना 1942 की मराठी फिल्म ‘किती हसाल’ के लिए था, लेकिन वह गाना फिल्म के अंतिम वर्जन में शामिल नहीं हुआ. इसके बाद उन्होंने कुछ और मराठी गाने रिकॉर्ड किए. 1945 के आसपास वह मुंबई पहुंचीं और आगे की संगीत की ट्रेनिंग ली. उन्होंने उस्ताद अमान अली खान और दूसरे बड़े संगीत गुरुओं से शास्त्रीय संगीत सीखा. इसके बाद उन्हें धीरे-धीरे हिंदी फिल्मों में काम मिलने लगा. (फोटो साभार: IMDb)

1949 की फिल्म ‘महल’ का गाना ‘आएगा आनेवाला’ लता के करियर का बड़ा मोड़ बना. इस गाने ने उनकी आवाज को देशभर में पहचान दिलाई. इसके बाद वह हिंदी सिनेमा की सबसे ज्यादा मांग वाली प्लेबैक सिंगर्स में शामिल हो गईं. उन्होंने नौशाद, मदन मोहन, एस.डी. बर्मन, अनिल बिस्वास, सी. रामचंद्र, खय्याम और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जैसे बड़े संगीतकारों के साथ काम किया. मोहम्मद रफी और किशोर कुमार जैसे बड़े गायकों के साथ भी उनकी आवाज खूब सुनी गई. (फोटो साभार: IMDb)

लता मंगेशकर ने 1963 में दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गाया था. यह गाना 1962 के भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को समर्पित था. इस मौके पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी मौजूद थे. लता मंगेशकर की आवाज और गाने के भाव ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया था. (फोटो साभार: IMDb)

उनके लंबे करियर में पुरस्कारों की भी लंबी लिस्ट रही. उन्हें 1969 में पद्म भूषण, 1989 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और 1999 में पद्म विभूषण मिला. उन्होंने तीन बार सर्वश्रेष्ठ महिला प्लेबैक सिंगर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी जीता. साल 2001 में उन्हें देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया. 2007 में फ्रांस ने भी उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक, ऑफिसर ऑफ लीजन ऑफ ऑनर दिया. जनवरी 2022 में कोविड-19 से संक्रमित होने के बाद उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया. करीब एक महीने के इलाज के बाद 6 फरवरी 2022 को 92 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. (फोटो साभार: IMDb)

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First Published :

September 28, 2026, 04:01 IST



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