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Sirohi Hockey Players: सिरोही के मेर मांडवाड़ा गांव में हॉकी का जुनून युवाओं की पहचान बन चुका है. पिछले 10 वर्षों में यहां से 175 खिलाड़ी स्टेट और कई खिलाड़ी नेशनल लेवल तक पहुंचे हैं. शिक्षक परमवीर सिंह की गाइडेंस में खिलाड़ी रोजाना अभ्यास कर गांव का नाम रोशन कर रहे हैं.
सिरोही. जिले के छोटे से गांव मेर मांडवाड़ा में युवाओं में खेलों को लेकर खासा उत्साह देखने को मिलता है. इस गांव से पिछले 10 वर्षों में कई खिलाड़ी स्टेट और नेशनल लेवल पर गांव का नाम रोशन कर चुके है. गांव को खेलों में खास तौर पर हॉकी के लिए पहचाना जाता है. पिछले 10 साल में यहां के 175 खिलाड़ी स्टेट लेवल पर और 3 खिलाड़ी नेशनल लेवल पर पहुंच चुके हैं. अंडर-19 छात्र और छात्रा टीमें पिछले 6 सालों से डिस्ट्रिक्ट लेवल पर चैंपियन हैं. गांव के सरकारी सीनियर सेकंडरी स्कूल के शारीरिक शिक्षक परमवीर सिंह पिछले करीब 10 वर्षों से खिलाड़ियों को खेलों को लेकर गाइडेंस देने का काम कर रहे हैं.
परमवीर सिंह ने बताया कि गांव में पिछले करीब एक दशक में कई खेल प्रतिभाएं उभर कर सामने आई है. सिरोही जिले के मेर मांडवाड़ा गांव को हॉकी खेल के लिए खास पहचाना जाता हैं. पहले इस क्षेत्र में हॉकी का नाम कोई नहीं जानता था, लेकिन यहां के सरकारी स्कूल के खिलाड़ी सुबह शाम खेल मैदान में लगातार प्रैक्टिस कर और सही गाइडेंस के चलते हॉकी खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर गांव और जिले का नाम स्टेट और नेशनल लेवल पर रोशन कर रहे हैं. खेल को आगे बढ़ाने में स्कूल के स्टाफ के अलावा भामाशाहों का भी पूरा सहयोग रहता है.
इन 3 खिलाडियों ने नेशनल लेवल किया नाम रोशन
शिक्षक परमवीर सिंह ने बताया कि मेर मांडवाड़ा के स्कूली खिलाड़ी दिन-रात अभ्यास करते हैं. इसी अभ्यास के कारण पिछले 10 सालों में 150 से अधिक हॉकी खिलाड़ी राज्य स्तर पर पहुंचे हैं. राहुल राव और थानाराम का राष्ट्रीय स्तरीय प्रशिक्षण कैंप में सिलेक्शन हुआ था, लेकिन कोरोना के कारण वे टीम में शामिल नहीं हो पाए. रवीना लोहार गांव की पहली राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी बनी. इसके बाद खुशबू कंवर ने भी राष्ट्रीय स्तर पर गांव का नाम रोशन किया. इसी वर्ष जोशना देवासी का भी नेशनल कैंप चयन हुआ था लेकिन अंतिम चयन खुशबू कंवर का हुआ था. पिछले वर्ष उदयपुर में हुई 69वीं राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिता में राजस्थान ने गोल्ड मेडल हासिल किया था. इस टीम में मेर मांडवाड़ा के दिलीप सिंह भी शामिल थे, जिन्होंने राजस्थान को गोल्ड मेडल दिलाने में योगदान दिया. इसी वर्ष गांव के चिनाराम और कालाराम का भी नेशनल कैंप के लिए चयन हुआ था, लेकिन टीम में अंतिम चयन दिलीपसिंह का हुआ. इन सफल खिलाड़ियों से गांव के अन्य युवाओं को भी प्रेरणा मिल रही है.
हॉकी के लिए समर्पित परमवीर सिंह का परिवार
स्कूल के शारीरिक शिक्षक स्वयं भी होली के खिलाड़ी रह चुके हैं, उन्होंने पटियाला में एनआईएस से हॉकी की ट्रेनिंग ली थी. वहीं 2007-08 वर्ष में जिनवा जोधपुर टीम के कप्तान भी रह चुके हैं, उनका पूरा परिवार हॉकी के लिए समर्पित है. परमवीर सिंह के अलावा उनके चाचा और उनकी तीसरी पीढ़ी भी होली में खिलाड़ी के रूप में खेल कर अन्य खिलाड़ियों को गाइडेंस देने का काम कर रहे हैं. परमवीर सिंह ने बताया कि इन सभी प्रयासों का मकसद सिरोही जिले में खेलों और हॉकी को आगे बढ़ाना है. उन्होंने जिले के भामाशाहों से भी गांव में एस्ट्रोटर्फ लगाने में सहयोग की अपील की है, ताकि गांव के खिलाड़ी और अच्छे से प्रैक्टिस कर सके और देश में गांव का नाम रोशन करें.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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