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Success Story: बोल नहीं सकता यश, लेकिन बॉलिंग लेन पर उसकी कामयाबी बोलती है, गोल्ड समेत 3 मेडल जीते

Admin by Admin
September 26, 2026
in खेल
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Success Story: बोल नहीं सकता यश, लेकिन बॉलिंग लेन पर उसकी कामयाबी बोलती है, गोल्ड समेत 3 मेडल जीते


Last Updated:September 25, 2026, 08:28 IST

Yash Success Story: किसी चुनौती को अपनी राह की रुकावट नहीं बनने देना क्या होता है, यश की कहानी इसका उदाहरण है. बोल नहीं पाने वाला यश बॉलिंग लेन पर अपनी प्रतिभा का ऐसा प्रदर्शन कर रहा है, जिसने उसे राष्ट्रीय प्रतियोगिता से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा दिया. अप्रैल में हुई नेशनल बॉलिंग चैंपियनशिप में यश ने तीन पदक अपने नाम किए, जिसमें गोल्ड मेडल भी शामिल रहा. इस प्रदर्शन के बाद उसे अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए चुना गया. चीन में 4 से 9 सितंबर तक हुई प्रतियोगिता में यश ने राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया. उसकी इस उपलब्धि के पीछे लगातार अभ्यास और कोच लोकेन्द्र सिंह राठौड़ का मार्गदर्शन रहा. यश ने खेल को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया और अपनी प्रतिभा के दम पर अलग पहचान बनाई. उसकी कहानी बताती है कि मेहनत और अवसर मिलें तो प्रतिभा किसी भी चुनौती से आगे निकल सकती है.

कुछ कहानियां शब्दों से नहीं, कामयाबी से लिखी जाती है. यश की कहानी भी ऐसी ही है. यश बोलकर अपनी बात नहीं कह सकता, लेकिन बॉलिंग लेन पर उसका प्रदर्शन उसकी पहचान बन चुका है. अपनी मेहनत के दम पर यश ने पहले राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया और अब अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचकर राजस्थान का नाम रोशन किया है. उसकी यह सफलता बताती है कि किसी भी चुनौती के बावजूद प्रतिभा को आगे बढ़ने से रोका नहीं जा सकता.

यश ने 20 से 24 अप्रैल तक आयोजित नेशनल बॉलिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन पदक अपने नाम किए. इनमें गोल्ड मेडल भी शामिल रहा. राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उसके प्रदर्शन ने उसकी प्रतिभा को नई पहचान दी. अलग-अलग मुकाबलों में यश ने अपने खेल तकनीक का परिचय दिया. इस प्रदर्शन के बाद उसका चयन अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए हुआ और यश ने राजस्थान से पहली बार इंटरनेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर एक नई उपलब्धि अपने नाम की.

राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद यश का अगला पड़ाव अंतरराष्ट्रीय मंच बना. बॉलिंग गेम की इंटरनेशनल चैंपियनशिप का आयोजन चीन में 4 से 9 सितंबर तक किया गया. इस प्रतियोगिता में यश ने राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया. देश के बाहर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेना उसके खेल सफर का बड़ा पड़ाव रहा. राष्ट्रीय चैंपियनशिप से चीन तक पहुंचने का यह सफर यश की लगातार मेहनत का परिणाम था.

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यश की कहानी की खास बात यह है कि वह बोल नहीं सकता, लेकिन खेल के मैदान पर उसकी प्रतिभा पूरी मजबूती से अपनी बात कहती है. बॉलिंग की हर गेंद के साथ उसका आत्मविश्वास बढ़ता गया और लगातार अभ्यास ने उसे राष्ट्रीय प्रतियोगिता से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया. जहां शब्द उसका साथ नहीं देते, वहीं उसकी उपलब्धियां उसकी पहचान बन गई हैं. तीन राष्ट्रीय पदक और अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में राजस्थान का प्रतिनिधित्व उसकी मेहनत की कहानी खुद बयां करता है.

यश की उपलब्धि सिर्फ तीन पदक या चीन में हुई प्रतियोगिता में हिस्सा लेने तक सीमित नहीं है. उसकी कहानी उन बच्चों और परिवारों के लिए भी एक उदाहरण है, जो किसी शारीरिक चुनौती के कारण अपने सपनों को सीमित मान लेते हैं. यश ने खेल को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया और अपनी मेहनत से आगे बढ़ता गया. उसके सफर में सबसे बड़ी बात यह है कि उसने अपनी चुनौती को अपनी पहचान बनने नहीं दिया.

यश आज राजस्थान के उन खिलाड़ियों में अपनी अलग पहचान बना चुका है, जिन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर तय किया. वह बोल नहीं सकता, लेकिन बॉलिंग लेन पर उसके प्रदर्शन ने उसकी आवाज बनकर काम किया. राष्ट्रीय चैंपियनशिप में गोल्ड समेत तीन पदक जीतने से लेकर चीन की अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने तक की उसकी यात्रा बताती है कि हौसला और मेहनत साथ हों तो उपलब्धियां खुद कहानी लिख देती है.

यश की सफलता के पीछे उसके कोच लोकेन्द्र सिंह राठौड़ का भी अहम योगदान रहा. लोकेन्द्र सिंह राठौड़ जयपुर के झोटवाड़ा स्थित ट्राइटन मॉल में गेमर गेमिंग जोन का संचालन करते हैं. उनके मार्गदर्शन में यश ने बॉलिंग गेम की बारीकियां सीखीं और लगातार अभ्यास के जरिए अपने खेल को बेहतर बनाया. कोच के प्रशिक्षण और यश की मेहनत ने मिलकर उसके सफर को राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई.

First Published :

September 25, 2026, 08:28 IST



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