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Varanasi Ramnagar Remleela: रामनगर की रामलीला का मंचन 4 किलोमीटर के दायरे में होता है. हर दिन अलग-अलग जगहों पर आयोजन होता है. पूरी दुनिया में यह पहली ऐसी लीला है, जिसका मंचन घूम-घूमकर किया जाता है. यह ऐतिहासिक रामलीला आज से पूरे 1 महीने तक चलेगी. बारिश और खराब मौसम के बीच भी लीला प्रेमी इसे देखने उमड़े. पहले दिन रावण जन्म और क्षीर सागर की झांकी दिखाई गई. आकाशवाणी के बाद लीला के पहले दिन के मंचन खत्म हुआ. इस लीला को यूनिस्को ने विश्व धरोहर माना है.
वाराणसी. यूपी के काशी में 240 साल से अधिक पुरानी रामलीला का मंचन शुरू हो गया है. रामनगर में रावण जन्म के साथ शुक्रवार से इस ऐतिहासिक लीला की शुरुआत हुई. लीला की शुरुआत के साथ ही शाही ठाठ बाट भी देखने को मिला. काशी नरेश अनंत नारायण सिंह राजशाही वेशभूषा और हाथी पर सवार होकर इस लीला का मंचन देखने पहुंचे. यह ऐतिहासिक रामलीला आज से पूरे 1 महीने तक चलेगी. बारिश और खराब मौसम के बीच भी लीला प्रेमी इसे देखने पहुंचे. लीला की शुरुआत के साथ ही ‘चुप रहो, सावधान’ की गूंज भी रामनगर में गूंजने लगी. एक आवाज के बाद हजारों की भीड़ में शांति छा गई. फिर रामचरितमानस की चौपाइयां गूंजने लगीं. पहले दिन रावण जन्म, क्षीर सागर की भव्य झांकी हुई. आकाशवाणी के बाद लीला के पहले दिन के मंचन खत्म हुआ. लीला को लेकर पहले दिन ही जबरदस्त उत्साह दिखा.
कैसे पड़ी नींव
पूरे पारंपरिक अंदाज में नेमी (नियमित लीला देखने वाले) भी इस लीला में शामिल हुए. काशी राज परिवार की ओर से होने वाली इस लीला की शुरुआत 1783 में हुई थी. तत्कालीन काशी नरेश उदित नारायण सिंह ने इसकी शुरुआत की थी. रामनगर के रामलीला ने ऐतिहासिकता और भक्ति का जैसा अनूठा संगम दिखता है, वैसा पूरी दुनिया में कहीं नहीं दिखता. इसलिए इस लीला को यूनिस्को ने भी विश्व धरोहर माना है.
तब तक नहीं होती शुरू
1783 में जिस स्वरूप में यह लीला होती थी वैसा ही स्वरूप आज भी यहां दिखता है. लीला देखने आए अवधेश दीक्षित लोकल 18 से बताते हैं कि आधुनिकता के इस दौर में भी इस लीला को पेट्रोमेक्स की रौशनी में किया जाता है. इस लीला के लिए माइक का प्रयोग भी नहीं होता है. रामचरितमानस और संवाद के आधार पर इस लीला का मंचन किया जाता है. पूरे साल भक्तों को इस लीला का इंतजार रहता है. जब तक काशी राज परिवार के मुखिया इस लीला में नहीं आते तब तक इसकी शुरुआत नहीं होती है.
कामकाज छोड़कर आते हैं देखने
रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला का मंचन 4 किलोमीटर के दायरे में होता है. हर दिन अलग-अलग जगह पर इस लीला का मंचन होता है. पूरी दुनिया में यह पहली ऐसी लीला है जिसका मंचन घूम-घूमकर अलग-अलग जगहों पर होता है. वरुण मिश्र बताते हैं कि भक्तों को इस लीला में प्रभु श्रीराम के दर्शन भी होते है. यही वजह है की लीला प्रेमी पूरे एक महीने तक अपना कामकाज छोड़ यहां इसे देखने आते हैं.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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