नई दिल्ली. भारत की महिला पोल वाल्ट एथलीट बरानिका एलांगोवन ने एशियन गेम्स में इतिहास रचते हुए देश को पहला पदक दिलाया है. तमिलनाडु के मयिलादुथुरई की रहने वाली 29 वर्षीय बरानिका ने नागोया में आयोजित एशियन गेम्स में महिलाओं की पोल वॉल्ट स्पर्धा के फाइनल में 4.15 मीटर की छलांग लगाकर कांस्य पदक अपने नाम किया. यह एशियन गेम्स के इतिहास में पुरुषों और महिलाओं दोनों वर्गों को मिलाकर पोल वॉल्ट स्पर्धा में भारत का पहला पदक है. फाइनल मुकाबले में बरानिका और रूस की पोलिना इवानोवा दोनों ने 4.15 मीटर की दूरी सफलतापूर्वक पार की, लेकिन इसके बाद 4.25 मीटर के प्रयास में दोनों चूक गईं. काउंटबैक नियम के आधार पर दोनों एथलीटों को कांस्य पदक से सम्मानित किया गया.
बरानिका एलांगोवन (Baranica Elangovan) के लिए यह पदक सालों की कड़ी मेहनत, चोटों से उबरने के संघर्ष और निरंतर सुधार की एक शानदार कहानी है. 3 फरवरी 1997 को जन्मीं बरानिका की एथलेटिक्स में शुरुआत पोल वॉल्ट से नहीं हुई थी. जब वह कॉलेज की पढ़ाई के लिए मयिलादुथुरई से चेन्नई आईं, तब उनकी रुचि मुख्य रूप से लॉन्ग जंप और ट्रिपल जंप में थी. मात्र 42 किग्रा वजन होने के कारण उन्हें लगता था कि वह इतनी हल्की हैं कि पोल लेकर भागना उनके लिए संभव नहीं होगा.
2016 में इथिराज कॉलेज के शारीरिक शिक्षा निदेशक ने उनका परिचय कोच मिल्बर बर्ट्रेंड रसेल से कराया. जब उन्होंने अन्य एथलीटों को पोल के सहारे हवा में बाउंड्री पार करते देखा, तो उनका मन बदल गया और उन्होंने भी हवा में ‘उड़ने’ की ठान ली. पोल वॉल्ट एक तकनीकी और कठिन खेल है, इसलिए शुरुआत में उन्हें अपने शरीर को मजबूत करने और खेल की बारिकियों को सीखने में काफी समय लगा.
करियर को लगा गंभीर झटका
साल 2019 में उनके करियर पर उस समय ब्रेक लग गया जब एक अभ्यास सत्र के दौरान खराब लैंडिंग मैट की वजह से वह सीधे पोल-वॉल्ट बॉक्स में जा गिरीं. इस हादसे में उनके बाएं पैर के घुटने की एसीएल (ACL) और मेनिस्कस की मांसपेशियां फट गईं. यह पैर उनका टेक-ऑफ लेग था, इसलिए यह चोट उनके करियर के लिए बेहद घातक साबित हो सकती थी. इसके बाद उन्हें सर्जरी और एक लंबी पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) प्रक्रिया से गुजरना पड़ा.
चोट के बाद वापसी का कठिन सफर
सर्जरी के बाद भी वापसी आसान नहीं रही. विशेष देखभाल और पुनर्वास सुविधाओं की कमी के कारण उन्हें सालों तक दर्द का सामना करना पड़ा. एक समय ऐसा भी था जब शरीर की कमजोरी की वजह से वह एक दिन छोड़कर ही ट्रेनिंग कर पाती थीं. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और ट्रेनिंग के साथ रिकवरी पर ध्यान देना जारी रखा.
ओडिशा ट्रांसफर और फॉर्म में वापसी
साल 2023 में उन्होंने अपनी ट्रेनिंग का ठिकाना तमिलनाडु से ओडिशा स्थानांतरित कर लिया. भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम की सुविधाओं ने उनके करियर को नई दिशा दी. तीन बार की नेशनल आउटडोर चैंपियन रहने के बाद भी 2023 की एशियन चैंपियनशिप में उन्हें नो-मार्क का सामना करना पड़ा था. लेकिन 2026 के सीजन में उन्होंने जबरदस्त वापसी की.
राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने का सिलसिला
वर्ष 2026 बरानिका के लिए एक यादगार और रिकॉर्डतोड़ सीजन साबित हुआ. मार्च 2026 में बेंगलुरु में आयोजित इंडियन ओपन जंप्स प्रतियोगिता में उन्होंने 4.10 मीटर का एशियन गेम्स क्वालीफाइंग मार्क हासिल कर स्वर्ण पदक जीता. इसके कुछ ही दिनों बाद भुवनेश्वर में पहली नेशनल इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 4.22 मीटर की कूद लगाकर रोज़ी मीना पॉलराज के 4.21 मीटर के राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ दिया.
अपने ही रिकॉर्ड में किया सुधार
इसके ठीक पांच हफ्ते बाद, 3 मई को भुवनेश्वर में ही आयोजित इंडियन इंडोर ओपन कंबाइंड इवेंट्स एंड पोल वॉल्ट प्रतियोगिता में उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में 4.23 मीटर की दूरी तय कर अपने ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड में सुधार किया. इस स्पर्धा में नितिका अनूप अकारे और ब्लेसी कुंजुमन 3.90 मीटर के साथ पीछे रहीं और बरानिका ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया. इसके बाद जून में नेशनल इंटर-स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 4.20 मीटर पार कर दूसरा स्थान प्राप्त किया.
एशियन गेम्स में ऐतिहासिक सफलता
नागोया एशियन गेम्स में उतरने से पहले उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 4.23 मीटर था. वह पूरे सीजन अपनी ट्रेनिंग पार्टनर और साथी फाइनलिस्ट सिंधुश्री गणेशा के साथ एक कड़े मुकाबले में शामिल रहीं. दोनों के बीच की इस प्रतिस्पर्धी जंग ने उन्हें नए आयामों तक पहुंचाया. एशियन गेम्स के फाइनल में जहां सिंधुश्री तीन असफल प्रयासों के बाद जल्दी बाहर हो गईं, वहीं बरानिका ने दबाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक पर कब्जा जमाया.
