राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के लिए पहला पदक पक्का हो गया है। असम से ताल्लुक रखने वाली भारतीय मुक्केबाज ने यह सफलता दिलाई है। वे बिना रिंग में गए ही पदक तय करने में सफल रही हैं। कैसे, पूरा पढ़िए।
राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के लिए पहला पदक पक्का हो गया है। असम से ताल्लुक रखने वाली भारतीय मुक्केबाज ने यह सफलता दिलाई है। वे बिना रिंग में गए ही पदक तय करने में सफल रही हैं। इस मुक्केबाज का नाम लवलीना बोरगोहेन है। उन्होंने रिंग में कदम रखे बिना या एक भी पंच मारे बिना ही राष्ट्रमंडल खेलों 2026 में भारत के लिए पदक पक्का कर लिया है।
लवलीना को सेमीफाइनल में मिला सीधा प्रवेश
गुरुवार, 23 जुलाई को ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की शुरुआत में ही असम की इस मुक्केबाज को महिला 75 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में सीधा प्रवेश मिल गया। इससे उनका कम से कम कांस्य पदक पक्का हो गया है। लवलीना को पांच मुक्केबाजों के ड्रॉ में पहले दौर में बाई मिली, जिससे उन्होंने सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। अब वह 31 जुलाई को सेमीफाइनल में तुवालू की तारोना खानुम बदी पासोनी (टीकेबीपी) ताफाकी से भिड़ेंगी और विजेता स्वर्ण पदक के मुकाबले में पहुंचेगी।
राष्ट्रमंडल खेलों में लवलीना का पहला पदक
यह लवलीना का पहला राष्ट्रमंडल खेलों का पदक होगा और एकमात्र ऐसा बड़ा बहु-खेल सम्मान होगा जो अब तक उनके शानदार करियर में उनसे दूर रहा था। 28 वर्षीय लवलीना ओलंपिक खेलों, विश्व चैंपियनशिप, एशियाई खेलों और एशियाई चैंपियनशिप में पहले ही पदक जीत चुकी हैं। महिलाओं के 75 किलोग्राम वर्ग में केवल पांच मुक्केबाज ही भाग ले रही हैं, जिनमें से तीन- लवलीना, ताफाकी और ऑस्ट्रेलिया की एम्मा-सू ग्रीनट्री को पहले दौर में बाई मिली, जो क्वार्टरफाइनल के रूप में खेला गया। तीनों बिना मुकाबला किए ही सेमीफाइनल में पहुंच गईं। इंग्लैंड की मैरी केट स्मिथ और नाइजीरिया की पेट्रीसिया म्बाटा एकमात्र क्वार्टरफाइनल में एक-दूसरे का सामना करेंगी और विजेता दूसरे सेमीफाइनल में ग्रीनट्री से भिड़ेगी।
2022 के संस्करण में ऐसा रहा था प्रदर्शन
2022 में बर्मिंघम में हुए पिछले संस्करण में लवलीना लाइट मिडिलवेट वर्ग के क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थीं, जहां उन्हें वेल्स की रोजी एक्लेस से हार का सामना करना पड़ा था। भारोत्तोलक मीराबाई चानू के साथ-साथ लवलीना को भी गुरुवार को होने वाले उद्घाटन समारोह के लिए भारत की ध्वजवाहक के रूप में नामित किया गया है। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए बॉक्सिंग एक प्रमुख खेल रहा है, जिसमें देश को अब तक 44 पदक मिले हैं। ग्लासगो प्रतियोगिता में, आठ भारतीय मुक्केबाजों को पहले दौर में बाई मिली है। जैस्मीन लैंबोरिया (57 किलोग्राम), प्रिया घंघास (60 किलोग्राम) और प्रीति पवार (54 किलोग्राम) जैसी खिलाड़ी पदक हासिल करने से सिर्फ एक जीत दूर हैं।






