दिल्ली के जंतर-मंतर पर बैठे कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं और गुरुग्राम के अस्पताल में 26वें दिन अनशन कर रहे सोनम वांगचुक के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्राथमिकताओं को लेकर दूरी दिखने लगी है।
शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन ऐसे चौराहे पर पहुंच गया है, जहां दिल्ली के जंतर-मंतर पर बैठे कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं और 30 किलोमीटर दूर गुरुग्राम के अस्पताल में भर्ती अनशनकारी सोनम वांगचुक के बीच मांगों और प्राथमिकता को लेकर दूरी दिख रही है। चौराहे के बाकी दो रास्ते सरकार और विपक्ष तक जाते हैं। उनके बीच स्टूडेंट्स के मुद्दों पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा के पहले या बाद में बहस करने पर सहमति नहीं बन पाने से चार दिन से संसद ठप है। दिल्ली और दूसरे राज्यों से जंतर-मंतर पहुंचे छात्र-छात्रा उस चौराहे के गोलंबर पर किसी भी रास्ते से समाधान के आने का इंतजार कर रहे हैं। सरकार की तरफ से मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह वार्ता कर रहे हैं, लेकिन अब तक सोनम, कॉकरोच या विपक्ष में कोई माना नहीं है।
सोमवार को संसद मार्च करने अनुमान से ज्यादा लोगों के आने के बाद से सरकार काफी सक्रिय है। इन चार दिनों में जंतर-मंतर पर अनशन से उठाकर पहले सफदरजंग अस्पताल और फिर गुरुग्राम के प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराए सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं की मांगों में अंतर दिखने लगा है। प्रधान के इस्तीफा पर नरम पड़े सोनम अनशन खत्म करने के लिए सरकार से आश्वासन का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी ने आज भी पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक फास्ट ट्रैक कोर्ट के ऐलान पर कहा कि प्रधान को इस्तीफा देना ही होगा। संसद में बहस के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व वाले विपक्ष ने भी यही शर्त पकड़ रखी है। सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने थोड़े हल्के अंदाज में सरकार से कल कहा था कि अभी गलती मानकर इस्तीफा करा दें, 15 दिन बाद फिर किसी दूसरे विभाग का मंत्री बना लें।
लेकिन, गतिरोध के केंद्रीय मुद्दा धर्मेंद्र प्रधान को ही मंगलवार की रात आगे करके सरकार ने साफ कर दिया है कि इस्तीफा नहीं होगा। वांगचुक ने आंदोलनकारी छात्रों पर कानूनी कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन आते ही अनशन खत्म करने का ऐलान कल एक वीडियो संदेश में किया था। वीडियो संदेश जारी करने से ढाई घंटे पहले वांगचुक ने जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को लिखी चिट्ठी छापकर कहा था कि जैसे ही आश्वासन आएगा, वह अनशन तोड़ देंगे और छात्रों से भी आंदोलन खत्म करके सरकार से बात करने कहेंगे। मंगलवार रात दोनों मंत्री वांगचुक से मिलने गुरुग्राम गए थे। सोमवार को संसद मार्च वाले दिन जेपी नड्डा कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष लांका से एक बार मिलकर मांगपत्र ले चुके चुके हैं। अब आगे की बात करने नड्डा उन्हें अपने दफ्तर या घर बुला रहे हैं और कॉकरोच पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके सरकार से जंतर-मंतर पर ही आकर बात करने कह रहे हैं।
सोनम वांगचुक ने सरकार को भेजी चिट्ठी में नीट पेपर लीक के बाद सुसाइड करने वाले स्टूडेंट्स के परिवार को पर्याप्त मुआवजा, संसद में जवाबदेही तय करने वाली एक सार्थक बहस, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विचार और प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर कानूनी कार्रवाई नहीं करने का भरोसा मांगा है। वांगचुक के लेटर छापने के एक घंटे बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने भी चार मांगों का ट्वीट किया और स्पष्ट तौर पर कहा कि जब तक सरकार मांगें नहीं मानेगी, आंदोलन जारी रहेगा। इसमें एक नंबर पर इस्तीफा, दूसरे पर पीड़ित परिवार को 1 करोड़ मुआवजा, तीसरे पर छात्रों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं और चौथे पर लाठीचार्ज के लिए पुलिस वालों पर मुकदमा शामिल है। सोनम और कॉकरोच की प्राथमिकताओं में बदलाव और दूरी साफ दिख रही है।
जहां सोनम वांगचुक ने प्रदर्शन में शामिल छात्रों की गिरफ्तारी और उन पर मुकदमा नहीं करने को अब केंद्रीय मांग बना लिया है, वहीं कॉकरोच जनता पार्टी के नेता धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा की मांग पर अड़े दिख रहे हैं। जंतर-मंतर पर जुटे छात्र इन्हीं मुद्दों पर समर्थन करने पहुंचे हैं। ऐसे में आगे का रास्ता धुंधला दिख रहा है। बिना धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के सोनम वांगचुक अनशन तोड़ते हैं तो क्या कॉकरोच जनता पार्टी आंदोलन खत्म कर देगी। सरकार सोनम और कॉकरोच दोनों को मना लेती है तो क्या जंतर-मंतर पर जुटे स्टूडेंट्स बिना किसी सवाल या बवाल के लौट जाएंगे।
विपक्ष के लिए तो छात्रों का आंदोलन वरदान बनकर सामने आया है, जिसने उनमें कुछ ताकत लौटा दी है। सरकार द्वारा महिला आरक्षण और परिसीमन बिल मानसून सत्र में पास कराकर बजट सत्र में मिली शिकस्त का जवाब देने की तैयारियों की चर्चा तो बहुत है, लेकिन विपक्ष छात्रों के मुद्दे पर संसद स्थगित कराने का मौका एक दिन भी नहीं गंवा रहा है। वीकेंड आने वाले हैं। इस दौरान जंतर-मंतर पर भीड़ और बढ़ सकती है। आंदोलन दूसरे शहरों तक फैल रहा है। इसके लंबा खिंचने से आंदोलन कमजोर होगा या मजबूत, कहना मुश्किल है। ऐसे में सरकार शुक्रवार की रात से शनिवार की सुबह तक एक बार जोर लगाकर पूरी कोशिश कर सकती है कि कैसे भी आंदोलन खत्म हो।







