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आंसुओं से मेडल तक का सफर…पिता को खोया, पेट पालने को कैब चलाई, अब एशियन गेम्स में रचा इतिहास

Admin by Admin
September 25, 2026
in खेल
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आंसुओं से मेडल तक का सफर…पिता को खोया, पेट पालने को कैब चलाई, अब एशियन गेम्स में रचा इतिहास


Last Updated:September 24, 2026, 23:21 IST

Salman Khan Struggle Story: पिता के निधन के बाद परिवार संभालने के लिए कभी दिल्ली-एनसीआर में उबर कैब चलाने वाले सलमान खान ने एशियाई खेलों में इतिहास रच दिया है. 2018 में भारतीय सेना में शामिल होकर रोइंग शुरू करने वाले सलमान ने सतनाम सिंह के साथ मिलकर पुरुष डबल स्कल्स में भारत को कांस्य पदक दिलाया. संघर्ष, समर्पण और पिता के सपने को पूरा करने की यह कहानी साबित करती है कि अगर इरादे बुलंद हों तो राह की हर रुकावट पार की जा सकती है.

पिता को खोया, पेट पालने को चलाई कैब, अब एशियन गेम्स में रचा इतिहास Zoom

सलमान खान ने रोइंग में एशियन गेम्स में मेडल जीतकर इतिहास कायम किया.

नागोया. एशियाई खेलों में पुरुष डबल स्कल्स में भारत को ऐतिहासिक कांस्य पदक दिलाने वाली जोड़ी के सदस्य सलमान खान ने नौ साल पहले दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर उबर कैब चलाई थी. अब उनके हाथों में स्टीयरिंग की जगह पतवार है.  सलमान और सतनाम सिंह ने एशियाई खेलों में पुरुष डबल स्कल्स में कांस्य पदक के रूप में भारत का पहला पदक जीता. लेकिन इससे पहले सलमान अपने पिता के निधन के बाद परिवार का भरण-पोषण करने के लिए अपनी वैगनआर कार को दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर दिन-रात चलाते थे.

सलमान खान (Salman Khan)  भारत के लिए रोइंग में एकमात्र पदक जीतने के बाद कहा, ‘हां, 2016 में मेरे पिता के निधन के बाद मुझे अपने परिवार की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी क्योंकि मैं सबसे बड़ा भाई हूं. इसलिए मैंने वैगनआर से उबर चालक के तौर पर काम किया. मैंने यह काम 2017 में सिर्फ एक साल किया. उबर चालक के रूप में काम करने के साथ-साथ मैं भारतीय सेना में भर्ती के लिए आवेदन पत्र भी भरता रहता था.’

एक साल बाद सलमान भारतीय सेना में भर्ती हो गए जो उनके लिए एक सपना पूरा होने जैसा था क्योंकि उनके दिवंगत पिता चाहते थे कि वह सेना में शामिल हों.  उत्तर प्रदेश के अमेठी के रहने वाले इस रोइंग खिलाड़ी ने कहा, ‘मेरे पिता का सपना था कि मैं भारतीय सेना का हिस्सा बनूं और मैं उसे पूरा कर सका. भारतीय सेना में शामिल होने के कारण मैंने रोइंग शुरू की और आज मैं यहां हूं.’

अब 28 वर्षीय सलमान ने एशियाई खेलों का अपना पहला पदक जीता. रोइंग में उनका सफर 2018 में भारतीय सेना के बॉम्बे इंजीनियरिंग ग्रुप में शामिल होने के बाद शुरू हुआ. कोच सत्यवान, सतीश सिरात और प्रभात मिश्रा ने उन्हें रोइंग से परिचित कराया और केंद्र की टीम के लिए उनका चयन किया. रोइंग टीम को लेकर हुए विवाद पर सलमान ने कहा कि अंतिम समय में टीम के सदस्यों में बदलाव का खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर असर पड़ा.

सलमान ने कहा, ‘अगर हमने लंबे समय तक साथ में अभ्यास किया होता तो हम स्वर्ण पदक जीतते। चीन की टीम स्वर्ण पदक की हकदार नहीं थी.’  उन्होंने कहा, ‘सब कुछ अचानक हुआ लेकिन अब इन सब बातों को कहने का कोई मतलब नहीं है. यह मेरे हाथ में नहीं था.’

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Kamlesh Raiचीफ सब एडिटर

कमलेश कुमार राय नेटवर्क18 ग्रुप में बतौर चीफ सब एडिटर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह बीते 15 सालों से खेल पत्रकारिता की पिच पर डटे हुए हैं. हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में वह खेल कंटेंट की गहरी समझ, सटीक विश्लेषण और ब…

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Location :

New Delhi,New Delhi,Delhi

First Published :

September 24, 2026, 23:21 IST



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