@जे0 के0…..
— एसटी भूमि के बैनामे निरस्त कर ग्राम सभा में निहित करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
— खेल मैदान, बारातघर और बिरसा मुंडा की प्रतिमा लगाने की तैयारी

Sonbhadra। दुद्धी तहसील क्षेत्र के बघाड़ू गांव में जनजातीय भूमि के बैनामों से जुड़े मामले में जिला प्रशासन को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। न्यायालय ने प्रशासन द्वारा भूमि के बैनामों को शून्य घोषित कर जमीन ग्राम सभा में निहित किए जाने की कार्रवाई में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। इस मामले में संबंधित महिला की ओर से प्रशासन की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी।
हाईकोर्ट के फैसले की रिपोर्टिंग में भी सोनभद्र की नन्हकी उर्फ नैमुन्निशा की याचिकाएं खारिज होने की जानकारी सामने आई है।
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के अनुसार, बघाड़ू में जनजातीय समाज की भूमि के बैनामों की जांच के दौरान दस्तावेजों में अनियमितता सामने आई थी। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 40 गाटों में दर्ज करीब 5.7142 हेक्टेयर भूमि को ग्राम सभा में निहित कर दिया।

प्रशासन का आरोप है कि संबंधित भूमि की खरीद-बिक्री जनजातीय महिला की पुरानी पहचान के आधार पर कराई गई थी। इससे पहले बघाड़ू में बड़ी संख्या में ऐसे बैनामों की जांच और निरस्तीकरण की कार्रवाई की खबरें भी सामने आ चुकी हैं।
प्रशासन के मुताबिक, मामले में हाईकोर्ट के समक्ष प्रभावी पैरवी की गई। न्यायालय के आदेश के बाद अब ग्राम सभा में निहित भूमि का जनहित में उपयोग करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
जमीन पर बनेगा खेल मैदान और बारातघर :
जिलाधिकारी ने बताया कि भूमि का उपयोग स्थानीय लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। यहां बच्चों के लिए खेल मैदान और ग्रामीणों की सुविधा के लिए बारातघर बनाने की योजना है। इसके साथ ही समाज सुधारक बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी भी की जा रही है। शेष भूमि पर आवश्यकतानुसार शासकीय भवनों के निर्माण की योजना बनाई जाएगी।
जनजातीय पहचान और वैधानिक संरक्षण पर भी उठे सवाल:
मामले की सुनवाई के दौरान यह सवाल भी सामने आया कि लंबे समय तक दूसरे धर्म और रीति-रिवाजों के अनुसार जीवन बिताने वाले व्यक्ति के लिए अनुसूचित जनजाति से जुड़े वैधानिक संरक्षण का दावा किन परिस्थितियों में स्वीकार्य हो सकता है। उपलब्ध न्यायिक रिपोर्टिंग के अनुसार हाईकोर्ट ने संबंधित याचिकाओं को खारिज किया है।
बघाड़ू प्रकरण में प्रशासन की कार्रवाई और उसके बाद हाईकोर्ट के आदेश से अब ग्राम सभा में निहित भूमि के सार्वजनिक उपयोग का रास्ता साफ होने की बात जिला प्रशासन की ओर से कही गई है।
