Last Updated:
निठारी कांड में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद हाल ही में बरी हुए सुरेंद्र कोली की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है. परिजनों और उनके परिचितों ने इसे आत्महत्या मानने से साफ इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई है. परिवार के साथ पहुंचे पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत ने मौके की परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे एक गहरी साजिश करार दिया और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.
हरिद्वार. बहुचर्चित निठारी कांड में बरी हो चुके सुरेंद्र कोली की संदिग्ध मौत के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है. शनिवार को जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया लेकिन परिजनों और उनके परिचितों ने इसे आत्महत्या मानने से साफ इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई है. परिवार के साथ शव लेने पहुंचे सल्ट क्षेत्र के पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत ने मौके की परिस्थितियों पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसे गहरी साजिश बताया और उच्च स्तरीय जांच की मांग की.
पुलिस की प्राथमिक थ्योरी आर्थिक तंगी और अतिक्रमण की कार्रवाई के दबाव की ओर इशारा कर रही है. 19 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिली रिहाई और अब अचानक हुई इस रहस्यमयी मौत ने व्यवस्था और जांच एजेंसियों के सामने कई अनसुलझे सवाल खड़े कर दिए हैं.
खौफ में परिवार के लोग
अस्पताल परिसर में पोस्टमार्टम के दौरान सुरेंद्र कोली के परिजनों के चेहरे पर मौत के गम से ज़्यादा खौफ देखा गया. 19 साल तक सामाजिक तिरस्कार और कानूनी उलझनों की गहरी प्रताड़ना झेलने के बाद परिवार आज भी किसी नए सामाजिक दंश या बदले की भावना के डर से कांप रहा है. स्थिति यह रही कि जब एक फोटो ग्राफर ने परिजन का फोटो खींचने का प्रयास किया तो परिवार ने तुरंत फोन से वह फोटो डिलीट करवा दी. परिजनों ने कैमरे पर कोई भी बयान देने या तस्वीर खिंचवाने से साफ इनकार कर दिया. उनके साथ आए पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत ने भी स्पष्ट किया कि परिवार बुरी तरह डरा-सहमा है और उन्हें डर है कि सामने आने से उन्हें कहीं सामाजिक भेदभाव या किसी अनहोनी का सामना ना करना पड़े.
गरीब और दलित पृष्ठभूमि ने लड़ाई को बनाया कठिन
नारायण सिंह रावत ने लोकल 18 कहा यह मामला 2006 से चल रहा था. करीब 20 साल बाद जाकर उसे कानूनी न्याय तो मिला लेकिन सामाजिक, आर्थिक और जातीय न्याय नहीं मिल सका. इतने सालों तक जेल में रहने और भविष्य बर्बाद होने के बाद सरकार या न्यायपालिका ने उसके रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं की. वह गरीब, अशिक्षित और दलित वर्ग से था जिसकी वजह से वह लंबे समय तक परिस्थितियों का शिकार बना रहा. दलित पृष्ठभूमि और कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते यह पूरी कानूनी और सामाजिक लड़ाई इस परिवार के लिए पहले से ही बेहद कठिन और दर्दनाक रही है. रिहाई के बाद वह हरिद्वार में महज एक खोखा लगाकर अपनी रोजी-रोटी शुरू करने और पैरों पर खड़ा होने की जद्दोजहद में जुटा था.
कम ऊंचाई, गले की गांठ और खून हत्या के गंभीर आरोप
मौत की परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए नारायण सिंह रावत ने कहा यह आत्महत्या नहीं, बल्कि सीधे तौर पर एक बड़ी साजिश और हत्या का मामला लग रहा है. जिस खोखे में शव मिला उसकी ऊंचाई करीब सात फीट है. इतनी कम ऊंचाई पर कोई फांसी नहीं लगा सकता. शव के गले में जिस तरह गांठ बंधी थी और रस्सी बराबर कटी हुई थी वह खुदकुशी की ओर इशारा नहीं करती. इसके अलावा मृतक के मुंह और नाक से खून निकला हुआ था जबकि सामान्यतः फांसी लगाने पर ऐसा नहीं होता है. घटना के वक्त दुकान का शटर भी खुला मिला था. यह सभी साक्ष्य स्थानीय स्तर पर किसी गहरी साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं इसलिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और कमेटी बनाकर सच सामने लाकर पीड़ित परिवार को न्याय दिया जाना चाहिए.
About the Author

सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …
और पढ़ें

