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Raja Bhaiya News: चर्चित सीओ जियाउल हक हत्याकांड मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को बड़ी कानूनी राहत मिली है. लखनऊ स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने मामले की दोबारा जांच के बाद सीबीआई (CBI) द्वारा दाखिल की गई फाइनल रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है. कोर्ट ने राजा भैया के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की मांग को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. अदालत ने माना कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं. इस बड़े फैसले से राजा भैया पर लंबे समय से लटकी मुकदमे की तलवार हट गई है.
CO जियाउल हक हत्याकांड में राजा भैया को सीबीआई कोर्ट से राहत. (फाइल फोटो)
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित सीओ जियाउल हक हत्याकांड में कुंडा के विधायक और पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को सीबीआई कोर्ट से एक बड़ी राहत मिली है. लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने दोबारा जांच के बाद दाखिल की गई सीबीआई की फाइनल रिपोर्ट (क्लोजर रिपोर्ट) को अपनी मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही कोर्ट ने राजा भैया के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की मांग को खारिज कर दिया है.
प्रतापगढ़ के कुंडा में हुए इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद मृतक सीओ जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद ने पिछली जांच पर सवाल उठाए थे. उन्होंने मामले में राजा भैया की कथित भूमिका को लेकर दोबारा जांच की मांग की थी, जिसके बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मामले की नए सिरे से तफ्तीश शुरू की थी.
राजा भैया पर दर्ज हुई थी चौथी एफआईआर
घटना के अगले दिन, 3 मार्च 2013 को शहीद सीओ की पत्नी परवीन आजाद ने पुलिस में चौथी एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें स्थानीय विधायक राजा भैया को सीधे तौर पर आरोपी बनाया गया था. मामले की संवेदनशीलता और सियासी बवाल को देखते हुए तत्कालीन राज्य सरकार ने विवेचना पुलिस से हटाकर सीबीआई को सौंप दी थी. सीबीआई ने सभी मामलों को एक साथ जोड़कर चार्जशीट दाखिल की थी. इसी मुख्य मामले में लंबी सुनवाई पूरी होने के बाद 9 अक्टूबर 2024 को कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई थी.
दोबारा जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट मंजूर
सीबीआई ने राजा भैया के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में 31 जुलाई 2013 को ही पहली क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी. लेकिन, वादिनी परवीन आजाद ने इसके खिलाफ कोर्ट में प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र दाखिल कर दिया. इस पर कोर्ट ने 8 जुलाई 2014 को मामले की दोबारा अग्रिम विवेचना करने का आदेश दिया. सीबीआई ने नए सिरे से जांच करने के बाद 22 दिसंबर 2023 को फिर से क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में पेश की. अंततः, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और तथ्यों का संज्ञान लेने के बाद स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करने का आदेश पारित कर दिया है.
अन्य आरोपियों पर जारी रहेगी कानूनी प्रक्रिया
लखनऊ की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने सीबीआई की इस रिपोर्ट और मामले में सामने आए तमाम साक्ष्यों पर विस्तृत सुनवाई की. सभी तथ्यों को देखने के बाद अदालत ने माना कि राजा भैया के खिलाफ मामले को आगे बढ़ाने का कोई आधार मौजूद नहीं है. हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि यह न्यायिक आदेश विशेष रूप से केवल राजा भैया की भूमिका से संबंधित है. इस जघन्य हत्याकांड में नामजद अन्य आरोपियों के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया पहले की तरह ही अलग से जारी रहेगी.
क्या है सीओ जियाउल हक हत्याकांड का मामला
यह मामला 2 मार्च 2013 का है. प्रतापगढ़ जिले के कुंडा क्षेत्र स्थित बलीपुर गांव में ग्राम प्रधान नन्हें यादव की हत्या के बाद भारी बवाल हो गया था. सूचना मिलते ही मौके पर कानून-व्यवस्था संभालने पहुंचे कुंडा के तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक (सीओ) जियाउल हक को उग्र भीड़ ने घेर लिया और उनकी लाठी-डंडों से पिटाई करने के बाद गोली मारकर हत्या कर दी. इस घटना के बाद मृतक अधिकारी की पत्नी परवीन आजाद ने स्थानीय विधायक और तत्कालीन कैबिनेट मंत्री राजा भैया व उनके करीबियों पर हत्या की साजिश रचने का सीधा आरोप लगाते हुए नामजद एफआईआर दर्ज कराई थी. भारी राजनीतिक हंगामे और चौतरफा दबाव के चलते राजा भैया को अखिलेश सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था और पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी.
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …
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