@जे0 के0/@कृपा शंकर पांडेय….

Sonbhadra। फिल्म ‘हनुमान अंश’ की सफलता इन दिनों चर्चा में है, लेकिन इस फिल्म से जुड़ी एक कहानी सोनभद्र से भी जुड़ती है। फिल्म में सेकंड असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर चुके शशांक सिंह तोमर ओबरा परियोजना के सिक्योरिटी चीफ एसके सिंह के भतीजे हैं। फिल्म की सफलता पर एसके सिंह और उनके परिवार में भी खासा उत्साह है।
दिलचस्प बात यह है कि शशांक को शुरुआत में ‘हनुमान अंश’ में फर्स्ट असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर जुड़ने का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उस समय वह अपनी फिल्म ‘पहरेदार’ की स्क्रिप्ट लिखने में व्यस्त थे। लिहाजा उन्होंने प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। बाद में ‘पहरेदार’ का लेखन पूरा होने के बाद जब उसकी रेकी और तैयारियां शुरू हुईं तो ‘हनुमान अंश’ की टीम ने शशांक से दोबारा संपर्क किया। इस बार वह फिल्म से सेकंड असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में जुड़ गए।

शशांक के मुताबिक फिल्म के सेट पर काम करने का अनुभव उनके लिए सामान्य फिल्मी अनुभव से कहीं ज्यादा रहा। शूटिंग के दौरान कुछ घटनाओं ने उन पर गहरा प्रभाव डाला और उनके भीतर नीम करौली बाबा को लेकर अलग तरह का विश्वास पैदा हुआ। वह इस पूरे घटनाक्रम को जीवन का खास संयोग मानते हैं।
एसके सिंह ने बताया कि फिल्म की सफलता पर उन्हें और परिवार के लोगों को लगातार बधाइयां मिल रही हैं। परिवार फिल्म को चार बार देख चुका है। उनके मुताबिक अच्छी कहानी, निर्देशक का मार्गदर्शन और पूरी टीम की मेहनत ने फिल्म को दर्शकों के बीच जगह दिलाई है।

फिल्म के कारोबार को लेकर सामने आए आंकड़ों के मुताबिक करीब 1.75 से 2 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट वाली फिल्म ने 40 दिनों में लगभग 291.40 करोड़ रुपये का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन किया है। भारत में नेट कलेक्शन करीब 231.13 करोड़ और ग्रॉस 272.90 करोड़ रुपये बताया गया है। कम बजट की तुलना में यह प्रदर्शन फिल्म से जुड़े लोगों के लिए भी अप्रत्याशित बताया जा रहा है।
इधर, शशांक की अपनी फिल्म ‘पहरेदार’ का निर्माण और पोस्ट-प्रोडक्शन पूरा हो चुका है। अब ‘हनुमान अंश’ की सफलता के साथ शशांक सिंह तोमर का फिल्मी सफर और उनके सोनभद्र कनेक्शन ने भी लोगों का ध्यान खींचा है।
