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एक की पीठ सुनहरी, किसी का रंग बैंगनी, कोई टंक-टंक करता है तो कोई सिलता है पत्तियां, दुधवा में दिखते हैं ये अनोखे पक्षी

Admin by Admin
September 16, 2026
in उत्तर प्रदेश
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एक की पीठ सुनहरी, किसी का रंग बैंगनी, कोई टंक-टंक करता है तो कोई सिलता है पत्तियां, दुधवा में दिखते हैं ये अनोखे पक्षी


Last Updated:September 16, 2026, 15:02 IST

Rare Bird Species in Dudhwa: लखीमपुर खीरी का दुधवा टाइगर रिजर्व सिर्फ बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि रंग-बिरंगे और अनोखी पहचान वाले पक्षियों के लिए भी खास है. यहां मानसून के दौरान पपीहे की आवाज से लेकर पेड़ों पर नजर आने वाले फ्लेमबैक वुडपेकर, कॉपरस्मिथ बार्बेट, बैंगनी सुगरबर्ड और ब्लू-थ्रोटेड ब्लू फ्लाईकैचर तक कई खूबसूरत पक्षी दिखाई देते हैं. किसी की चमकीली पीठ तो किसी की लाल माथे की पट्टी पहचान बनती है, वहीं छोटी दर्जिन चिड़िया पत्तियों को सिलकर अपना घोंसला बनाने के लिए जानी जाती है. तोते भी यहां झुंड में पेड़ों पर नजर आते हैं और सुबह-शाम उनकी आवाज जंगल में आसानी से सुनाई देती है.

बारिश का मौसम आते ही गांवों और खेत-खलिहानों के आसपास पक्षियों की आवाजाही बढ़ जाती है. इन्हीं में पपीहा भी शामिल है, जिसकी आवाज मानसून के मौसम में अक्सर सुनाई देती है. इसकी मधुर लेकिन लगातार दोहराई जाने वाली आवाज लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती है. ग्रामीण इलाकों में पपीहे की आवाज को लंबे समय से बारिश के आगमन और मौसम में बदलाव से जोड़कर देखा जाता रहा है. लखीमपुर खीरी में आप इस पक्षी का दुधवा के जंगलों में दीदार कर सकते हैं. पपीहा मुख्य रूप से पेड़ों पर रहने वाला पक्षी है. बरसात के दिनों में वातावरण में नमी बढ़ने और कीट-पतंगों की उपलब्धता बढ़ने के कारण पक्षियों की गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं.

बैंगनी सुगरबर्ड यानी Purple Sunbird भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एक छोटा और खूबसूरत पक्षी है. नर बैंगनी सुगरबर्ड की खास पहचान उसका चमकीला नीला-काला या बैंगनी रंग का शरीर और लंबी, पतली व हल्की मुड़ी हुई चोंच है. इसकी चोंच फूलों से रस यानी नेक्टर निकालने के लिए खास तौर पर अनुकूल होती है. यह पक्षी मुख्य रूप से फूलों का रस पीकर भोजन प्राप्त करता है. इसके अलावा यह छोटे कीड़े-मकोड़ों और अन्य सूक्ष्म जीवों को भी खाता है. अगर आप भी इस पक्षी को देखना चाहते हैं तो दुधवा के जंगलों में इसे देखा जा सकता है.

लखीमपुर खीरी स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व की जैव विविधता में कई रंग-बिरंगे पक्षी देखने को मिलते हैं. इनमें तोता भी शामिल है, जो अपनी तेज आवाज और हरे रंग के कारण आसानी से पहचाना जाता है. जंगल और आसपास के ग्रामीण इलाकों में तोतों को पेड़ों पर झुंड में बैठे या एक जगह से दूसरी जगह उड़ते हुए देखा जा सकता है.

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दुधवा टाइगर रिजर्व की सोनारीपुर रेंज में पेड़ों पर नजर आने वाला फ्लेमबैक वुडपेकर अपनी चमकीली सुनहरी-पीली पीठ के कारण दूर से ही आकर्षित करता है. इसके सिर पर काले-सफेद धारियां और मजबूत, नुकीली चोंच इसकी प्रमुख पहचान हैं. इसकी चोंच पेड़ों की छाल और लकड़ी को ठोंककर भोजन तलाशने में मदद करती है. यह पक्षी मुख्य रूप से पेड़ों की छाल के नीचे छिपे कीड़े-मकोड़े, लार्वा और दूसरे छोटे जीवों को खाता है. भोजन की तलाश में यह पेड़ के तने पर लगातार चोंच मारता हुआ दिखाई देता है.

लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व की जैव विविधता में कॉपरस्मिथ बार्बेट यानी तांबट पक्षी भी पाया जाता है. हरे रंग का यह छोटा और गोल-मटोल पक्षी अपनी चमकीली लाल माथे की पट्टी और आंखों के आसपास पीले रंग के कारण आसानी से पहचाना जा सकता है. इस पक्षी की आवाज भी इसकी खास पहचान है. यह लगातार एक जैसी ‘टंक-टंक’ आवाज निकालता है, जिससे जंगल में इसकी मौजूदगी का पता चल जाता है.

दुधवा टाइगर रिजर्व की जैव विविधता में कई आकर्षक छोटे पक्षी पाए जाते हैं. इनमें ब्लू-थ्रोटेड ब्लू फ्लाईकैचर (Blue-throated Blue Flycatcher) भी शामिल है. इसका वैज्ञानिक नाम Cyornis rubeculoides है. इस पक्षी की सबसे खास पहचान इसके शरीर के चमकीले रंग हैं. नर पक्षी के ऊपरी हिस्से नीले, गला गहरे नीले रंग का और सीना नारंगी-लाल दिखाई देता है. यह पक्षी सामान्य तौर पर घने जंगलों, झाड़ियों और पेड़ों से घिरे क्षेत्रों में रहना पसंद करता है.

दुधवा में छोटी दर्जिन चिड़िया भी नजर आती है, जो पत्तियों को सिलकर अपना घोंसला बनाती है. यह आकार में छोटी, फुर्तीली और लगातार सक्रिय रहने वाली चिड़िया है. इसका वैज्ञानिक नाम Orthotomus sutorius है. दर्जिन चिड़िया की पहचान इसकी जैतूनी-हरे रंग की पीठ, हल्के रंग के निचले हिस्से, पतली लंबी चोंच और सिर पर जंग जैसे भूरे-लाल रंग से की जा सकती है. यह अक्सर झाड़ियों, घास और पेड़ों की घनी पत्तियों के बीच फुदकती नजर आती है. अपने छोटे आकार के बावजूद इसकी तेज और मधुर आवाज जंगल और झाड़ियों में आसानी से सुनाई दे सकती है.

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First Published :

September 16, 2026, 15:02 IST



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