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Shooter Mona Agarwal Success Story: मोना अग्रवाल की कहानी संघर्ष, जुनून और सफलता की मिसाल है. जयपुर की रहने वाली मोना ने शूटिंग से पहले वॉलीबॉल खेला, लेकिन टोक्यो पैरालिंपिक में अवनी लेखरा की सफलता देखकर उन्होंने निशानेबाजी को अपना लक्ष्य बना लिया. जयपुर की एकलव्य शूटिंग अकादमी से प्रशिक्षण शुरू करने वाली मोना के पास शुरुआती दिनों में उच्च स्तर के शूटिंग उपकरण भी नहीं थे. इसके बावजूद उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन किया. सर्बिया के नोवी सैड में डब्ल्यूएसपीएस विश्व कप और पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप-2023 में कांस्य पदक जीतने के बाद उन्होंने पेरिस पैरालिंपिक में इंडिविजुअल ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया. अब चांगवोन में रजत पदक जीतकर 2028 लॉस एंजिल्स पैरालिंपिक के लिए क्वालिफाई किया है. मोना अपनी सफलता का श्रेय कोच योगेश शेखावत को भी देती हैं.
मन में कुछ करने का जुनून हो तो तमाम मुसीबतों को हराकर भी सफलता की राहों पर आगे बढ़ा जा सकता है. जयपुर की मोना अग्रवाल ने इसको साबित कर दिखाया है. मोना ने हाल ही में दक्षिण कोरिया के चोंगवन में पैरा वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप में इंडिविजुअल 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग इवेंट में 250.0 अंक के साथ सिल्वर मेडल जीत कर लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक 2028 के लिए क्वालिफाई कर लिया है. अब जयपुर की बेटी मोना दूसरी बार पैरालिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी.
दक्षिण कोरिया के चांगवोन में आयोजित विश्व पैरा शूटिंग चैंपियनशिप में अवनी लेखारा और मिली शाह की टीम के साथ R2 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग SH1 स्पर्धा में टीम इवेंट में 1878.6 अंक के स्वर्ण पदक जीतते हुए मोना ने सिल्वर मेडल जीता है. इस प्रतियोगिता में सर्बिया की क्रिस्टीना ट्रिफुनोविक ने व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता और दूसरे स्थान पर मोना ने भारत को रजत पदक के साथ लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक 2028 कोटा दिलवाया.
मोना अग्रवाल की कहानी प्रेरणा से भरी है, क्योंकि एक समय था जब मोना अपने घर पर बैठकर टीवी पर किसी और की कामयाबी देखती थीं और फिर उसी कामयाबी को अपने सपने के तौर पर देखती थीं. जयपुर की मोना अग्रवाल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. टोक्यो पैरालिंपिक में जब अवनी लेखरा ने गोल्ड मेडल जीता, तब मोना दूर जयपुर में बैठी उनकी उपलब्धि देख रही थीं. उस दिन उन्होंने ठाना कि वह भी व्हीलचेयर पर बैठकर देश के लिए खेल सकती हैं और अवनी लेखरा से प्रेरित होकर अपने शूटिंग खेल की शुरुआत की.
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मोना अग्रवाल ने भले ही अवनी लेखरा से प्रेरित होकर शूटिंग खेल की शुरुआत की, लेकिन अवनी की तरह उन्होंने शूटिंग की अलग-अलग इवेंट के बजाय इंडिविजुअल 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग इवेंट में शूटिंग खेल की शुरुआत की. दिल्ली में पहली बार आयोजित पैरा वर्ल्ड कप में गोल्ड जीतते हुए अवनी लेखरा को हराकर पेरिस पैरालिंपिक के लिए क्वालिफाई किया था और उसमें रजत पदक जीता. जिसके बाद अब यह दूसरा मौका है, जब मोना ने अवनी को हराकर दूसरी बार पैरालिंपिक के लिए क्वालिफाई किया है.
मोना अग्रवाल ने शूटिंग की विभिन्न प्रतियोगिताओं में मेडल जीते हैं, जिनमें जूनियर और सीनियर वर्ग के मुकाबले शामिल हैं. उन्होंने सर्बिया के नोवी सैड में आयोजित WSPS विश्व कप में कांस्य पदक और पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप-2023 में कांस्य पदक जीता. इसके अलावा, 2024 में पेरिस पैरालिंपिक में इंडिविजुअल ब्रॉन्ज मेडल भी जीत चुकी हैं. लगातार अलग-अलग प्रतियोगिताओं में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलते हुए मोना ने शानदार प्रदर्शन किया और कई मेडल जीते.
मोना अग्रवाल के लगातार शानदार प्रदर्शन को देखते हुए खेल के क्षेत्र में दिए जाने वाले पुरस्कार अर्जुन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है. इसके अलावा महाराजा अग्रसेन ग्लोबल आइकॉन अवॉर्ड सहित राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें कई अवॉर्ड मिले हैं. यहां तक कि भारत के प्रधानमंत्री भी उनके खेल की तारीफ कर चुके हैं और उन्हें सम्मानित कर चुके हैं.
मोना अग्रवाल जयपुर की ऐसी पैरा शूटिंग खिलाड़ी हैं, जो लगातार दूसरी बार पैरालंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी. पेरिस पैरालंपिक की जीत के बाद उन्होंने पैरा वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने के साथ ही 2028 लॉस एंजिल्स पैरालंपिक खेलों के लिए क्वालिफाई कर लिया है. इसके साथ ही वह लॉस एंजिल्स पैरालंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाली पहली भारतीय निशानेबाज बन गई हैं. इससे पहले वह महज 0.3 अंकों से क्वालिफाई करने से चूक गई थीं.
मोना अग्रवाल जयपुर की स्थानीय निवासी हैं, जो शूटिंग से पहले वॉलीबॉल खेलती थीं. लेकिन उन्होंने जयपुर की एकलव्य शूटिंग अकादमी से अपने शूटिंग करियर की शुरुआत की. एक समय मोना के लिए ऐसा भी था, जब शुरुआती दिनों में उनके पास उच्च स्तर के शूटिंग इक्विपमेंट तक नहीं थे. पेरिस पैरालंपिक में मेडल जीतने से पहले तक शूटिंग की दुनिया में उन्हें कोई खास नहीं जानता था. लगातार प्रतियोगिताओं में मेडल जीतने का श्रेय मोना हमेशा अपने कोच योगेश शेखावत को देती हैं.

