नई दिल्ली. यह एक ऐसी कहानी है जहां हवाओं का मिजाज, मैदान का दबाव और आंखों में पाले गए सपने एक साथ मिलकर इतिहास रचते हैं. कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के जैवलिन थ्रो फाइनल में हर भारतीय फैंस की निगाहें नीरज चोपड़ा पर टिकी हैं, लेकिन स्वर्ण पदक और नीरज के बीच सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़े हैं श्रीलंका के 23 वर्षीय रुमेश थरंगा पथिरागे. इस सीजन 92.62 मीटर की दूरी तय करने वाले पथिरागे न सिर्फ इस समय दुनिया के सर्वश्रेष्ठ थ्रोअर बनकर उभरे हैं, बल्कि वह नीरज चोपड़ा और उनके गोल्ड मेडल के बीच सबसे बड़ा कांटा साबित हो रहे हैं. भाला फेंक की दुनिया में अक्सर दूरियों को मीटर में मापा जाता है, लेकिन कुछ थ्रो ऐसे होते हैं जो सीमाओं और महाद्वीपों से परे जाकर एक नया इतिहास लिख देते हैं.
कहानियों की शुरुआत अक्सर बड़ी प्रतिस्पर्धाओं और उन हवाओं से होती है जो खिलाड़ियों की परीक्षा लेती हैं. गुरुवार की एक ऐसी ही सुबह थी, जब मैदान पर 13 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम की ओर चलती तेज हवाएं थ्रोअर्स के लिए काल बन रही थीं. क्रॉसविंड्स यानी आर-पार बहती हवाएं भाले की उड़ान को लगातार बिगाड़ रही थीं. स्थिति इतनी कठिन थी कि ओलंपिक और विश्व चैंपियंस से भरे 18 एथलीटों के इस समूह में से कोई भी एथलीट 84 मीटर का बेसिक क्वालीफिकेशन मार्क तक हासिल नहीं कर सका.
दिग्गजों का संघर्ष और क्वालिफिकेशन की जंग
इसी चुनौतीपूर्ण माहौल के बीच केन्या के पूर्व विश्व चैंपियन जूलियस येगो, पाकिस्तान के मोहम्मद यासिर और श्रीलंका के सुमेधा राणासिंघे जैसे नाम बाहर हो गए. त्रिनिदाद और टोबैगो के पूर्व ओलंपिक चैंपियन और 2025 के विश्व चैंपियन केशॉर्न वालकोट भी 78.26 मीटर का थ्रो फेंककर किसी तरह 12वें स्थान पर रहकर क्वालीफाई कर पाए. स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि फाइनल में पहुंचे आखिरी छह एथलीटों का थ्रो 78.26 मीटर से 78.91 मीटर के बेहद छोटे अंतर के बीच अटका हुआ था. पाकिस्तान के स्टार एथलीट अरशद नदीम (Arshad Nadeem) ने भी अपने तीनों प्रयासों में बदलाव किए, लेकिन उनका पहला प्रयास ही 78.63 मीटर का रहा जो आगे जाने के लिए काफी साबित हुआ. वहीं एंडरसन पीटर्स ने रन-अप के आखिरी छोर से 81.29 मीटर का थ्रो फेंककर अपनी दावेदारी मजबूत रखी.
पथिरागे का धमाकेदार आगाज
लेकिन इस मुश्किल परिस्थितियों वाले दिन में अगर किसी एक नाम ने सबसे अलग चमक बिखेरी, तो वह थे श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे (Rumesh Tharanga Pathirage). हवाओं से जूझते हुए उन्होंने अपनी पहली ही कोशिश में 82.84 मीटर का शानदार थ्रो करके 18 खिलाड़ियों के इस बड़े मैदान का नेतृत्व किया. पथिरागे के इस आत्मविश्वास की जड़ें उस अद्भुत शाम से जुड़ी थीं, जिसने उन्हें रातों-रात एथलेटिक्स की दुनिया का नया सितारा बना दिया था.
रोम में रचा इतिहास
वह रोम की एक सुहानी जून की शाम थी. इतिहास के पन्नों में दर्ज इस इतालवी शहर ने 23 साल के इस युवा के लिए एक नया इतिहास बनते देखा. दिल में जुनून और आंखों में जीत की आग लिए रुमेश थरंगा पथिरागे ने अपने दाहिने हाथ से भाले को हवा में उछाला. एक जोरदार गर्जना के साथ जब भाला आगे बढ़ा, तो उसके हरी घास को छूने से पहले ही पथिरागे को अहसास हो गया था कि कुछ ऐतिहासिक होने वाला है.
92.62 मीटर का वो ऐतिहासिक थ्रो
रोम डायमंड लीग 2026 की उस शाम, मैदान पर श्रीलंका का झंडा लहराते कुछ प्रशंसकों के सामने पथिरागे ने 92.62 मीटर का विशालकाय थ्रो कर दिया. इस एक थ्रो ने 20 साल पुराने मीट रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया. इसके साथ ही पथिरागे 90 मीटर की कठिन दीवार को लांघने वाले श्रीलंका के पहले और एशिया के सिर्फ चौथे एथलीट बन गए. 92.62 मीटर की यह दूरी इस सीजन की दुनिया की सर्वश्रेष्ठ थ्रो बनी, जो ऑल-टाइम एशियाई रिकॉर्ड्स में पेरिस 2024 ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम के 92.97 मीटर के थ्रो के ठीक पीछे दूसरे स्थान पर है.
नीरज चोपड़ा ने की पथिरागे की तारीफ
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के फाइनल में पहुंचने के बाद नीरज चोपड़ा ने भी पथिरागे की तारीफ करते हुए कहा, ‘वह एक अच्छा लड़का है और मेरा दोस्त है. इस साल उसने सचमुच बहुत बेहतरीन थ्रो किया है. यह बहुत अच्छी बात है कि वह श्रीलंका के लिए इतना शानदार काम कर रहा है.’
CWG रिकॉर्ड्स और गोल्ड मेडल की रेस
कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) के पिछले तीन चैंपियंस का इतिहास रहा है कि उन्होंने अगले ही ओलंपिक में स्वर्ण या रजत पदक अपने नाम किया है. पथिरागे के मौजूदा फॉर्म और हवाओं से लड़ने के उनके जज्बे को देखते हुए अब यह तय माना जा रहा है कि वह इस कॉमनवेल्थ गेम्स के फाइनल में नीरज चोपड़ा और गोल्ड मेडल के बीच सबसे मजबूत दीवार बनकर खड़े हैं. श्रीलंका के इस युवा का भाला सिर्फ मैदान पर दूरी नहीं तय कर रहा, बल्कि नए सपनों की एक पूरी कहानी लिख रहा है.

