कानपुर में बाढ़ का कहर जारी है। बाढ़ का पानी आने से 12 गांवों के लोग घरों में कैद हो गए हैं। वहीं, मुरादाबाद में नदियों का जलस्तर घटने से राहत मिलने लगी है। हालांकि रामगंगा नदी का जलस्तर घटने पर खेती की जमीन के कटान होने लगा है।
यूपी के कानपुर में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। खतरे के निशान को पार करने के बाद अब गंगा चेतावनी बिंदु से सिर्फ 29 सेंटीमीटर दूर है। 12 घंटे में 10 सेंटीमीटर पानी बढ़ने से कटरी के गांव टापू बन गए हैं, ज्यादातर रास्ते जलमग्न है और 12 गांवों के लोग घरों में कैद हैं। आवागमन के लिए लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। पुराना कानपुर स्थित तिवारी घाट में घरों के बाहर तक पानी आ चुका है। यहां से अब तक 35 लोगों को निकाला जा चुका है। उधर, भगवानदीन पुरवा में बिजली सप्लाई बंद कर दी गई है।
गंगा का जल स्तर जैसे-जैसे बढ़ रहा है वैसे-वैसे कटरी के गांव के लोगों की धड़कनें भी बढ़ रही हैं। भगवानदीनपुरवा में रास्तों से होता हुआ पानी घरों के मुहाने तक पहुंच गया है। बनियापुरवा, दुर्गापुरवा डल्ला पुरवा, लक्ष्मण पूर्व में पानी बढ़ कर गलियों में पहुंच रहा है। चिरान , पपरिया, चंदी पुरवा में पानी घरों की डेहरी तक पहुंच गया है। गांव के लोगों ने बाहर निकलने की तैयारी भी अब शुरू कर दी हैं। ज्यादातर गांवों में पानी घुस गया है। खेत व बाग पानी से भर गए हैं। गंगा किनारे बसी तिवारी घाट बस्ती में पानी घुस चुका है। इससे बस्ती में रहने वालों की आफत बढ़ गई है। ज्यादातर लोग प्राथमिक विद्यालय शेल्टर होम में पहुंच गए हैं।
काटी बिजली, मोमबत्ती के सहारे 36 परिवार
बाढ़ के पानी से भगवानदीन का पुरवा गांव घिर चुका है। शुक्रवार दोपहर को भगवानदीन पुरवा की बिजली सप्लाई बंद कर दी गई। ऐसे में 36 परिवारों के पास मोमबत्ती का सहारा है। बनियापुरवा की सड़कों में पानी भरा होने के चलते स्कूल के बच्चे भरे पानी से आने जाने को मजबूर हैं। वहीं शुक्रवार को भगवानदीन पुरवा मार्ग पर जलभराव होने से बिजली के पोल तिरछे हो गए है।
मुरादाबाग में घट रहा जलस्तर
पहाड़ों पर बारिश और बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी से उफनाई रामगंगा और कोसी नदी का पानी अब लगातार घट रहा है। मुरादाबाद में शुक्रवार को गागन नदी का जलस्तर भी स्थिर रहा, मगर इसके बाद भी मूंढापांडे क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों के सामने दुश्वारियां बनी हुई हैं। नदियों का जलस्तर घटने के बाद अब कटान तेज हो गई है।
सदर तहसील के मूंढापांडे इलाके में रामगंगा और कोसी नदी में आए बाढ़ के पानी से बिकनपुर, लोधीपुर वासु, रनियाठेर, गदईखेड़ा, हरपालपुर, बीरपुर बरियार समेत 12 से अधिक गांव प्रभावित हुए हैं। इनमें से कई गांव ऐसे हैं, जहां पर समस्या ज्यादा है। गांव के रास्तों पर पानी भरा हुआ है। कई दिनों से मुश्किलों का सामना कर रहे लोग नदियों का जलस्तर कम होने से राहत महसूस कर रहे हैं। शुक्रवार को रामगंगा नदी का जलस्तर घटकर 189.110 पर आ गया था, जो कि खतरे से 1.49 मीटर नीचे है। कोसी नदी के पानी में भी लगातार कमी हो रही हैं। वहीं, शुक्रवार को गागन नदी का जलस्तर 190.10 पर ही स्थिर रहा। रामगंगा का पानी उतरने से शहर के रामगंगा विहार, जिगर कॉलोनी, जामा मस्जिद, बंगला गांव समेत कई मोहल्ले के लोगों ने राहत की सांस ली है।
मदद को पहुंची स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की टीम
बाढ़ प्रभावित मोहल्लों में जल जमाव की वजह से संक्रामक लोगों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। इसके मद्देनजर शुक्रवार को डॉक्टर पंकज, आशा द्रोपदी ने गांव के करीब 100 लोगों को जरूरी दवाएं, ओआरएस पैकेट, क्लोरीन टैबलेट के साथ ही खांसी, जुकाम, खुजली, आंखों के दर्द की दवाई वितरण की। वहीं, प्रशासन की टीमें भी गांवों में मुस्तैद हैं और बाढ़ पीड़ितों के भोजन सामग्री का वितरण कर रहीं हैं। लोधीपुर वासु निवासी एक व्यक्ति ने एक व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज वायरल करके रामगंगा नदी का बंधा बनवाने वाले को ही वोट देने की अपील गांव के लोगों से की है।
बाढ़ में इन गांवों की जमीन का हुआ अधिक कटान
बिकनपुर के मुन्ना सिंह की 28, राजेंद्र सिंह की 15, कलराम की 6, सुरेश की 6, महेंद्र की 12, मुकेश, संजीव, प्रदीप, लाला सिंह, धर्म सिंह की 10-10 बीघा, अशोक की 8, कुलवंत सिंह की 13, जगदीश की 9, सोमपाल की 7, दौलत राम की 4 और लल्लू सिंह की 12 बीघा जमीन कट गई है। लोधीपुर वासु के किसान हुकुम सिंह, राम किशोर, गोपाली, सोहनलाल, राजपाल, अतर सिंह, मोहनलाल, कुमार पाल, डालचंद, राजवीर, रामेश्वर, सुदाम आदि ने बताया कि पानी कम होते ही नदी का बहाव किनारों को काटने लगा है। बिकनपुर, लोधीपुर में पापुलर के पेड़ भी नदी में समा रहे हैं।
