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भारत की झोली में गिरे 39 मेडल… बॉक्सिंग, वेटलिफ्टिंग और एथलेटिक्स में चमके भारतीय एथलीट, जानें किस खेल में मिले कितने पदक

Admin by Admin
September 11, 2026
in खेल
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भारत की झोली में गिरे 39 मेडल… बॉक्सिंग, वेटलिफ्टिंग और एथलेटिक्स में चमके भारतीय एथलीट, जानें किस खेल में मिले कितने पदक


नई दिल्ली. साल 2026 के कॉमनवेल्थ गेम्स का मैदान. चारों तरफ खचाखच भरे स्टेडियम में दर्शकों का शोर, हर तरफ चमकती लाइटें और इन सबके बीच शान से लहराता भारत का तिरंगा. यह कहानी किसी एक दिन की नहीं है, बल्कि उन अनगिनत रातों की है जब हमारे खिलाड़ियों ने पसीना बहाया. यह कहानी है उन भारतीय शूरवीरों की, जिन्होंने अपने जुनून और अदम्य साहस से एक नया इतिहास रच दिया और दुनिया को बता दिया कि भारतीय खेलों का स्वर्णिम युग आ चुका है. शुरुआत करते हैं उस रिंग से, जहां भारतीय मुक्केबाजों ने मानो तूफान ला दिया था. हमारे शेर और शेरनियों के मुक्कों की गूंज ऐसी थी कि एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 10 पदकों (7 स्वर्ण, 3 रजत) पर भारत ने कब्जा जमाया.

39 पदकों के साथ भारत चौथे नंबर पर रहा जबकि ऑस्ट्रेलिया 70 गोल्ड सहितत 171 पदक जीतकर मेडल टैली में पहले नंबर पर रहा वहीं  इंग्लैंड ने 110 और कनाडा ने 62 पदक जीते.  मेजबान स्कॉटलैंड 39 पदक जीतकर पांचवें स्थान पर रहा. ग्लास्गो से विदा लेने के बाद अब नजरें अहमदाबाद पर होंगी जहां 2030 में खेल होने हैं.

महिला मुक्केबाजों ने तो जैसे रिंग में सोने की खदान ही खोज ली थी. जब प्रीति पवार (54kg), जैस्मिन लैम्बोरिया (57kg), साक्षी चौधरी (51kg), प्रिया घनघस (60kg) और अरुंधति चौधरी (70kg) रिंग में उतरीं, तो उनके हर पंच ने विरोधियों को पस्त कर दिया. इन पाँचों बेटियों ने सीना तानकर स्वर्ण पदक चूमा. पुरुषों में सचिन सिवाच (60kg) और अंकुश पंघाल (80kg) ने अपनी बाहों की ताकत से दुश्मनों को धूल चटाते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया. वहीं, रिंग में जदुमणि सिंह (55kg), टोक्यो की पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन (75kg) और हेवीवेट मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल (+90kg) ने भी आखिरी दम तक लड़ते हुए रजत पदक हासिल कर देश का मान बढ़ाया.

फौलादी इरादे और वेटलिफ्टिंग का मंच
रिंग से बाहर निकलकर अगर हम वेटलिफ्टिंग के मंच की ओर देखें, तो वहां भारत की ताकत का एक अलग ही नजारा था. जब भारत की स्टार बेटी मीराबाई चानू (48kg) ने लोहे के उस भारी वजन को एक झटके में हवा में उठाया, तो पूरा स्टेडियम तालियों से गड़गड़ा उठा. उनका वह लिफ्ट सीधे स्वर्ण पदक में तब्दील हो गया. मीराबाई की इस जीत ने बाकी लिफ्टरों में भी जैसे आग भर दी. इसके बाद पदकों की झड़ी लग गई. ऋषिकांत सिंह (60kg), मुथुपंडी राजा (65kg), ज्ञानेश्वरी यादव (53kg), वल्लूरी अजय बाबू (79kg), हरजिंदर कौर (69kg) और सुपर हैवीवेट में लवप्रीत सिंह (+110kg) ने अपनी नसों की पूरी ताकत झोंकते हुए रजत पदक जीते. वहीं, बिंद्यारानी देवी (58kg) ने भी हार न मानते हुए कांस्य पदक पर अपना कब्जा जमाकर यह साबित कर दिया कि भारतीय बाजुओं में फौलाद भरा है.

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आसमान छूती छलांगें और ट्रैक के बाजीगर
अब बात करते हैं रफ्तार, छलांग और कभी न हार मानने वाले जज्बे की यानी एथलेटिक्स और पैरा-एथलेटिक्स की. यहां भारत ने 3 स्वर्ण, 6 रजत और 7 कांस्य जीतकर अपना परचम लहराया. सबसे भावुक और प्रेरणादायक पल तब आए जब हमारे पैरा-एथलीटों ने अपनी शारीरिक सीमाओं को दरकिनार करते हुए आसमान छू लिया. महिलाओं की शॉट पुट F57 स्पर्धा में शर्मिला धनकड़ ने अपना लोहा मनवाते हुए स्वर्ण जीता, और उसी स्पर्धा में शिल्पा के शायला ने कांस्य जीता. पुरुषों के शॉट पुट F57 में तो भारत का ही दबदबा रहा; सोमन राणा ने स्वर्ण और शुभम जुयाल ने रजत जीतकर स्टेडियम में जन-गण-मन गूंजा दिया. 100m T47 की फर्राटा दौड़ में दिलीप गावित सोने की तरह चमके (स्वर्ण) और मोहम्मद बेसिल ने रजत जीता. पैरा-पावरलिफ्टिंग में झंडू कुमार ने हेवीवेट वर्ग में अपनी अपार ताकत का प्रदर्शन करते हुए कांस्य जीता.

ट्रैक पर गुलवीर सिंह ने अपनी असीमित ऊर्जा का परिचय दिया. लंबी दूरी की दौड़ में उनका कोई सानी नहीं था, उन्होंने 10000 मीटर में रजत और 5000 मीटर में कांस्य, दोनों अपने नाम किए. उड़नदस्तों की बात करें तो लॉन्ग जंप में मुरली श्रीशंकर और हाई जंप में सर्वेश कुशारे ने रजत की शानदार उड़ान भरी. ट्रिपल जंप के सैंडपिट में प्रवरीन चित्रवेल ने रजत और सेल्वा प्रभु ने कांस्य पर छलांग लगाई.

जेवलिन थ्रो (भाला फेंक) में गोल्डन बॉय नीरज चोपड़ा ने एक बार फिर अपना भाला आसमान को चीरते हुए फेंका और रजत पदक हासिल किया, जबकि उनके ही साथी यश वीर सिंह ने उसी स्पर्धा में कांस्य जीतकर भारत की ताकत दोगुनी कर दी. तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन जैसे थका देने वाले और कठिन इम्तिहान में कांस्य तथा सीमा कालीरमना ने डिस्कस थ्रो में कांस्य जीतकर ट्रैक एंड फील्ड को पदकों से सजा दिया.

मैट के मास्टर
जूडो के मैट पर भी भारतीय शूरवीर किसी से पीछे नहीं रहे. अस्मिता डे (48kg) और हर्ष सिंह (60kg) ने अपनी बिजली जैसी फुर्ती और अचूक दांव-पेच से विरोधियों को चारो खाने चित कर सीधे स्वर्ण पदक पर निशाना साधा. यामिनी मौर्या (57kg) ने अपनी बेहतरीन रणनीति से रजत और उन्नति शर्मा (63kg) ने अपनी दृढ़ता से कांस्य पदक जीतकर जूडो की दुनिया में भारत का डंका बजा दिया.



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