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अनगित गलतियां, खराब पासिंग, सेमीफाइनल की रेस से बाहर हुई भारतीय महिला हॉकी टीम

Admin by Admin
September 6, 2026
in खेल
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अनगित गलतियां, खराब पासिंग, सेमीफाइनल की रेस से बाहर हुई भारतीय महिला हॉकी टीम


नई दिल्ली. वाजेनर स्टेडियम में ढलते सूरज के साथ ही भारतीय महिला हॉकी टीम के विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंचने के अरमान भी हमेशा के लिए धूमिल हो गए. एक बेहद रोमांचक और करो या मरो वाले मुकाबले में अनगिनत गलतियों का खामियाजा भारतीय टीम को भुगतना पड़ा. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला गया यह अहम मुकाबला बिना किसी गोल के बराबरी पर खत्म हुआ, जिसके साथ ही भारत का अंतिम-चार में पहुंचने का सपना भी टूट गया. टूर्नामेंट के दूसरे दौर तक पहुंचने के अपने प्रेरणादायी सफर के बावजूद, नॉकआउट चरण के इस अहम मोड़ पर टीम की कमजोरियां खुलकर सामने आ गईं. ऑस्ट्रेलिया ने गोल अंतर के आधार पर चीन को पीछे छोड़ते हुए सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली.

भारतीय टीम के लिए इस मैच में मैदानी खेल के दौरान मौके बनाने की क्षमता बेहद कमजोर नजर आई. इसके साथ ही टीम का गोलरहित रहने का निराशाजनक सिलसिला बढ़कर तीन मैचों तक पहुंच गया. मैच के अंतिम मिनटों में गोल की तलाश को और तेज करने के लिए भारतीय खेमे ने गोलकीपर को बाहर बुलाकर उनकी जगह एक अतिरिक्त आक्रामक खिलाड़ी मैदान में उतारा, लेकिन यह रणनीति भी काम नहीं आई और गोल स्कोरशीट पर दर्ज नहीं हो सका.

भारतीय महिला हॉकी टीम सेमीफाइनल की रेस से बाहर.

मैच के दौरान भारतीय खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया के सख्त मैन-मार्किंग डिफेंस को भेदने के लिए कड़ा संघर्ष करते दिखे. शुरुआत से ही अनचाही गलतियों का सिलसिला शुरू हो गया था. बलजीत कौर ने गेंद को कंट्रोल करने में चूक की, तो सलीमा टेटे ड्रिबल करते हुए गेंद को बाउंड्री लाइन से बाहर ले गईं. इसके अलावा, डिफेंस से सुशीला द्वारा बढ़ाया गया पास बीच में ही रोक लिया गया और ज्योति का पास भी बेकार हो गया. पूरे मैच में यही निराशाजनक क्रम जारी रहा, जिसके चलते मैदान के खतरनाक हिस्सों में भारत को बार-बार गेंद गंवानी पड़ी.

किस्मत का साथ और ऑस्ट्रेलिया के रद्द हुए गोल
इस मुकाबले में एक समय ऐसा भी लगा मानो किस्मत पूरी तरह भारत के साथ हो. ऑस्ट्रेलिया ने मैच के दौरान दो बार गेंद को भारतीय गोलपोस्ट के भीतर पहुंचाया, लेकिन अंपायर ने दोनों ही बार खतरनाक खेल का हवाला देते हुए उन गोलों को अमान्य करार दे दिया. मुकाबले की शुरुआत होते ही महज 90 सेकंड के भीतर ग्रेस स्टीवर्ट ने सुशीला चानू की जांघ से लगकर आई गेंद को बेहद करीब से गोल में पहुंचा दिया था, लेकिन टीवी अंपायर ने स्टिक की ऊंचाई को खतरनाक मानते हुए इस गोल को रद्द कर दिया.

ऑस्ट्रेलियाई टीम ने मैदानी खेल के दौरान दाहिने छोर से लगातार भारतीय डिफेंस पर दबाव बनाए रखा. एमी लॉटन ने इस छोर से बेहतरीन मूव बनाते हुए दो खतरनाक रिवर्स हिट लगाए, जिन्हें पहले और दूसरे क्वार्टर में गोलकीपर सविता पूनिया और बीचू देवी ने शानदार तरीके से बचा लिया. यदि ऑस्ट्रेलियाई टीम अपने इन हमलों के दौरान थोड़ी और आक्रामक होती, तो भारत को इन गलतियों की बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ सकती थी.

मौकों को भुनाने में नाकाम रहा भारत
मैच के पहले हाफ की समाप्ति से ठीक 20 सेकंड पहले भारत ने मैदान पर खेल को फैलाते हुए एक बेहतरीन मूव बनाया और अपना पहला पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया. हालांकि, इस मौके पर भारतीय टीम द्वारा आजमाया गया वेरिएशन विपक्षी टीम के पहले रनर द्वारा भांप लिया गया, जिससे यह बेहतरीन अवसर बेकार चला गया. तीसरे क्वार्टर में एक बार फिर ऑस्ट्रेलियाई पेनल्टी कॉर्नर के दौरान खतरनाक खेल के नियमों के तहत उनका एक और गोल रद्द कर दिया गया, जिसे देखकर स्टेफनी कर्शा अपने यकीन पर भरोसा नहीं कर पा रही थीं.

चौथे और अंतिम क्वार्टर में भारतीय टीम के खेल में थोड़ा सुधार जरूर दिखाई दिया. खिलाड़ियों ने ऑस्ट्रेलिया के कड़े प्रेस को पार करते हुए अंतिम 25 गज के दायरे में प्रवेश किया, लेकिन एक बार फिर पेनल्टी एरिया के आसपास जरूरी संयम और सूझबूझ की कमी साफ नजर आई, जिसके कारण टीम कोई भी स्पष्ट और मजबूत गोल-मुख मौका नहीं बना सकी. भारत के लिए मैच का सबसे बेहतरीन मौका नवनीत कौर के पास आया था, लेकिन उनके और साथी खिलाड़ी लालरेमम्सियामी के बीच आपसी तालमेल की कमी और असमंजस की स्थिति के चलते ऑस्ट्रेलियाई डिफेंस को खतरे को टालने का पूरा मौका मिल गया.

मैच के अंतिम क्षणों में भारतीय रक्षा पंक्ति ने हीरो की तरह डटकर खेलते हुए ऑस्ट्रेलिया के पेनल्टी कॉर्नर की बाढ़ को तो सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया और खुद को मुकाबले में बनाए रखा, लेकिन मैच के आखिरी पलों में भी वे अपनी ओर से गोल का वह जरूरी जवाब खोजने में असफल रहे, जो इस अंतिम प्रयास को एक सुखद अंत दे सके.



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