Last Updated:
इन दिनों हर तरफ बस एक ही फिल्म की चर्चा है. नीम करौली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म ने सभी की उम्मीद से परे कमाई कर दिखाई है. मुट्ठी भर बजट में बनी फिल्म ने कई गुना ज्यादा कमाई कर ली है. ‘हनुमान अंश’ इस साल की सबसे ज्यादा प्रॉफिटेबल फिल्म है, लेकिन अब इसपर राजनीति गरमा रही है. कांग्रेस ने बीजेपी पर फिल्म के जरिए राजनीति करने का आरोप लगाया है.
‘हनुमान अंश’ ने करिश्माई कमाई कर दिखाई है.
नई दिल्ली. नीम करौली बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों सिर्फ अपनी कहानी और दर्शकों की प्रतिक्रिया को लेकर ही चर्चा में नहीं है, बल्कि इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है. एक तरफ फिल्म को बाबा के गांव और उनसे जुड़े लोगों की ओर से पॉजिटिव रिएक्शन मिल रहा है, तो दूसरी तरफ कुछ नेताओं ने इसपर सवाल खड़े किए हैं. नेताओं का कहना है कि इस फिल्म और धार्मिक भावनाओं के जरिए राजनीति की जा रही है. फिल्म 7 अगस्त 2026 को रिलीज हुई थी और कम बजट के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर अप्रत्याशित सफलता हासिल कर चुकी है.
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने फिल्म के जरिए धर्म की राजनीति करने का आरोप लगाया, वहीं भाजपा नेता राम कदम ने कहा है कि हर बात को विवाद बनाना सही नहीं है. फिल्म ‘हनुमान अंश’ को लेकर अपना रिएक्शन देते हुए कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, ‘जब से भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई है, तब से वह धर्म को राजनीति में ले आई है. हर चुनाव राम मंदिर के नाम पर लड़ा जाता है.
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी का आरोप
उनके मुताबिक, ‘ऐसी फिल्मों के जरिए भी लोगों की धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है. उन्होंने धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में राजनीति किए जाने पर सवाल उठाते हुए कई अन्य मुद्दों का भी जिक्र किया. वो कहते हैं, ‘आस्था के मुद्दों पर राजनीति करने और लोगों की धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्मों के जरिए लोगों के दिमाग पर असर डालने और धार्मिक भावनाओं का फायदा उठाने का प्रयास किया जा रहा है’.
वहीं, कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने फिल्म पर टिप्पणी करने से पहले उसे देखना जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि बिना फिल्म देखे उसके बारे में राय बनाना उचित नहीं है. साथ ही उन्होंने फिल्मकारों से अपील की कि भारत जैसे विविधतापूर्ण और धर्मनिरपेक्ष देश में सिनेमा बनाते समय अलग-अलग समुदायों की भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए. उनके अनुसार, फिल्मों को समाज को जोड़ने का माध्यम बनना चाहिए, न कि किसी तरह के विभाजन का कारण.
बीजेपी ने किया पलटवार
दूसरी ओर, बीजेपी नेता राम कदम ने फिल्म को लेकर उठ रहे सवालों पर अलग रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि नीम करौली बाबा को बड़ी संख्या में लोग श्रद्धा और आस्था के साथ देखते हैं और वह हनुमान जी के परम भक्त माने जाते हैं. हालांकि उन्होंने भी फिल्म देखने की बात नहीं कही, लेकिन उनका कहना था कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले फिल्म के टॉपिक को समझना जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि हर विषय को विवाद का रूप देना उचित नहीं है और किसी मुद्दे पर बातचीत तर्क तथा तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए.
About the Author

From the precision of chemistry labs to the vibrant chaos of a newsroom, my journey has been about finding the perfect formula for a great story. A graduate in Chemistry Honours from the historic Scottish Churc…
और पढ़ें

