सहारनपुरः उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को गिराए जाने के बाद सियासी बवाल मचा हुआ है. विपक्ष इस एक्शन पर सवाल उठाते हुए दावा कर रहा है कि इसका खामियाजा बीजेपी को 2027 में भुगतना पड़ेगा. जिला न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासन की ओर से यह कार्रवाई की गई थी. मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है. इसी कड़ी में मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि 2027 में इसका खामियाज़ा सरकार को भुगतना पड़ेगा. ये बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है. 150 साल पुरानी मस्जिद है. सारे कागज़ात मुसलमानों के पास है. कलेक्ट्रट भी मुसलमानो की जगह पर है.
ओपी राजभर ने पूछा- सहारनपुर जाकर फातिहा पढ़ेंगे क्या
सहारनपुर में अवैध मस्जिद के ध्वस्तीकरण के सूबे की सियासत गरमाई हुई है. इसी कड़ी में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान पर ओमप्रकाश राजभर ने पलटवार करते हुए ट्वीट किया. ओपी राजभर ने लिखा कि अखिलेश जी, सहारनपुर जाकर अवैध इमारत के मलबे के सामने फातिहा पढ़ेंगे? मसूद के बयानों पर भी अखिलेश से मांगा जवाब,क्या आप मसूद भाई की बातों का समर्थन करेंगे? राजभर का सवाल—यूपी पूछ रहा है, बताइए ना?. बता दें कि सहारनपुर मस्जिद कार्रवाई पर अखिलेश ने सरकार पर सवाल उठाए थे.
जहां टूटी मस्जिद वहां मिला कुंआ
बता दें कि जिस जगह पर मस्जिद थी उसके बीचों-बीच एक कुआं भी दिखाई दिया है. ये कुंआ जीर्ण शीर्ण हालत में है. लेकिन अब प्रशासन ने इसको ढक कर रखा था. यह कुआं काफी प्राचीन है और इसकी बनावट को देखते हुए अब इसकी जांच के लिए पुरातत्व या फिर भौगोलिक टीमों को बुलाकर जांच करवाई जा सकती है. जिस जगह पर मस्जिद थी, उसे दिखाकर किया है. मस्जिद का पूरा मलबा हटा लिया गया है. 24 घंटे तक जेसीबी मशीन काम करती रहीं हैं. मस्जिद की जगह अब मैदान है. उसके आसपास जेसीबी खड़ी है. पुलिस भी तैनात है.
सहारनपुर जाएगा सपा का प्रतिनिधिमंडल
समाजवादी पार्टी ने ट्वीट कर लिखा कि सहारनपुर में प्रशासन द्वारा 119 साल पुरानी मस्जिद गिराए जाने के मामले में समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल कल 6 सितंबर की जगह 7 सितंबर को सहारनपुर जाएगा. वहीं एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मौजूद मस्जिद को सुबह 5 बजे गिरा दिया गया. क्या धर्म की आज़ादी की संवैधानिक गारंटी अब मुसलमानों पर लागू नहीं होती? ऐसा क्यों है कि हमारे पूजा-स्थलों को मामूली वजहों से लगातार बुलडोज़र से गिरा दिया जाता है? मस्जिद कमेटी ने इसके अस्तित्व को साबित करने के लिए 1911 तक के रिकॉर्ड पेश किए। वहाँ एक सदी से भी ज़्यादा समय से लगातार नमाज़ पढ़ी जा रही है. यह ‘वक़्फ़ बाय यूज़र’ (इस्तेमाल के आधार पर वक़्फ़) की परिभाषा है, जिसे कानून के तहत वक़्फ़ के तौर पर सुरक्षा मिली हुई है.
‘मेरी धार्मिक आजादी आपकी दया पर निर्भर नहीं’
ओवैसी ने अपने ट्वीट में आगे लिखा कि ‘लिमिटेशन एक्ट’ (समय-सीमा कानून) आम तौर पर सरकार को यह छूट नहीं देता कि वह किसी भी दिन अचानक जागे और अचल संपत्ति पर कब्ज़े का दावा कर दे. वहां एक सदी से भी ज्यादा समय से खुला, लगातार और सार्वजनिक कब्जा रहा है. सरकार यह नहीं कह सकती कि यह कब्ज़ा कल ही शुरू हुआ. इसलिए, अगर हम सरकार की दलीलों को मान भी लें, तब भी ‘एडवर्स पज़ेशन’ (लंबे समय तक कब्ज़े के आधार पर अधिकार) का सिद्धांत लागू होगा. मस्जिद पहले बनी थी, कलेक्ट्रेट बाद में. कुछ लोगों को शायद मस्जिद को देखना ही बुरा लगता है. यह उनकी समस्या है, हमारी नहीं। अगर चाहें तो नजरें फेर लें. सिर्फ इसलिए कि आपके मन में खुजली हो रही है. आप हमारी मस्जिद पर बुलडोजर नहीं चला सकते. मेरी धार्मिक आजादी आपकी दया पर निर्भर नहीं है.
सपा विधायक आशु मलिक ने की टिप्पणी
वहीं सपा विधायक आशु मलिक ने कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है, दुखद है. यहां कभी इस तरह की बातें नहीं हुईं. जहां यहां मां शाकुंभरी देवी का मंदिर है, तो वहीं दारुल उलूम भी है. सब लोग यहां मिल-जुलकर रहते हैं. मस्जिद से यहां किसी को कोई दिक्कत नहीं थी. कभी किसी भी धर्म-जाति के लोगों ने कोई आपत्ति नहीं जताई. हमें हाउस अरेस्ट किया हुआ है सुबह से, तो इमरजेंसी जैसे हालात बना दे रहे हैं.
बसपा सुप्रीमो मायावती का ट्वीट
इसके अलावा बसपा सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट कर लिखा कि ज़िला सहारनपुर की मस्जिद सहित पूरे उत्तर प्रदेश में आएदिन मस्जिदों को काफी आपाधापी में अवैध बताकर उनको ध्वस्त करने का जो सरकारी अभियान चल रहा है वह ठीक नहीं है तथा सरकार को ऐसे निगेटिव हालात से बचने के लिये इस पर तुरन्त रोक लगाकर इसके समाधान के अन्य उपाय ज़रूर करने चाहिये. वैसे भी एक संवैधानिक सेक्युलर सरकार द्वारा सभी धर्मों के मानने वालों एवं उनके धार्मिक स्थलों आदि का एक समान आदर-सम्मान व उनकी सुरक्षा करने का उत्तरदायित्व बनता है. इस्लाम मज़हब में मस्जिदें हर दिन इबादत बल्कि दिन में कई बार जमात के साथ नमाज़ पढ़ने का मुख्य व अभिन्न अंग हैं, जिसको ध्यान में रखकर व भारतीय परम्परा के अनुसार सम्मान देना देश व व्यापक जनहित में ज़रूरी है.
सपा के पूर्व सांसद ने कहा- मस्जिद गिराने का फैसला जल्दबाजी का है
वहीं सहारनपुर लोकसभा के पूर्व सांसद व समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता हाजी फज़लूर्रहमान का कलक्ट्रेट मस्जिद गिराए जाने पर कहा कि सहारनपुर कलक्ट्रेट स्थित मस्जिद को शहीद करने की ख़बरें मीडिया के माध्यम से मिलीं. इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैही राजिऊन. ज़िला प्रशासन का मस्जिद को गिराने का फ़ैसला जल्दबाज़ी में उठाया गया क़दम है. प्रशासन को मस्जिद पक्ष को हाईकोर्ट में अपनी बात रखने का समय देना चाहिए था. यही इंसाफ़ का तक़ाज़ा है. हम सभी धर्म के ज़िम्मेदारों के साथ बैठकर आगे की क़ानूनी प्रक्रिया को अपनायेंगे. मस्जिद कमेटी और ज़िम्मेदार लोग जो भी सामूहिक फ़ैसला लेंगें, हम उस पर आगे बढ़ने का कमा करेंगे. मेरी सभी से दरख़वास्त है की जनपद का भाईचारा और अमन चैन बनाये रखें.
अवधेश प्रसाद- बीजेपी अराजकता पैदा करना चाहती है
सहारनपुर मस्जिद को गिराए जाने पर सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि इक़रा हसन समेत वहाँ के विधायक को, वहां के लोगों को हाउस अरेस्ट कर दिया गया है. यह उनका संवैधानिक अधिकार है और इस संवैधानिक अधिकार को भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह से रौंदना चाहती है. यह लोकतंत्र के लिए इससे बड़ा खतरा और कोई नहीं हो सकता। लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करने का काम भारतीय जनता पार्टी की सरकार कर रही है. किसी घटना पर वहाँ के जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी होती है—जाना, लोगों के बीच बात करना, समस्या का समाधान करना… और इस अधिकार से वंचित करने का किसी को कोई अधिकार नहीं है।
ज्यों-ज्यों 27 का चुनाव संनिकट होता जाएगा, त्यों-त्यों भारतीय जनता पार्टी इस प्रदेश में उन्माद फैलाना चाहेगी. समझ-बूझ करके इस प्रदेश में अराजकता पैदा कराना चाहती है. यह इसमें फूट पैदा करना चाहती है, जिससे यह चुनाव में सफल हो सकें. लेकिन यह होना नहीं है, किसी कीमत पर नहीं.
इमरान मसूद- संविधा को रौंद दिया है
वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि मस्जिद ध्वस्त नहीं हो रही है. यह देश के संविधान के ऊपर हथौड़ा चल रहा है. हम लड़ाई लड़ेंगे. HC-SC, हर जगह जाएंगे. मस्जिद धराशाई करके संविधान को रौंद दिया है.
