Last Updated:
Sikar Archana Bilonia: सीकर के रायपुरा गांव की अर्चना बिलोनिया ने आर्थिक तंगहाली को पछाड़कर स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में 192.5 किग्रा वजन उठाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है. थाईलैंड और कजाकिस्तान में भारत के लिए कई गोल्ड मेडल जीतने वाली अर्चना की नजरें अब किर्गिजस्तान में 8 से 12 सितंबर तक आयोजित होने वाली 13वीं अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप 2026 पर हैं. जयपुर में कोच उदयभान रावत से ट्रेनिंग ले रही अर्चना आज देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं.
Success Story: सीकर जिले के रायपुरा गांव की अर्चना बिलोनिया ने अपनी मेहनत और संघर्ष के दम पर अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में खास पहचान बनाई है. उनकी कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. कभी अभ्यास के लिए उन्हें कई किलोमीटर पैदल चलकर जिला खेल स्टेडियम जाना पड़ता था. मजदूर परिवार से आने वाली अर्चना के सामने आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी जैसी कई चुनौतियां थीं. इसके बावजूद उन्होंने इन मुश्किलों को कभी अपने लक्ष्य के रास्ते में नहीं आने दिया. लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर आज अर्चना अंतरराष्ट्रीय स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और कई पदक अपने नाम कर चुकी हैं.
अर्चना की खेल उपलब्धियों में सबसे खास उनका विश्व रिकॉर्ड है. थाईलैंड के पटाया में आयोजित 12वीं वर्ल्ड स्ट्रेंथ लिफ्टिंग एंड बेंच प्रेस चैंपियनशिप में उन्होंने स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में 192.5 किलोग्राम वजन उठाकर नया विश्व रिकॉर्ड कायम किया. इस चैंपियनशिप में अर्चना ने दो गोल्ड मेडल अपने नाम किए. इससे पहले वर्ष 2024 में कजाकिस्तान में आयोजित 11वीं वर्ल्ड स्ट्रेंथ लिफ्टिंग चैंपियनशिप में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक गोल्ड और इनक्लाइन बेंच प्रेस में सिल्वर मेडल जीता था.
अर्चना ने अब तक पावर लिफ्टिंग और स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए कई पदक अपने नाम किए हैं. पावर लिफ्टिंग में उनके नाम एक गोल्ड, चार सिल्वर और पांच ब्रॉन्ज मेडल हैं. वहीं स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में वह अब तक चार गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं. राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी अर्चना ने चार ब्रॉन्ज मेडल हासिल किए हैं. कभी संसाधनों की कमी और आर्थिक परेशानियों के बीच शुरू हुआ उनका सफर आज अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच चुका है. अपनी मेहनत और लगन के दम पर अर्चना लगातार देश का नाम रोशन कर रही हैं.
Add News18 as
Preferred Source on Google
अर्चना का खेल सफर एथलेटिक्स से शुरू हुआ था. श्री कल्याण कन्या महाविद्यालय, सीकर में पढ़ाई के दौरान उन्होंने शॉटपुट की तैयारी शुरू की. इसी दौरान कोच कैप्टन दुर्जन सिंह शेखावत की नजर उनकी प्रतिभा पर पड़ी. उन्होंने अर्चना की ताकत और क्षमता को पहचानते हुए उन्हें पावर लिफ्टिंग में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. इसके बाद अर्चना ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार मेहनत करते हुए खेल की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाती चली गईं.इसके बाद ट्रेनिंग में बदलाव आया और अर्चना ने वजन उठाने वाले खेल को अपना लक्ष्य बना लिया.
अर्चना के लिए शुरुआती दौर में आर्थिक तंगी भी बड़ी चुनौती रही. उनके पिता बंशीलाल बिलोनिया श्रमिक हैं, जबकि मां मोहनी देवी गृहिणी हैं. परिवार की सीमित आमदनी के बावजूद माता-पिता ने बेटी के हौसले को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया और उसके सपनों को पूरा करने में हर संभव साथ दिया. वहीं, भामाशाहों और सहयोगियों की मदद से अर्चना को खेल उपकरण, जूते और जरूरी किट उपलब्ध कराई गई. परिवार और समाज के इस सहयोग ने अर्चना के संघर्ष को मजबूती दी और वह अपने खेल सफर में लगातार आगे बढ़ती गईं.
अब अर्चना अपने प्रैक्टिस और डाइट का खर्च खुद उठा रही हैं. फिलहाल वह जयपुर के विद्याधर नगर में कोच उदयभान रावत के निर्देशन में प्रशिक्षण ले रही हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए नियमित ट्रेनिंग के साथ बेहतर डाइट और फिटनेस पर भी काफी खर्च होता है. इसके बावजूद अर्चना आर्थिक चुनौतियों से घबराने के बजाय पूरी मेहनत और लगन के साथ अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं. उनका कहना है कि मेहनत और अनुशासन के दम पर वह आने वाले समय में देश के लिए और बेहतर प्रदर्शन करना चाहती हैं.
अब अर्चना की नजर किर्गिजस्तान में होने वाली अगली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता पर है. 8 से 12 सितंबर तक किर्गिजस्तान में 13वीं इंटरनेशनल स्ट्रेंथ लिफ्टिंग एंड इनक्लाइन बेंच प्रेस 2026 चैंपियनशिप आयोजित होगी. अर्चना इस प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने और देश के लिए एक और पदक जीतने की तैयारी में जुटी हैं. कभी अभ्यास के लिए कई किलोमीटर पैदल चलकर स्टेडियम पहुंचने वाली अर्चना का सफर आज विश्व रिकॉर्ड तक पहुंच चुका है. अब उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन करना है.

