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Ghaziabad News:आठ साल पहले खुद स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और बढ़े हुए वजन से जूझ रहीं संगीता ने योग और जुंबा से शुरुआत की लगभग पांच साल पहले उन्होंने अपना फिटनेस सेंटर की शुरुआत की और आज वह रोजाना करीब 100 महिलाओं को योग, जुंबा और डांस की ट्रेनिंग दे रही हैं.
गाजियाबाद: शिक्षक सिर्फ किताबों का ज्ञान नहीं देते, कुछ शिक्षक ऐसे भी होते हैं जो लोगों को बेहतर जिंदगी जीने का हुनर सिखाते हैं. गाजियाबाद के इंदिरापुरम अहिंसा खंड 1 में मिसाकी फिटनेस सेंटर चला रहीं संगीता ठाकुर ऐसी ही शिक्षिका हैं, जिन्होंने अपनी परेशानी को ताकत बनाया और महिलाओं की सेहत व आत्मविश्वास को मजबूत करने का बीड़ा उठाया.
आठ साल पहले खुद स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और बढ़े हुए वजन से जूझ रहीं संगीता ने योग और जुंबा से शुरुआत की लगभग पांच साल पहले उन्होंने अपना फिटनेस सेंटर की शुरुआत की और आज वह रोजाना करीब 100 महिलाओं को योग, जुंबा और डांस की ट्रेनिंग दे रही हैं. उनका मानना है कि स्वस्थ महिला ही स्वस्थ परिवार की मजबूत नींव होती है.
बाहर निकलने तक में परेशानी
संगीता ठाकुर ने बताया कि करीब आठ साल पहले उनका वजन काफी बढ़ गया था और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी लगातार बनी रहती थीं. डॉक्टरों के चक्कर लगाने पड़ते थे और स्थिति ऐसी हो गई थी कि वह घर से बाहर निकलने तक में परेशानी महसूस करती थीं. इसी दौरान उन्होंने योग और जुंबा क्लास ज्वाइन की. वहां उन्होंने देखा कि उनके जैसी कई महिलाएं भी वजन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से परेशान हैं. यहीं से उनके मन में महिलाओं के लिए ऐसा केंद्र शुरू करने का विचार आया, जहां उन्हें फिटनेस के साथ आत्मविश्वास भी दिया जा सके.
मानसिक रूप से मजबूत बनाना जरूरी
इसके बाद संगीता ने 2021 में मिसाकी फिटनेस सेंटर की शुरुआत की. यहां कामकाजी महिलाओं के साथ गृहिणियां भी पहुंचती हैं. किसी को वजन कम करना है तो कोई सर्वाइकल, जोड़ों के दर्द या दूसरी शारीरिक परेशानियों से जूझ रही होती है. संगीता का प्रयास सिर्फ महिलाओं को शारीरिक रूप से फिट करना नहीं, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाना भी है. वह महिलाओं को यह भरोसा दिलाती हैं कि वे सिर्फ परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए नहीं, बल्कि अपने सपनों और अपनी सेहत के लिए भी समय निकाल सकती हैं.
महिलाओं के आत्मविश्वास पर भी काम
उनके पास आने वाली कई महिलाएं ऐसी भी हैं जो परिवार और घरेलू जिम्मेदारियों के कारण घर से बाहर नहीं निकल पातीं या लोगों से बातचीत करने में झिझकती हैं. संगीता ऐसी महिलाओं के आत्मविश्वास पर भी काम करती हैं. उनका कहना है कि एक महिला अगर अपने लिए खड़ी होती है तो उसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है. उनकी ट्रेनिंग से जुड़ी कई महिलाएं आज अपने पैरों पर खड़ी हैं और कुछ ने अपना काम भी शुरू किया है.
महिलाओं को निशुल्क दे रहीं ट्रेनिंग
संगीता उन महिलाओं को निशुल्क ट्रेनिंग भी देती हैं, जो सीखने की इच्छा तो रखती हैं, लेकिन आर्थिक कारणों से फीस नहीं दे सकतीं. इसके अलावा वह सोसाइटियों में कैंप लगाकर महिलाओं और उनके परिवारों को फिटनेस के प्रति जागरूक करती हैं. उनका संदेश साफ है कि हर महिला को 24 घंटे में कम से कम एक घंटा खुद के लिए जरूर निकालना चाहिए.
संगीता की कक्षाएं ऑनलाइन भी चलती हैं और 800 से अधिक महिलाएं देश विदेश से ऑनलाइन माध्यम से उनसे जुड़ी हुई हैं. अब तक वह कई हजार महिलाओं को ट्रेनिंग दे चुकी हैं. टीचर्स डे पर संगीता की कहानी उन शिक्षकों को सलाम है जो सिर्फ पढ़ाते नहीं, बल्कि लोगों को खुद पर विश्वास करना और बेहतर जिंदगी जीना भी सिखाते हैं.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…
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