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who is Praveen Kumar: जन्मजात शारीरिक अक्षमता को अपनी कमजोरी बनाने के बजाय, प्रवीण कुमार ने संकल्प और वैज्ञानिक प्रशिक्षण के बल पर आसमान छूने की जिद चुनी. दुनिया के नंबर वन पैरा-हाई जम्पर और पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता बनकर उन्होंने साबित किया कि हौसले के आगे हर बाधा बौनी है. सक्षम और पैरा-एथलेटिक्स के बीच की खाई को पाटने वाले प्रवीण को अब ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया जा रहा है. यह कहानी एक दिव्यांग बालक के विश्व विजेता बनने और देश को गौरवान्वित करने की अद्भुत महागाथा है.
प्रवीण कुमार को मिलेगा पद्म श्री अवॉर्ड.
नई दिल्ली. कहते हैं कि पैर सिर्फ जमीन पर चलने के काम आते हैं, लेकिन जब इरादे मजबूत हों, तो इन्हीं पैरों से आसमान छूने की जिद पाल ली जाती है. भारतीय पैरा-स्पोर्ट्स के इतिहास में एक ऐसा ही नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो चुका है प्रवीण कुमार. दुनिया के नंबर वन पैरा हाई जम्पर और पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता प्रवीण कुमार को खेल जगत में उनके अभूतपूर्व और उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है. यह सिर्फ एक सम्मान नहीं, बल्कि उस अटूट संकल्प की जीत है जिसने शारीरिक अक्षमताओं को कभी अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया.
प्रवीण कुमार (Praveen Kumar) का जन्म एक बेहद सामान्य किसान परिवार में हुआ था. वह जन्म से ही एक पैर की शारीरिक दिव्यांगता के साथ पैदा हुए थे. बचपन में जब अन्य बच्चे बेफिक्र होकर दौड़ते-भागते थे, तब प्रवीण के सामने हर कदम पर चुनौतियां थीं. समाज का एक बड़ा हिस्सा अक्सर दिव्यांगता को एक सीमा मान लेता है, लेकिन प्रवीण के भीतर कुछ अलग ही आग धधक रही थी. ग्रेटर नोएडा के जेवर क्षेत्र के गोविंदगढ़ गांव निवासी प्रवीण ने 23 साल की उम्र में कई मेडल अपने नाम कर लिए हैं.
प्रवीण कुमार को मिलेगा पद्म श्री अवॉर्ड.
Praveen Kumar, world No. 1 para high jumper and Paralympic gold medallist, will be honoured with the Padma Shri for his outstanding contribution to sports.
Born with a physical disability, he rose through determination and scientific training to become one of India’s most… pic.twitter.com/9WgSssShZD— PIB – Ministry of Home Affairs (@PIBHomeAffairs) May 17, 2026
