संवाददाता@मोहम्मद इब्राहिम……

सबको शिक्षा, सबको ज्ञान की तर्ज पर प्रदेश सरकार की योजनाएं धरातल पर दम तोड़ रही हैं. दुद्धी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित निजी कॉन्वेंट स्कूल जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के सख्त निर्देशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं. नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही अभिभावकों को महंगे दामों पर निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है.।
एनसीईआरटी के नियमों की उड़ रही धज्जियां। शासनादेश के अनुसार स्कूलों में मुख्य रूप से एनसीईआरटी (NCERT) पुस्तकें ही लागू होनी चाहिए.सिंडिकेट का खेल: दुद्धी क्षेत्र के कान्वेंट स्कूल संदर्भ पुस्तकों (Reference Books) के नाम पर भारी-भरकम सेट थमा रहे हैं.आर्थिक शोषण: प्राथमिक कक्षाओं (कक्षा 1 से 5) के बच्चों की किताबों का सेट ₹5,000 से ₹8,000 तक बेचा जा रहा है।
कमीशन का खेल: यदि यही किताबें एनसीईआरटी की होतीं तो इनकी कीमत महज ₹200 से ₹300 के बीच होती.चुनिंदा दुकानों से ही सामग्री खरीदने की मजबूरीअभिभावकों का आरोप है कि विद्यालय प्रबंधन ने नगर की चुनिंदा दुकानों को अधिकृत कर रखा है. अभिभावकों को वहीं से किताबें, कॉपियां और यूनिफॉर्म खरीदने का मौखिक दबाव दिया जाता है. बाजार के अन्य सामान्य बुक डिपो संचालक बताते हैं कि जो किताबें अधिकृत दुकानों पर मनमाने दामों पर बेची जा रही हैं, वही किताबें खुले बाजार में लगभग आधे दाम में उपलब्ध हैं
बार एसोसिएशन ने उठाई आवाज, कार्रवाई की मांग –
महंगी किताबों के इस संगठित सिंडिकेट को लेकर स्थानीय लोगों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है. दुद्धी बार एसोसिएशन के सचिव दिनेश कुमार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सोनभद्र जिलाधिकारी (DM) से दुद्धी क्षेत्र में एनसीईआरटी किताबें अनिवार्य रूप से लागू कराने और मनमानी करने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।