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wrestling championship gonda doping scandal syringes recovered: गोंडा में आयोजित नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट के दौरान भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष संजय सिंह ने स्वीकार किया कि कुश्ती जगत अब भी डोपिंग की गंभीर समस्या से जूझ रहा है. प्रतियोगिता स्थल के शौचालयों में इस्तेमाल की गई सीरिंज बरामद होने से हड़कंप मच गया है. सिंह ने डोपिंग को खेल की छवि के लिए घातक बताया.

नेशनल रैंकिंग रेसलिंग टूर्नामेंट वेन्यू पर इस्तेमाल की गई सीरिंज मिलने पर हड़कंप.
गोंडा (उत्तर प्रदेश). भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष संजय सिंह का कहना है कि गोंडा में चल रहे नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में हरियाणा के पहलवानों की भारी भागीदारी यह दिखाती है कि महासंघ हरियाणा के खिलाफ पक्षपात नहीं कर रहा है. उन्होंने माना कि भारतीय कुश्ती में डोपिंग की समस्या अभी भी गंभीर है, क्योंकि प्रतियोगिता स्थल पर इस्तेमाल की गई सिरिंज मिली हैं. इस तीन दिन के टूर्नामेंट में करीब 1,400 पहलवानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जिनमें लगभग 80 प्रतिशत हरियाणा से हैं.
हरियाणा को देश में कुश्ती का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है. राष्ट्रीय ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट घरेलू स्तर की एक अहम प्रतियोगिता है, क्योंकि इसके जरिए राष्ट्रीय कैंप और भविष्य की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए चयन होता है. यह उन अनुभवी खिलाड़ियों के लिए भी बड़ा मौका है, जो रैंकिंग में पिछड़ने के बाद वापसी करना चाहते हैं. 2019 विश्व चैंपियनशिप और 2023 एशियाई खेलों के रजत पदक विजेता दीपक पूनिया भी यहां खेल रहे हैं. उनके साथ 125 किलोग्राम वर्ग में 2023 एशियाई चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता अनिरुद्ध गुलिया भी हिस्सा ले रहे हैं.
नेशनल रैंकिंग रेसलिंग टूर्नामेंट वेन्यू पर इस्तेमाल की गई सीरिंज मिलने पर हड़कंप.
यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि 2021 में डब्ल्यूएफआई ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में किसी भी राज्य से एक से ज्यादा टीमों को अनुमति नहीं देने की नीति लागू की थी. इसे हरियाणा को निशाना बनाने वाला कदम माना गया था, क्योंकि राज्य अपनी मजबूत प्रतिभा के दम पर ए और बी दोनों टीमें उतारता रहा है. हरियाणा संघ ने उस समय इस फैसले की आलोचना की थी और कहा था कि राज्य को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है. संजय सिंह ने कहा कि हरियाणा भारतीय कुश्ती की रीढ़ है और महासंघ चाहता है कि हर राज्य से मजबूत भागीदारी हो, खासकर उन राज्यों से जो अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवान तैयार करते हैं.
डब्ल्यूएफआई के मुताबिक, रैंकिंग टूर्नामेंट की शुरुआत खास तौर पर हरियाणा के पहलवानों को दूसरा मौका देने के लिए की गई, ताकि टैलेंटेड खिलाड़ी खुद को साबित कर सकें और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी दावेदारी बनाए रख सकें. सिंह ने कहा, ‘हरियाणा ने सालों से भारतीय कुश्ती में बड़ा योगदान दिया है. हम चाहते हैं कि वहां और पूरे देश में यह खेल और मजबूत हो. आंकड़े खुद बताते हैं कि डब्ल्यूएफआई हरियाणा के खिलाफ नहीं है. अगर भेदभाव होता, तो हरियाणा के पहलवान इतनी बड़ी संख्या में यहां नहीं आते.’
उन्होंने कहा, ‘हरियाणा के पहलवान बड़ी संख्या में यहां जीतेंगे और राष्ट्रीय कैंप में वापसी का अच्छा मौका पाएंगे, जिससे उन्हें पूरे साल ट्रेनिंग के फायदे मिलेंगे.’ टूर्नामेंट के पहले दिन कई बड़े पहलवानों पर मुकाबले से पहले इंजेक्शन लेने के आरोप लगे हैं. प्रतियोगिता स्थल के पुरुष शौचालय में इस्तेमाल की गई कई सिरिंज मिलने के बाद यह मामला चर्चा में आया. सिंह ने कहा, ‘हम लगातार जागरूकता फैला रहे हैं और दोषियों को पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी और काम करना बाकी है. डोपिंग मामलों की वजह से कुश्ती की छवि को नुकसान हुआ है और हम चाहते हैं कि यह खेल पूरी तरह साफ रहे.’
हाल के सालों में भारतीय कुश्ती को डोपिंग मामलों की वजह से कई बार शर्मिंदगी झेलनी पड़ी है, खासकर हैवीवेट वर्ग में. कई बड़े पहलवान डोप टेस्ट में फेल होने के बाद सस्पेंड हो चुके हैं. वर्ल्ड डोपिंग एजेंसी (वाडा) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत लगातार तीसरे साल (2022, 2023 और 2024) डोपिंग मामलों में दुनिया में पहले नंबर पर रहा है. सिंह ने कहा, ‘हम कोच और पहलवानों को जागरूक करने में सफल रहे हैं, लेकिन अभी भी कई लोग शॉर्टकट अपनाना चाहते हैं.
इस टूर्नामेंट में नाडा के अधिकारी मौजूद हैं. डब्ल्यूएफआई हर वर्ग के टॉप-10 पहलवानों को भागीदारी सर्टिफिकेट देता है, लेकिन आमतौर पर सिर्फ मेडल जीतने वालों का ही डोप टेस्ट होता है. अब शायद हमें नाडा से टॉप-10 सभी खिलाड़ियों की जांच कराने का अनुरोध करना चाहिए. इससे कुछ असर पड़ेगा.’
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कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…और पढ़ें
