नई दिल्ली. ऐसे दिन भी थे जब मुहम्मद शोएब चप्पल पहनकर और सलवार-कुर्ता में ही ट्रेनिंग करते थे क्योंकि उनके पास जूते और टेनिस के कपड़े खरीदने के पैसे नहीं थे. उनके पुराने जूतों के तले फट चुके थे लेकिन फिर भी वो खेलते रहे, पैरों में छाले और बहता खून उनकी मेहनत की गवाही देते थे. टेनिस कोर्ट में खेलने के लिए भी उन्हें दोपहर की तेज धूप का इंतजार करना पड़ता था, ताकि कोर्ट खाली मिले और वो छुपकर प्रैक्टिस कर सकें.
रविवार को इस्लामाबाद में वही लड़का पाकिस्तान का नया टेनिस चैंपियन बनकर खड़ा था, अपने देश के इतिहास में ऐसाम-उल-हक कुरैशी और अकील खान के बाद सिर्फ तीसरा. शोएब की शानदार ITF फ्यूचर्स टाइटल जीत ने न सिर्फ उनका सपना पूरा किया बल्कि पाकिस्तान के लिए 20 साल बाद किसी सिंगल्स खिलाड़ी ने खिताब जीता. पिछली बार 2007 में अकील ने लाहौर में फ्यूचर्स इवेंट और ऐसाम ने दिल्ली में चैलेंजर टाइटल जीता था. शोएब का टाइटल प्रो सर्किट का सबसे निचला स्तर है, लेकिन पाकिस्तान के लिए ये बड़ी बात है क्योंकि यहां ग्रैंड स्लैम में भी सिर्फ डबल्स में ही कामयाबी मिली है. सिंगल्स में ज्यादा सफलता नहीं मिली, इसलिए शोएब की जीत खास है.
फटे जूतों के साथ देखा सपना
बचपन से ही संघर्ष भरी जिंदगी थी. शोएब ने टेनिस की शुरुआत खिताब जीतने के सपने से नहीं, बल्कि पेशावर में बॉल बॉय बनकर की थी, अपने भाई शाह हुसैन के साथ और मामा रोमन गुल से सीखा. उनके पिता हैदर हुसैन दिहाड़ी मजदूर थे, जो अक्सर उन्हें खेल छोड़ने को कहते थे. वो खेतों में काम कर रोज 500-600 रुपये कमाते थे और बारिश में काम न मिले तो खाने की चिंता होती थी. ‘उन्होंने कहा पढ़ाई करो, टीचर या इंजीनियर बनो. टेनिस हमारे लिए बहुत महंगा था,’ शोएब ने याद किया. लेकिन उनकी मां ने कभी हार मानने नहीं दी. ‘वो हमेशा कहती थीं, मेहनत करोगे तो सबको गलत साबित कर दोगे.
सेकेंड हैड रैकेट और कपड़ों से हासिल की मंजिल
खेल का सामान भी उनके लिए लग्जरी था. लोकल मार्केट से सेकंड हैंड रैकेट और पुराने जूते खरीदते थे, कई बार वो भी नहीं मिलते थे. ‘मैं चप्पल में खेलता था और सलवार-कुर्ता पहनता था. हमारे पास कुछ खरीदने के पैसे नहीं थे.’ हालात बहुत मुश्किल थे. पुराने टेनिस बॉल को पानी में भिगोकर धीमा किया जाता था. प्रैक्टिस भी तेज गर्मी में करनी पड़ती थी क्योंकि तभी कोर्ट खाली मिलता था. जूतों में छेद थे, स्लाइड करते वक्त पैर से खून निकलता था, लेकिन खेलना नहीं छोड़ा. जीत का सपना भी नहीं देखा था.
हर मौके को भुनाया
टूर्नामेंट शुरू होने पर शोएब की उम्मीदें बहुत छोटी थीं. ‘मेरा बस एक ATP पॉइंट पाने का लक्ष्य था, बस शुरुआत करनी थी,’ शोएब ने इस्लामाबाद से PTI को बताया. कई बार हारने के बाद उनका आत्मविश्वास कमजोर हो गया था. लेकिन इस्लामाबाद में कुछ बदल गया. पहला पॉइंट मिलते ही वो खुलकर खेलने लगे. एक जीत के बाद दूसरी, फिर टॉप सीड को हराकर फाइनल में पहुंचे. ‘मैंने खुद से कहा, 100% दूंगा ताकि बाद में पछताना न पड़े.’ फाइनल तक पहुंचते-पहुंचते वो बस अगले पॉइंट पर ध्यान दे रहे थे. एक ATP पॉइंट के पीछे भागते हुए 15 पॉइंट और टाइटल जीत लिया. ‘जब जीता तो यकीन नहीं हुआ. लोगों ने बताया कि 20 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है, ये कभी सोचा ही नहीं था.
पाकिस्तान के नंबर 1 खिलाड़ी
एक हफ्ते में शोएब अनरैंक्ड से पाकिस्तान के नंबर 1 सिंगल्स खिलाड़ी बनने जा रहे हैं, एक ऐसे देश में जहां टेनिस को पहचान और सपोर्ट की कमी रही है. लेकिन ऐसाम-उल-हक कुरैशी के पाकिस्तान टेनिस फेडरेशन संभालने के बाद से हालात बदल रहे हैं, ज्यादा टूर्नामेंट हो रहे हैं और शोएब जैसे खिलाड़ियों को मौका मिल रहा है. ‘वो खुद खिलाड़ी की तरह सोचते हैं, इससे हमें बहुत मदद मिली.’ जीत के बाद भी शोएब को पता है कि सिर्फ कामयाबी से प्रोफेशनल टेनिस में टिकना आसान नहीं. ‘हमारे पास स्पॉन्सर नहीं हैं. एक टूर्नामेंट खेलना भी मुश्किल है.’ उनका सपना है 15-20 टूर्नामेंट खेलना और रैंकिंग में ऊपर जाना, लेकिन कैसे होगा ये साफ नहीं है. ‘अगर स्पॉन्सर नहीं मिला तो इन 15 पॉइंट्स का क्या करूं?’
पेस ने की थी तारीफ
शोएब को याद है जब लीजेंड लींडर पेस ने कजाकिस्तान में इंडिया-पाक डेविस कप के दौरान उनकी तारीफ की थी और अब वो इंडिया में टूर्नामेंट खेलना चाहते हैं. शोएब की जीत सिर्फ एक खिताब नहीं, बल्कि पाकिस्तानी टेनिस के लिए उम्मीद की किरण है. चप्पल और सलवार-कुर्ता में खेलते हुए ट्रॉफी उठाने तक का सफर बताता है कि मेहनत से क्या हासिल हो सकता है और क्या बदलना बाकी है. ‘मुझे हमेशा यकीन था कि मेहनत करूंगा तो उसका फल जरूर मिलेगा,’ उन्होंने कहा. फिलहाल उन्हें मेहनत का इनाम मिल गया है. अब ये देखना है कि ये उनके करियर और पाकिस्तान टेनिस के लिए टर्निंग पॉइंट बनता है या नहीं.
