संवाददाता@विशाल टंडन…….
— बढ़े कमर्शियल गैस का दाम का असर सीधा पड़ेगा स्वाद पर
— गैस इतनी महंगी कि अब समोसे भी EMI पर! छोटे कारोबारियों की आंच हुई ठंडी, जेब की आग तेज

कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर के दामों में हालिया बढ़ोतरी ने अब आम जनता की थाली का स्वाद महंगा कर दिया है। होटल, ढाबा, रेस्तरां और स्ट्रीट फूड कारोबारियों की लागत में तेज इजाफा होने से खाने-पीने की चीजें धीरे-धीरे आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही हैं। रॉबर्ट्सगंज नगर के जय स्वीट्स के संचालक सुनील कुमार का कहना है कि दो महीने पहले ही बढ़ी गैस कीमतों के चलते उन्हें महंगे विकल्प अपनाने पड़े थे, जिससे मिठाइयों के दाम बढ़ाने पड़े।
अब कमर्शियल सिलेंडर के दामों में करीब 50 प्रतिशत तक उछाल ने कारोबार को घाटे की कगार पर ला खड़ा किया है। उनका कहना है कि “अब दाम बढ़ाना मजबूरी है, नहीं तो दुकान चलाना मुश्किल हो जाएगा।” बसंत बहार के राकेश केशरी बताते हैं कि पहले ही बिजली, किराया और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने कमर तोड़ रखी थी, अब गैस की महंगाई ने बची-खुची राहत भी खत्म कर दी है।

वहीं मिश्रा होटल के संस्कार मिश्रा कहते हैं कि पहले दाम बढ़ाने पर ग्राहकों की नाराजगी झेलनी पड़ी थी, अब फिर से रेट बढ़ाना पड़ेगा, जिससे ग्राहक समझाना और भी कठिन हो जाएगा। नगर के अन्य मिष्ठान भंडारों और छोटे खाद्य व्यवसायियों का भी यही हाल है। उनका कहना है कि गैस की कीमतों में बढ़ोतरी ने मुनाफा लगभग खत्म कर दिया है और कारोबार टिकाए रखना ही चुनौती बन गया है।
कई दुकानदारों का कहना है कि “अब तो लगता है चूल्हा जलाने से ज्यादा जेब जल रही है।” विशेषज्ञों के अनुसार, कमर्शियल गैस की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर खाद्य उत्पादन लागत पर पड़ता है। लागत बढ़ने पर कारोबारियों के पास दाम बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
छोटे व्यापारियों को आशंका है कि यदि यही हाल रहा तो कई छोटे व्यवसाय बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं, जिससे रोजगार पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा। स्थानीय व्यापार संगठनों ने सरकार से गैस कीमतों पर नियंत्रण और छोटे कारोबारियों के लिए राहत पैकेज की मांग की है, ताकि बढ़ती महंगाई की इस ‘आंच’ को कुछ कम किया जा सके।