संवाददाता@वीरेंद्र यादव…….

राजभाषा हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक अहम पहल के तहत नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), सोनभद्र की 34वीं बैठक मंगलवार को ऑनलाइन माध्यम से संपन्न हुई। बैठक में सदस्य कार्यालयों के प्रमुखों और राजभाषा अधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
बैठक की अध्यक्षता संदीप नायक, कार्यकारी निदेशक, एनटीपीसी सिंगरौली एवं अध्यक्ष, नराकास सोनभद्र ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि राजभाषा हिंदी का क्रियान्वयन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। उन्होंने गृह मंत्रालय राजभाषा विभाग के दिशा-निर्देशों, राजभाषा अधिनियम 1963 और राजभाषा नियम 1976 के शत-प्रतिशत पालन पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि नोटिंग, ड्राफ्टिंग, पत्राचार, प्रतिवेदन, तकनीकी दस्तावेजों और डिजिटल प्लेटफॉर्म सहित सभी कार्यालयीन कार्यों में हिंदी का अनिवार्य एवं व्यवहारिक प्रयोग सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए विभागों को हिंदी को कार्य-भाषा के रूप में अपनाने के लिए ठोस प्रयास करने होंगे।
बैठक में राजभाषा वार्षिक कार्यक्रम 2026-27 को मार्गदर्शक दस्तावेज बताते हुए समयबद्ध लक्ष्य प्राप्ति पर बल दिया गया। साथ ही हिंदी पत्राचार बढ़ाने, धारा 3(3) के तहत द्विभाषिकता, कंप्यूटर में हिंदी सॉफ्टवेयर के उपयोग और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।
बैठक की शुरुआत “सोनभद्र राजभाषा सरिता” के प्रथम अंक के विमोचन के साथ हुई। इस अवसर पर उत्कृष्ट राजभाषा कार्य करने वाले कार्यालयों को सम्मानित करने की भी घोषणा की गई।
सदस्य कार्यालयों ने अपनी उपलब्धियां साझा करते हुए हिंदी के प्रभावी उपयोग के लिए सुझाव भी प्रस्तुत किए। नियमित हिंदी कार्यशालाओं, तकनीकी गोष्ठियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक के दौरान राजभाषा अधिनियम एवं नियमों पर एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी दिया गया, जिससे प्रतिभागियों को नीतियों के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी मिली।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. ओम प्रकाश, उप महाप्रबंधक (राजभाषा) एवं सदस्य सचिव, नराकास सोनभद्र द्वारा किया गया।