दुद्धी/सोनभद्र.@मोहम्मद इब्राहिम…….

उत्तर प्रदेश सरकार के सख्ती के बाद भी स्कूल संचालक मनमानी करने से बाज नही आ रहे हैं। महंगी किताब के साथ -साथ अभिभावकों को मंथली फीस के लिए भी जमकर जेबें ढीली करनी पड़ रही हैं लेकिन यह जानकार आपको और हैरानी होगी कि जिन शिक्षकों के भरोसे कान्वेंट प्राइवेट स्कूल संचालक बड़े -बड़े वायदे कर रहे हैं उनमे से अधिकांश टीचर अंट्रेंड हैं।
शिक्षा सत्र शुरू होते ही कान्वेंट स्कूलों के संचालकों द्वारा अभिभावकों को लुभाने की कवायद शुरू कर दी गई हैं, इसके लिए स्कूल बसों सहित अन्य साधनों द्वारा बोर्ड एवं पम्पलेट्स लगाकर अभिभावकों को बड़े -बड़े सपने दिखाने में जुट गए हैं।दुद्धी क्षेत्र के कान्वेंट स्कूलों सहित हाई स्कूल व इंटर तक के प्राइवेट स्कूल संचालक अपने -अपने क्षेत्र में प्रचार -प्रसार शुरू कर दिए है, कई कान्वेंट स्कूल तो अपनी पूरी फ़ौज ही गाँव -गाँव में भेजने शुरू कर दिए है और अभिभावकों से अच्छी पढ़ाई की दावा कर रहे है ।
लेकिन सूत्रों की माने तो अधिकांश कान्वेंट स्कूलों में अंट्रेंड टीचर ही पढ़ा रहें है क्योंकि अंट्रैंड टीचर कम मानदेय में पढ़ाने को तैयार हो जाते है क्योंकि बेरोजगारी के कारण इंटर पास करके ग्रेजुएट के साथ -साथ किसी न किसी प्राइवेट स्कूल में पढ़ाकर अपनी जरूरतें पूरी करते है।
आरटीई के तहत प्रशिक्षित शिक्षकों से ही शिक्षण कार्य कराने का हैं प्रावधान
शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत स्कूलों में शिक्षण के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा ही शिक्षण कराए जाने का प्रावधान हैं लेकिन यहां अधिकांश स्कूलों द्वारा मान्यता /ऑनलाइन में टीचरों का ब्यौरा कुछ होता हैं और पढ़ाने वाले शिक्षक कुछ और होते हैं, क्योंकि जितनी कम मानदेय में अप्रशिक्षित शिक्षक मिल जाते हैं उतने मानदेय में कोई भी प्रशिक्षित शिक्षक उपलब्ध नही होते हैं इसलिए मैंनेजमेंट अंट्रेंड टीचरों से शिक्षण कार्य करवाकर मोटी रकम बचाने की जुगाड़ में जुटे रहते हैं।
अंट्रेंड टीचरों से टीचिंग और भारी भरकम फीस बनी चर्चा का विषय ?
दुद्धी कस्बे सहित आसपास के प्राइवेट स्कूलों में अंट्रेंड टीचरों के भरोसे शिक्षण कार्य करवाने वाले मैंनेजमेंट अभिभावकों को बड़े -बड़े सपने दिखाकर भारी -भरकम फीस की वसूली करने में कोई कोर -कसर नही छोड़ रहें है। अधिकांश प्राइवेट स्कूलों की फीस 1500-2500 तक महीना है। फीस के लिए भी पैरेंट्स को जमकर जेबें ढीली करनी पड़ती है, इसके अलावा कॉपी किताब और ड्रेस के नाम पर भी स्कूल संचालक मोटे तौर पर चार्ज वसूल रहें है।