बीजपुर/सोनभद्र.@रामबली मिश्रा…..

मां दूधइया देवी मंदिर प्रांगण में चल रहे संगीतमय श्री राम कथा के अंतिम दिवस में हिमाचल से पधारे अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक राम मोहन दास रामायणी जी ने राम केवट संवाद, भरत मिलन,और राम राज्याभीसेक के प्रसंग को ओजस्वी वाणी से सुनाकर श्रोताओ को भाऊक और मंत्र मुग्ध कर दिए ।
रामायणी जी ने राम और भरत मिलन का मार्मिक प्रसंग को जब सुनाया ,,राम भक्त ले चला रे राम की निशानी,शीश पर खड़ाऊ अंखियों में पानी तो श्रद्धालु श्रोताओं की आंखे सजल हो भाव विभोर हो गए।
अगले प्रसंग उन्होंने केवट संवाद के मार्मिक प्रसंग को सुनाया ,,मांगी नाव न केवट आना कहई तोहार मरम मैं जाना।छूवत शिला भई नारी सुहाई,पाहन ते काठ कठिनाई।आप चरण स्पर्श से पत्थल से नारी हो गई यह तो मेरी नाव लकड़ी की है।प्रभु अंतर्यामी केवट भाव समझ रहे थे उन्होंने पांव पखरवा के नदी को पार किया।

राम राज्याभिषेक के कथा को सुनाया तो खचाखच भरे पंडाल के श्रोताओं का भाव उत्साह से भर गया।कथा समापन के पश्चात उन्होंने प्रतिदिन की भाती कन्या पूजन, हनुमान चालीसा स्तुति,आरती कराई तत्पश्चात प्रसाद वितरण कर कार्यक्रम का समापन किया गया।
इस मौके पर उप समादेष्टा सी आई एस एफ प्रकाश चंद,दीपक पाण्डेय,नंद किशोर चतुर्वेदी,सुरेंद्र पटेल,विवेक श्रीवास्तव,अशोक सिंह, बाल मुकुंद गुप्ता,ज्ञान चंद केशरी, सुनील तिवारी,इंद्रेश सिंह,सतवंत सिंह श्रीराम यादव,अनूप शुक्ला, सहित भारी संख्या में उपस्थित श्रोताओं को अंग वस्त्र और पुष्प वर्षा कर आशीर्वाद प्रदान किया।
सभी भक्तों से बिछड़ते वक्त कहा कि कथा आप सब के सुखमय जीवन के लिए सुनाकर आशीर्वाद प्रदान करता रहता हूं,फिर भी इस कथा के दौरान मेरी वाणी से किसी को कही ठेस पहुंचा हो तो क्षमा चाहता हूं महाराज जी के इस मार्मिक वचन को सुनकर भक्तों की आंखे सजल हो गई।
लोगो के तन,मन,धन,से सहयोग कर इस आयोजन को सकुशल संपन्न कराने के लिए आयोजकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।