चोपन/सोनभद्र.@कृपा शंकर पांडेय…..

चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व के अवसर पर आदिवासी क्षेत्र कि विख्यात देवी जो पहाड़ियों व सोन नदी के तट पर विराजमान है ग्राम पंचायत जुगैल व ग्राम पंचायत कुराडी स्थित माता जिरही व माता कुण्डवासनी नाम से प्रचलित देवी है। स्थानीय पुजारी ने बताया कि माता जिरही व माता कुण्डवासनी,माता बंसरा देवी हजारों वर्ष पुरानी बताई जा रही है।
जो अगोरी किला के राजा बालमशाह के जमाने का बताया जाता है। चैत्र नवरात्र पर माता जिरही व माता कुण्डवासनी,माता बंसरा देवी मन्दिर पर एक महिने के लिए मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें बहुत दूरदराज से श्रद्धालु माता जिरही व माता कुण्डवासनी,माता बंसरा देवी मन्दिर पर दर्शन पुजन करने आते। ग्रामीणो का कहना है कि माता जिरही व माता कुण्डवासनी,माता बंसरा देवी
से जो भी मन्नत मांगते हैं वह जरूर पुरा होता है ।
जिसमें चैत्र नवरात्र के नैवे दिन ग्रामीण जवारी के साथ जीभ में साघ लगाकर हाथ में साघ लगाकर गाना बजाना के साथ माता जिरही व माता कुण्डवासनी, माता बंसरा देवी,मन्दिर पर जाते हैं माता के मन्दिरों पर हजारो की संख्या में भक्तों कि उमड़ी भीड़। सुरक्षा व्यवस्था में थाना जुगैल पुलिस मह जुद रही।
