मुख्यालय/सोनभद्र.@विशाल टंडन……

गणगौर के पावन अवसर पर सोनभद्र के राबर्ट्सगंज में शनिवार को भक्ति, परंपरा और उल्लास का अनुपम संगम देखने को मिला। शहर में जब सजी-धजी महिलाएं सिर पर ईसर-गणगौर की प्रतिमाएं लेकर निकलीं, तो पूरा वातावरण श्रद्धा और सौंदर्य से सराबोर हो उठा। मेन चौक स्थित शीतला मंदिर से रामसरोवर तालाब तक निकली भव्य शाही शोभायात्रा ने नगरवासियों का मन मोह लिया।
रंग-बिरंगे परिधानों, पारंपरिक आभूषणों और मेहंदी से सजी महिलाओं ने लोकगीतों और भजनों के माध्यम से इस पर्व की गरिमा को और भी बढ़ा दिया। हर कदम पर “गणगौर माता की जय” के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो उठा। इस आयोजन का नेतृत्व श्री राणी सती दादी भक्त महिला मंडल और मारवाड़ी युवा मंच सोन महिला शाखा ने किया। महिलाओं ने पूरे 16 दिनों तक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की। प्रतिमाओं को सुंदर वस्त्रों और आभूषणों से सजाकर श्रद्धा भाव से शोभायात्रा में शामिल किया गया।

रामसरोवर तालाब पर सामूहिक पूजा के दौरान वातावरण भजन-कीर्तन और मंगल गीतों से गूंज उठा। पारंपरिक राजपूती वेशभूषा में सजी महिलाओं ने लोकसंस्कृति की अद्भुत छटा बिखेरी, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े। मारवाड़ी युवा मंच सोन महिला शाखा की अध्यक्ष रितु जालान ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था।
यही कारण है कि यह पर्व दांपत्य सुख और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। अविवाहित युवतियां जहां योग्य वर की कामना करती हैं, वहीं विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार होलिका दहन के दूसरे दिन से शुरू होकर 18 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव का समापन चैत्र तृतीया को प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ किया गया। महिलाओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ गणगौर माता को विदाई दी।
श्री रानी सती दादी भक्त मंडल महिला शाखा की अध्यक्ष अनीता थर्ड ने कहा कि गणगौर केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक एकता का प्रतीक है, जो आज भी पूरे गर्व के साथ जीवित है।
इस भव्य आयोजन में दीप्ती केडिया, रंजना अग्रवाल, मीरा जालान, पूनम खेतान सहित बड़ी संख्या में मारवाड़ी समाज की महिलाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। राबर्ट्सगंज में गणगौर का यह आयोजन आस्था, संस्कृति और उत्साह का ऐसा संगम बना, जिसने हर किसी के मन में श्रद्धा की ज्योति जगा दी।