कोन/सोनभद्र. @मिथिलेश जायसवाल…..
— ग्राम प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष लक्ष्मी कुमार जायसवाल ने जिलाधिकारी को लिखा पत्र

जनपद सोनभद्र में कई करोड़ रूपये का बजट से जल जीवन मिशन (जल नल योजना)के तहत किये गये कार्यों मे भ्रष्टाचार की जांच कराये जाने की मांग ग्राम प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष लक्ष्मी कुमार जायसवाल ने किया है।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि जनपद सोनभद्र अति पिछड़ा दुरूह आंचल एवं पहाड़ी जनपद होने के कारण यहाँ भी भारत सरकार की योजना “जल जीवन मिशन” के तहत कई करोड़ रूपये जनपद में पेयजल आपूर्ति हेतु टंकियाँ बनाकर पाइप लाइन द्वारा “हर घर नल जल योजना” के तहत पेयजल आपूर्ति करने के लिए धन मिला, परन्तु दुर्भाग्य रहा कि फर्जी तरीके से मानक के विपरीत कुछ जगहों पर टंकी एवं पाइप लाइन का निर्माण करके बाहरी ठेकेदारों एवं सम्बंधित विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से पैसों का बंदरबाँट कर लिया गया।
जबकि इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों को कई बार लिखित एवं मौखिक किया गया, परन्तु ठेकेदार की ऊँची पहुँच एवं सांठ-गांठ के चलते जांच के नाम पर रिजल्ट जीरो रहा। जबकि इसके पूर्व में विधायक एवं सांसद निधि के द्वारा जिले में दिये गये कार्यदायी संस्था जल निगम के द्वारा लगाये गये हैंडपंप आज भी मौके पर शत-प्रतिशत मौजूद हैं, तथा उसी के सहारे गाँवों में पीने के पानी का एक सहारा बना हुआ है तथा ग्राम पंचायत के निधि द्वारा कम अपर्याप्त संसाधन होने के बावजूद भी उसकी मेंटेनेंस एवं रिबोर करायी जाती है।
जबकि जल निगम के पास कम पैसे आते थे तब भी जनपद में कार्य अच्छे होते थे परन्तु जल जीवन मिशन में अथाह पैसा आने के बाद भी जनपद के ग्रामीण अंचलों में एक बूंद पानी नसीब नहीं हो रहा है। इस संदर्भ में ग्राम प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष लक्ष्मी कुमार जायसवाल ने उच्च अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुए आगामी गर्मियों में पेयजल की समस्या को देखते हुए तत्काल किये गये कार्यों की स्थलीय निरीक्षण टीम बनवाकर जांच कराये जाने की मांग करते हुए सभी उच्च अधिकारियों के साथ-साथ मा० मुख्यमंत्री जी को लिखित सूचना दिया है।
यदि सही समय से उचित कार्यवाही नहीं किया गया तो इस संदर्भ में संगठन के लोग मजबूर होकर गाँव-गाँव में प्रदर्शन करेंगे क्योंकि ग्रामीण अंचलों में फर्जी दबाव बनाकर पाइप लाइन की पूर्ति एवं जलापूर्ति दिखाकर गाँव में होने वाली पानी की सप्लाई जो टैंकरों द्वारा की जाती थी वह भी बंद करा दी गयी है। इसलिए तत्काल प्रभाव से जांच कराया जाना न्याय हित में आवश्यक है।