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आहोर के बावड़ी गांव की आकांक्षा कुमावत ने दिल्ली में हुए 34वें राष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग मुकाबले में 57 किलो वर्ग में 77.5 किलोग्राम और इक्विप्ड बेंच प्रेस में 95 किलोग्राम वजन उठाकर दो नए नेशनल रिकॉर्ड बनाए. दो गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने ‘स्ट्रॉन्ग वीमन ऑफ इंडिया’ का खिताब हासिल किया और जालोर व राजस्थान का नाम रोशन किया.
जालोर. जिले की एक साधारण सी ग्रामीण बेटी ने अपनी असाधारण मेहनत और मजबूत इरादों के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर नया इतिहास रच दिया है. आहोर उपखंड के बावड़ी गांव की रहने वाली आकांक्षा कुमावत ने दिल्ली के फरीदाबाद में आयोजित 34वीं राष्ट्रीय सीनियर, जूनियर, सब-जूनियर एवं मास्टर्स इक्विप्ड और क्लासिक बेंच प्रेस पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो नेशनल रिकॉर्ड बनाए हैं. इस उपलब्धि के साथ ही आकांक्षा ने दो गोल्ड मेडल जीतकर ‘स्ट्रॉन्ग वीमन ऑफ इंडिया’ का खिताब भी अपने नाम किया है.
7 से 11 जनवरी तक आयोजित इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देशभर से प्रतिभाशाली खिलाड़ी शामिल हुए थे, कड़े मुकाबले के बीच आकांक्षा कुमावत ने 57 किलो भार वर्ग में 77.5 किलोग्राम वजन उठाकर नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किया. इससे पहले इस वर्ग में राष्ट्रीय रिकॉर्ड 72.5 किलोग्राम का था. इसके अलावा इक्विप्ड बेंच प्रेस में भी आकांक्षा ने 95 किलोग्राम वजन उठाकर एक और नेशनल रिकॉर्ड बनाया, जबकि इससे पहले इस वर्ग का रिकॉर्ड 87.5 किलोग्राम था. दोनों ही श्रेणियों में आकांक्षा ने गोल्ड मेडल हासिल कर जालोर और राजस्थान का नाम रोशन किया.
पिछले पांच वर्षों से लगातार कर रही मेहनत
राजस्थान राज्य पावरलिफ्टिंग संघ के सचिव विनोद साहू ने बताया कि आकांक्षा सब-जूनियर गर्ल्स टीम की नेतृत्व कर रही थीं और उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ शानदार प्रदर्शन किया. आकांक्षा की इस ऐतिहासिक जीत से जिले में खुशी की लहर है और खेल प्रेमियों में उत्साह का माहौल बना हुआ है. अपनी सफलता पर आकांक्षा कुमावत ने कहा कि उनका लक्ष्य केवल मेडल जीतना नहीं, बल्कि जालोर, राजस्थान और देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करना है.
उन्होंने बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए वह पिछले करीब पांच वर्षों से लगातार मेहनत कर रही हैं. इस सफर में परिवार का सहयोग और कोच लोकेश कुमार व पूनम पूनिया का मार्गदर्शन उनके लिए सबसे बड़ी ताकत रहा. ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने वाली आकांक्षा आज न केवल जालोर, बल्कि पूरे राजस्थान की बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. उनकी यह सफलता साबित करती है कि अगर हौसले मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं होती.
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