@जेo केo/सोनभद्र…….

Sonbhadra । आध्यात्मिक जागृति दिवस के रूप में स्वामी विवेकानंद जी कि जयंती भारतीय अहिंसा सेवा संस्थान मनाया।संगठन के अध्यक्ष छात्र नेता जनसेवक विजय शंकर यादव ने नेता जी सुभाष चौक पर स्वामी विवेकानंद जी का पोस्टर हाथों में लेकर लोगो को जागरूक करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद जी का सम्पूर्ण जीवन आध्यत्म को समर्पित था।स्वामी जी सभी धर्मों में आस्था रखते हुए हिन्दू धर्म के प्रचार प्रसार में उदारता को महत्व दिया।
स्वामी विवेकानंद जी एक महान आध्यात्मिक गुरु, दार्शनिक और समाज सुधारक थे। उन्होंने न केवल भारत में हिंदू धर्म के पुनरुत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि भारतीय संस्कृति और वेदांत के संदेश को पूरी दुनिया तक पहुँचाया।12 जनवरी, 1863 को कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में हुआ।
बचपन का नाम: नरेंद्रनाथ दत्त था
गुरु: श्री रामकृष्ण परमहंस से नरेंद्र की मुलाकात 1881 में हुई, जिसके बाद उनके जीवन की दिशा बदल गई।शिकागो विश्व धर्म महासभा (1893 )स्वामी विवेकानंद जी का अमेरिका के शिकागो में आयोजित ‘विश्व धर्म महासभा’ उनको बड़ी ख्याति मिली।उनका ऐतिहासिक संबोधन: उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत “मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों” शब्दों से की, जिससे पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। स्वामी जी जब बोलना शुरू किए तो वहां उपस्थित लोग आत्म मुग्ध होकर सुनते रहे एक तक स्वामी जी को निहारते रहे।
उन्होंने दुनिया को सार्वभौमिक सहिष्णुता और सभी धर्मों की सत्यता का संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू धर्म सभी धर्मों को सत्य के रूप में स्वीकार करता है। 4 जुलाई, 1902 को मात्र 39 वर्ष की आयु में बेलूर मठ में उनका निधन हुआ। मात्र 39 वर्ष कि आयु के जीवन मे स्वामी जी विश्व विख्यात ब्यक्तित्व के रूप में अपनी पहचान बना लिए थे। स्वामी जी का जीवन प्रेणना प्रद है । मौके पर राजकुमार नन्हे छोटू चौधरी अमर नाथ विनोद कुमार अतु चन्द्रवंसी इत्यादि आम जन उपस्थित रहे। जिनको स्वामी जी कि तस्वीरे भेंट किया गया।