@जेo केo/सोनभद्र……….

Sonbhadra । दुद्धी ब्लॉक परिसर में क्षेत्र पंचायत की बैठक को ग्राम प्रधान संघ ने अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए बहिष्कार किया। बहिष्कार के दौरान बीडीओ कार्यालय के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन भी किया। ग्राम प्रधान संघ अध्यक्षा गुंजा कुशवाहा ने कहीँ की बैठक में सहभागिता नहीं की गई। किसी भी परिस्थिति में कार्रवाई रजिस्टर पर हस्ताक्षर नहीं किए गए। यह विरोध मेदनीखांड ग्राम प्रधान कलावती देवी के समर्थन में तथा पंचायतों के सम्मान, अधिकार की रक्षा के लिए समस्त प्रधानों का एकजुट, संगठित और स्पष्ट संदेश है। प्रधान संघ और समस्त प्रधान अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही संगठनात्मक इकाई के रूप में इस संघर्ष में मजबूती से खड़े हैं। बहिष्कार के दौरान सभी प्रधान सभागार के बाहर एकत्र हुए। जहाँ शांतिपूर्ण तरीके से अपने तेवरों के साथ विरोध दर्ज कराया गया।
इस दौरान “अधिकारी-कर्मचारी की मनमानी नहीं चलेगी”
“पंचायतों का अपमान बंद करो” जैसे नारे लगाए गए। जिससे यह स्पष्ट संदेश गया कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के सम्मान से कोई समझौता नहीं होगा। प्रधानों की इस व्यापक और एकजुट उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि पूरा ब्लॉक प्रधान संघ के निर्णय के साथ मजबूती से खड़ा है। और पंचायतों से जुड़े मामलों में अनदेखी, टालमटोल अथवा अमर्यादित प्रशासनिक रवैया अब स्वीकार नहीं किया जाएगा।
समस्त प्रधानों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पंचायत प्रतिनिधियों के साथ सम्मानजनक एवं मर्यादित व्यवहार सुनिश्चित नहीं किया गया। तो यह संघर्ष और अधिक व्यापक एवं निर्णायक रूप लेगा। जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी। यह बहिष्कार इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि समस्त प्रधान एकजुट हैं, सजग हैं और अपने सम्मान व अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी मजबूती के साथ खड़े हैं।
इस अवसर पर राकेश गुप्ता, सीता जायसवाल, रामप्रसाद यादव, त्रिभुवन यादव, दिनेश कुमार यादव, यदुनाथ, सीमा सिंह, सुरेंद्र कुमार, संजय कुमार, संजय कुमार यादव, शिवकुमार यादव, तारा देवी, ज्वाला प्रसाद, रामधनी यादव, विद्ववतं कुमार, गरीबा पाल, अब्दुल्लाह अंसारी, जगत नारायण, प्रतिमा देवी, बबिता देवी, अनारकली, कलावती देवी, किरण चौबे, प्रभावती देवी, मानिकचंद मौजूद रहे।
यह था मामला-
ब्लॉक क्षेत्र के मेदनीखाड़ ग्राम पंचायत में सांस्कृतिक मंच का निर्माण कार्य कराये गए हैं। जिसका भुगतान नहीं होने पर ग्राम प्रधान द्वारा आपत्ति कर सिकरेट्री अरुण यादव पर मनमानी करने का आरोप लगाया गया है। जबकि सिकरेट्री अरुण यादव का कहना है कि निजी भूमि पर किए गए निर्माण कार्य का कोई प्रस्ताव या स्टीमेट नही हैं। प्रधान द्वारा मनमानी कार्य कराकर दबाव में भुगतान के लिए परेसान किया जा रहा है।