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छपरा के सदर प्रखंड के बिशनपुर गांव निवासी सुनील कुमार सिंह के पुत्र हिमालय कुमार की है. जिन्होंने 8 वर्ष के उम्र से ही महात्मा बुद्ध स्पोर्ट्स अकैडमी बिशनपुर में ताइक्वांडो का प्रशिक्षण लेना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने कई बार नेशनल प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करते हुए बिहार को गोल्ड मेडल दिलाने का काम किया.
छपरा में अब शहर ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे भी खेत खलियान बाग बगीचे में खेल कर, खेल कोटा से नौकरी ले रहे हैं. आज एक ग्रामीण क्षेत्र के युवा की संघर्ष की कहानी इस खबर के माध्यम से जान सकेंगे, जो महज 8 वर्ष के उम्र से ही संघर्ष करना शुरु किया. जिस संघर्ष के बदौलत अब अच्छे मुकाम भी हासिल कर लिया है. हम बात कर रहे हैं सदर प्रखंड के बिशनपुर गांव निवासी सुनील कुमार सिंह के पुत्र हिमालय कुमार की है. जिन्होंने 8 वर्ष के उम्र से ही महात्मा बुद्ध स्पोर्ट्स अकैडमी बिशनपुर में ताइक्वांडो का प्रशिक्षण लेना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने कई बार नेशनल प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करते हुए बिहार को गोल्ड मेडल दिलाने का काम किया.
ताइक्वांडो का प्रशिक्षण ब्लैक बेल्ट रवि शंकर शर्मा के द्वारा शुरुआती दौर से ही इन्होंने प्रशिक्षण लिया. हिमालय जब नौकरी कि उम्र में आया तो ताइक्वांडो कोच रवि शंकर शर्मा ने उन्हें अग्नि वीर में स्पोर्ट्स कोटा से फॉर्म भरने को कहा, जिसमें ताइक्वांडो का नेशनल प्रमाण पत्र के साथ हिमालय फॉर्म भर दिया. पहले ही चांस हिमालय का नौकरी अग्निवीर में स्पोर्ट्स कोटा से हो गया. हिमालय अपने परिवार में पहला व्यक्ति है. जो सरकारी नौकरी स्पोर्ट्स कोटा से लिया है. जिसको लेकर परिवार और गांव के लोगों में काफी खुशी का माहौल है.
बिहार को दिला चुके है मेडल
हिमालय कुमार ने बताया कि जब मैं 8 से 10 वर्ष का था. उस समय से रवि शंकर शर्मा के पास ताइक्वांडो खेलना शुरू किया. उस समय मेरा वजन 27 किलो था. मैंने काफी छोटे उम्र से ही संघर्ष शुरू किया था. बताया कि 18 वर्ष उम्र होने से पहले ही जिला स्तर, राज्य स्तर प्रतियोगिता और नेशनल स्तर के ताइक्वांडो प्रतियोगिता में मैंने कई बार प्रदर्शन किया. जिसमें बेहतर प्रदर्शन करते हुए अपने बिहार को मेडल भी दिल चुका हूं. जो खिलाड़ी राज्य स्तर के प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता होगा, नेशनल स्तर के प्रतियोगिता में भाग लिया होगा. वैसे खिलाड़ियों को स्पोर्ट्स कोटा से नौकरी मिल सकता है. बताया कि बिहार सरकार के द्वारा अब नेशनल स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करते हुए मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को नगद इनाम भी दिया जा रहा है. यही नहीं तो बिहार सरकार के द्वारा नेशनल इंटरनेशनल खेलने वाले खिलाड़ी को स्पोर्ट्स कोटा से नौकरी भी मिल रहा है.
अग्नि वीर में हिमालय को नौकरी मिला
ताइक्वांडो कोच रवि शंकर शर्मा ने लोकल 18 से कहा कि हिमालय काफी छोटा था. उसी समय मेरे पास खेलने आया था. शुरू से ही इसके अंदर खेल के प्रति काफी रुझान था. यहीं पर प्रशिक्षण लेकर ताइक्वांडो के कई नेशनल राज्य और जिला प्रतियोगिता में इन्होंने बेहतर प्रदर्शन करते आया है. जब हिमालय का 18 वर्ष नहीं हुआ था उसके पहले ही राज्य स्तर पर नेशनल स्तर पर खेल चुका था. जिस खेल के बदौलत इस स्पोर्ट्स कोटा से अग्नि वीर में हिमालय को नौकरी मिला है. इसके पहले भी दो लड़के का इसी ग्राउंड से खेलने के बाद स्पोर्ट्स कोटा से नौकरी मिला है. यहां 2013 में क्लब स्थापित किया तब से बच्चे लगातार ऊंचे स्तर पर अपना दबदबा बनाते जा रहे हैं. हिमालय और हिमालय से पहले नौकरी मिलने वाले खिलाड़ियों के सफलता को लेकर मुझे एक नया ऊर्जा मिलता है.
खेल से अब हर क्षेत्र में युवा नौकरी ले रहे
हिमालय नौकरी हो जाने के बावजूद भी खेलने के लिए आता है. इसको मैं इंटरनेशनल खिलाना चाहता हूं. जिसको लेकर प्रशिक्षण अभी भी जारी है. खेल से अब हर क्षेत्र में युवा नौकरी ले रहे हैं. बिहार सरकार के द्वारा नेशनल स्तर पर मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को नगद दिया जा रहा है. उसके बाद साल में 5 लाख से 20 लाख रुपए तक खिलाड़ियों को स्कॉलरशिप मिलेगा. अब तो बिहार सरकार नौकरी भी खिलाड़ियों को दे रहा है. खासकर सरकार खिलाड़ियों के लिए अपना कुबेर का खजाना खोल दिया है. सरकार के खिलाड़ियों के प्रति यह सोच बिहार को आगे काफी तेजी से बढ़ाने में मददगार साबित हो रहा है.
