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जूही अब तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी है और इन प्रतियोगिताओं में 70 से अधिक पदक अपने नाम कर चुकी है. जूही के पिता एक मजदूर हैं. मूल रूप से जमुई जिले के झाझा प्रखंड क्षेत्र के सिमुलतला के रहने वाले मंटू प्रजापति की बेटी है.
जमुई. महज 14 साल की उम्र में कोई क्या कुछ कर सकता है. इस उम्र में बच्चे खेलने-कूदने में व्यस्त रहते हैं. अपने स्कूल की पढ़ाई में ध्यान लगाते हैं और समय बचता है तो कुछ अच्छा और नया सीखने की कोशिश करते हैं. लेकिन जमुई में एक 14 साल की लड़की ऐसी भी है, जो अपनी उम्र से इतनी आगे निकल चुकी है कि उसको पकड़ पाना अब धीरे-धीरे लोगों के लिए मुश्किल होता जा रहा है.
दरअसल, जमुई जिले के सिमुलतला की रहने वाली जूही प्रजापति ने मात्र 14 साल की उम्र में ऐसा कमाल कर दिखाया है कि उसके आसपास पहुंचने के बारे में कोई सोच भी नहीं सकता है. इस उम्र में इसने 70 से अधिक पदक अपने नाम कर लिए हैं. कराटे की प्रतियोगिता में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग प्रतियोगिता में जूही ने कई सारे पदक जीत कर सबको हैरान कर दिया है.
राजस्थान में फिर से जीत लिया पदक
जूही प्रजापति ने एक बार फिर से अपना प्रदर्शन जारी रखते हुए राजस्थान के जयपुर में आयोजित कराटे प्रतियोगिता में एक बार फिर से डबल पदक अपने नाम हासिल किया है. राजस्थान के जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में जूही ने एक नहीं बल्कि दो खेलों में पदक अपने नाम किया है. जूही ने कराटे में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है, तो पहली बार उसने इस बार एथलेटिक्स में भी हिस्सा लिया था और 400 मीटर की दौड़ में रजत पदक जीतकर सबको हैरान कर दिया. बताते चलें कि जूही इसके अलावा कुमेते की भी खिलाड़ी है और कुमेते में भी लगातार कई अलग-अलग प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुकी है.
70 से अधिक पदक हासिल कर चुकी है जूही
बताते चलें कि जूही अब तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं और इन प्रतियोगिताओं में 70 से अधिक पदक अपने नाम कर चुकी हैं. जूही के पिता एक मजदूर हैं. मूल रूप से जमुई जिले के झाझा प्रखंड क्षेत्र के सिमुलतला के रहने वाले मंटू प्रजापति की बेटी जूही प्रजापति खेलों में अपना नाम कर रही है, तो पिता मजदूरी कर अपनी बेटी का सपना पूरा करने में लगे हुए हैं. पिता राजस्थान के जयपुर में रहकर मजदूरी करते हैं. मंटू प्रजापति का कहना है की बेटी दिन में स्कूल जाती है, और शाम में खेलों की प्रैक्टिस करती है. उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि अपनी बेटी का सपना पूरा करें और उसे एक बड़ा खिलाड़ी बनाएं. इसके लिए हमें जितनी भी मेहनत करनी पड़ेगी, हम करेंगे. जूही की सफलता के बाद परिवार सहित पूरे जिले के खेल प्रेमियों में खुशी का माहौल है.
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