रेणुकूट/सोनभद्र. @अमिताभ मिश्रा….

रेणुकूट नगर पंचायत के मुर्धवा स्थित समन्वय परिसर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा का समापन अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ हुआ। कथा के अंतिम दिन वृंदावन से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक पूज्य अखिलेश्वरानंद जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा के चरित्र का मार्मिक वर्णन किया। सुदामा चरित्र की कथा सुनकर श्रोता भाव-विभोर हो उठे और पूरा परिसर भक्ति रस में डूब गया।
कथावाचक अखिलेश्वरानंद जी महाराज ने सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता का उदाहरण देते हुए बताया कि सच्ची मित्रता न तो धन की मोहताज होती है और न ही वैभव की। उन्होंने कहा कि सुदामा की दरिद्रता और श्रीकृष्ण की राजसी समृद्धि के बावजूद दोनों के बीच प्रेम और सम्मान समान था। सुदामा का चरित्र यह सिखाता है कि अहंकार से दूर रहकर विनम्रता और भक्ति के मार्ग पर चलने से जीवन में सुख-समृद्धि स्वतः आती है।
महाराज जी ने यह भी कहा कि भगवान अपने भक्तों की भावना को देखते हैं, न कि उनके द्वारा लाए गए उपहार को। सुदामा द्वारा लाया गया चावल भगवान श्रीकृष्ण के लिए अमूल्य था, क्योंकि उसमें निष्कलंक प्रेम और सच्ची भक्ति समाहित थी। कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने जयकारों और भजनों के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में नगर एवं आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन सनातन एकता सेवा संघ द्वारा किया गया था। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि कथा के दौरान प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही थी और अंतिम दिन सुदामा चरित्र के प्रसंग ने सभी के मन को छू लिया।
कथा के समापन अवसर पर आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। आयोजनकर्ताओं ने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों और सेवाभाव से जुड़े कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया तथा सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया।