@जे0के0/सोनभद्र……
__भ्रष्टाचार के तमाम आरोपों के बाद भी नए जिले में तैनाती आम लोगों के बीच क्या हुआ मैसेज का असर
__कभी इस जिले का कोढ़ बन गया था खनन सिंडिकेट, जिले से लेकर राजधानी तक और देश की राजधानी तक चर्चे में आ गया था सोनभद्र

SONBHADRA । यूपी के जनपद सोनभद्र का नाम बेहद खास माना जाता है, चाहे बात खनन से जुड़ी हो या सोने के खजाने के रहस्य की, या किले में छिपे खजाने अथवा ऊर्जा के क्षेत्र में हब को लेकर भी सोनभद्र चर्चा में रहता है, लेकिन इससे अलग भी एक चर्चाए खास है वह है खनन अधिकारी के तबादले की, क्यों चर्चा है शैलेंद्र पटेल की इस पर एक चर्चा होना लाजमी है।
उत्तर प्रदेश के भू तत्व एवं खनिकर्म विभाग ने प्रशासनिक फेर बदल करते हुए सोनभद्र के खनन अधिकारी शैलेंद्र कुमार पटेल को गैर जनपद झांसी का चार्ज दे दिया गया है उनकी जगह पर कमल कश्यप को नया खान अधिकारी नियुक्त किया गया है, यह तैनाती ऐसे समय के हो रही है जब जिले में खनन के स्वरूप को लेकर आम जनमानस में बेहद चर्चा का विषय है, CAG रिपोर्ट में जनपद में किस तरह से खनन को नए आयाम की तरफ लेकर अधिकारियों ने कार्य किया है और जांच दर जांच के बाद कार्रवाइयां की गई है उसको लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं।

CAG रिपोर्ट में सोनभद्र में खनन के कार्य को लेकर कई खुलासे किए गए, चर्चा यह भी है कि खनन अधिकारी शैलेन्द्र कुमार पटेल पर कार्यवाही होना दिख रहा था लेकिन लोगों को मायूसी हाथ लगी, कार्यवाही की जगह नई तैनाती झांसी में दे दी गयी, झांसी जिला भी खनन को लेकर खास बताया जा रहा है।
खनन अधिकारी शैलेन्द्र कुमार पटेल पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे, कई मीडिया संस्थानों में उनके भ्रष्टाचार को लेकर खबरें भी सामने आई ,चाहे ओवरलोडिंग की बात कर लें या बिना एमएम 11 की गाड़ियों के जाने की, पत्थर खनन पट्टे में एमएम 11 एक वर्ष की बजाय एक महीने में निकाल कर पूरे वर्ष बिना एमएम 11 के खनन करने को लेकर भी चर्चा रही ।
शिकायत के बाद भी ऐसे खननकर्ताओं पर शैलेंद्र कुमार पटेल ने कोई कार्रवाई नहीं की, जो परमिट निकाल कर एक महीने में ही विक्रय कर दिया करते हैं, यही है सिंडिकेट का रहस्य जिसे समझना आम लोगों के बस की बात नहीं है ।
आखिर कैसे पत्थर खनन पट्टाधारक पूरे वर्ष का एमएम 11 (परमिट) को एक साथ निकालकर बेच दिया करता है और उसके बाद पूरे 12 महीने बिना एमएम 11 (परमिट) का खनन करता है, जिले के आल्हा अधिकारी और खनन विभाग के जुड़े अधिकारी जो हर महीने रिपोर्ट लगाते हैं वह नहीं जानते ?