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जमुई के शैलेश ने अपने मेहनत से बिहार समेत पूरे देश का नाम रोशन किया है. वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में उन्होंने ऊंची कूद में नया रिकार्ड बनाते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया है. सरकार ने इनामी राशि के तौर पर 75 लाख रुपए देने की घोषणा की है.
जमुई. नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 का आयोजन किया जा रहा है. जिसमें जमुई के रहने वाले शैलेश कुमार ने भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया है. इस प्रतियोगिता में शैलेश कुमार ने पुरुषों की ऊंची कूद टी63/42 श्रेणी में अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में सुधार करते हुए 1.91 मीटर की छलांग लगाई और नया चैंपियनशिप रिकॉर्ड भी बना दिया साथ ही इस इवेंट में भारत की तरफ से पहला गोल्ड मेडल भी हासिल कर लिया.
शैलेश जमुई जिले के अलीगंज प्रखंड क्षेत्र के इस्लामनगर के रहने वाले हैं. एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार में पैदा हुए शैलेश ने अपने बूते अपने सपनों को साकार कर दिखाया है. शैलेश का घर इस्लामनगर गांव में स्थित है और आज भी उसके घर की दीवारों पर प्लास्टर तक नहीं है.
मिलेगा 75 लाख का इनाम
शैलेश के पिता शिवनंदन यादव एक किसान हैं और खेती-बाड़ी तथा पशुपालन के जरिए अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं. उन्होंने बताया कि हमें फोन से इसकी जानकारी हुई कि दिल्ली में किसी प्रतियोगिता में शैलेश ने भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता है. शिवनंदन यादव ने बताया कि उसने मुझे फोन नहीं किया था, बल्कि अपनी मां को फोन कर इस बात की जानकारी दी थी. हालांकि उन्हें अब तक यह नहीं पता चल सका है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके बेटे को 75 लाख रुपए का पुरस्कार देने की घोषणा की है. सबसे पहली बार लोकल 18 के द्वारा ही उन्हें इस बात की जानकारी दी गई. जिस पर माता-पिता का रिएक्शन सामने आया है. पिता ने कहा कि मुख्यमंत्री ने ऐसी घोषणा की है इस बात से उन्हें काफी खुशी पहुंची है.
पढ़ाई की बजाय खेल का जुनून
पिता शिवनंदन यादव ने कहा कि उनका पुत्र बचपन से ही दिव्यांग था. लेकिन इसके बावजूद भी उसने अपने मेहनत में कभी कोई कमी नहीं की. वह घर से स्कूल जाने के लिए निकलता था लेकिन स्कूल की बजाय वह खेलने चला जाता था. शुरुआत में हमें इस बात की जानकारी नहीं हुई, लेकिन एक दिन उसने खुद आकर हमें बताया. इसके बाद पहले तो हमें थोड़ी चिंता भी हुई, पर जब वह अच्छा प्रदर्शन करने लगा तब हम उसका उत्साह और बढ़ाने लगे. पिता ने बताया कि मैंने कर्ज लेकर उसे अलग-अलग जगह पर ट्रेनिंग के लिए भेजा था. आज वह भारत के लिए स्वर्ण पदक जीत रहा है, यह केवल मेरे लिए नहीं बल्कि मेरे साथ-साथ पूरे जमुई जिले और पूरे बिहार के लिए गौरव का विषय है.
