विंढमगंज/सोनभद्र (आनंद गुप्ता )…….

महुली कस्बा में चल रहे रामलीला के दुसरे दिन भगवान श्रीराम के जन्म की लीला दिखाई गई। लीला में दिखाया गया की गुरु वशिष्ठ ने महाराजा दशरथ को संतानोत्पत्ति के लिए यज्ञ कराने के लिए कहा। जिसके बाद श्रृंगीऋषि यज्ञ कराते हैं, यज्ञ सफल होता हैं और अग्निदेव प्रकट होते हैं।
द्रव्य देकर दशरथ से कहते हैं कि इसे अपनी रानियों को दे दीजिए, इसका सेवन करने से संतान अवश्य होगी। राजा दशरथ के द्रव्य देने के बाद रानियां उन्हें ग्रहण करती हैं। भगवान विष्णु प्रकट होते हैं, कौशल्या हतप्रभ सी उनके दर्शन करती है। इस बीच मंच पर पार्श्व संगीत भए प्रकट कृपाला, दीनदयाला, कौसल्या हितकारी. गूंजने लगता है। वहीं माता कौशल्या कहती हैं, हे तात आप यह विराट रूप त्याग कर अत्यंत प्रिय बाल लीला कीजिए।
विष्णु जी अंर्तध्यान होते हैं, बच्चों के रोने की आवाजें सुनाई देती हैं, खुशी का संगीत उभरता है। अगले दृश्य में रामजन्म के समाचार से राजा दशरथ सहित संपूर्ण अयोध्या में खुशी छा जाती है। जिसके बाद आगे लीला में दिखाया जाता है की चारों भाईयों का नामकरण संस्कारण किया गया, रामजन्म के बाद गुरु वशिष्ठ द्वारा चारों भाइयों को वेद व अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा दी जाती है।
