करमा/सोनभद्र (रामकेश यादव)

विकास खंड करमा क्षेत्र अंतर्गत आने वाले कई गांवों में ऊंची जमीन होने के कारण अधिक से अधिक किसानों की जमीनों में टमाटर और मिर्च की खेती लगातार कई वर्षों से होती चली आ रही है। चाहे वह किसान अपने नीजी खेतों में खेती कर रहे हो अथवा अपनी जमीन को एक वर्ष के लिए खेती करने के लिए दूसरे को दे देते है।
जानकारी के अनुसार विकासखंड करमा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव सिरसिया, पिपरा, केकराही, भदोही , भरूहा ,जरेनुआ, जुरवत, दिलाही, बहेरा, आदि गांव में अधिक से अधिक ऊंची जमीन है जहां धान की खेती पानी की कमी की वजह से नहीं की जा सकती है। वहां मिर्च और टमाटर की खेती ज्यादातर किसान करते हैं।

हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी किसानों ने मिर्च की खेती बड़े पैमाने पर किए हैं जिसका दूर-दूर तक इस क्षेत्र का इस पैदावार का बोलबाला रहता है ।कुछ किसानों ने तो स्वयं से अपने खेतों में मिर्च और टमाटर की खेती कर पैदावार से लाभ लेते हैं। परंतु कुछ किसान ऐसे भी हैं जो अपने खेत को को स्वयं खेती न करके दूसरे किसानों को अठारह हजार से लेकर बाईस हजार रुपए प्रति बीघे की दर से खेती के लिए किसान को दे दिया जाता है।
उस खेत में किसान अधिक उर्वरक,यूरिया डीएपी कीटनाशक का प्रयोग करते है। एवं उसी के अनुसार यूरिया का भी प्रयोग दवा का भी छिड़काव करते हैं जिससे किसान के खेतों की उर्वरा शक्ति के प्रभाव से भविष्य मेंउसकी उपज में कमी होने की संभावना बढ़ती जा रही है ।भारतीय किसान संघ काशी प्रांत के उपाध्यक्ष राम जी सिंह मौर्य,और भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष राम बहादुर सिंह ने बताया कि अगर किसानों ने अपनी सोच नहीं बदली तो जमीन पत्थर सी हो सकती है ।
क्योंकि जमीन के अंदर सभी पोषक तत्व जो पैदावार को बढ़ाते हैं उसको अधिक डीएपी खाद डालने से नष्ट कर दे रहे हैं और जो पौधों को कीटाणुओं को मारने वाली दवा से इसकी पैदावार में भी जो उपयोगी जीवाणु होते हैं वह भी नष्ट हो जा रहे हैं। जिससे जमीन की पैदावार पर गहरा प्रभाव पड़ेगा इसलिए किसान सीमित मात्रा में ही सोच समझ कर उर्वरा शक्ति का प्रयोग करे।।