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Neeraj Chopra: 5 वजहें, क्यों टोक्यो में नहीं चला नीरज चोपड़ा का जादू, सही नहीं गए जेवलिन थ्रो

Admin by Admin
September 19, 2025
in खेल
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Neeraj Chopra: 5 वजहें, क्यों टोक्यो में नहीं चला नीरज चोपड़ा का जादू, सही नहीं गए जेवलिन थ्रो
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Last Updated:September 19, 2025, 14:31 IST

Neeraj Chopra: विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत के स्टार जेवलिन थ्रोअर आठवें स्थान पर रहे. तकनीकी समस्याएं, चोट, दबाव, थकान और फोकस की कमी उनके पिछड़ने की मुख्य वजहें रहीं.

5 वजहें, क्यों टोक्यो में नहीं चला नीरज चोपड़ा का जादू,सही नहीं गए जेवलिन थ्रोअपने निराशाजनक प्रदर्शन के साथ वह सात सालों में पहली बार पदक जीतने में असफल रहे.
Neeraj Chopra: स्टार जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा का अविश्वसनीय सफलता का सिलसिला विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में अप्रत्याशित रूप से थम गया. टोक्यो ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता चोपड़ा भाला फेंक स्पर्धा के फाइनल में आठवें स्थान पर रहे. अपने निराशाजनक प्रदर्शन के साथ वह सात सालों में पहली बार पदक जीतने में असफल रहे. भारतीय एथलेटिक्स के ‘गोल्डन बॉय’ 27 वर्षीय नीरज चोपड़ा लगातार 26 स्पर्धाओं में शीर्ष दो में रहे थे, जो इस तकनीकी खेल में एक अद्भुत उपलब्धि है. जून 2021 में फिनलैंड में हुए कोर्टेन खेलों में तीसरा स्थान हासिल करने के बाद से यह पहला मौका था जब वे शीर्ष दो से बाहर रहे.

नीरज चोपड़ा विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को दोहराने में नाकाम रहे. पूर्व ओलंपिक और विश्व चैंपियन ने 84.03 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया, जो उनके सामान्य मानकों से काफी कम था. फाइनल के 5वें दौर में अपना अभियान समाप्त होने से वे निराश दिखे. चोपड़ा ने शुरुआत 84.65 मीटर के शुरुआती थ्रो के साथ की थी. उसके बाद उन्होंने 83.03 मीटर तक भाला फेंका. अपने तीसरे प्रयास में एक फाउल और चौथे में 82.86 मीटर के मामूली थ्रो ने उन्हें दबाव में डाल दिया. जिससे वह राउंड में एलिमिनेशन से बाल-बाल बचे और अंततः बाहर हो गए. शेष प्रतियोगियों में सबसे आखिर में भाला फेंकते हुए उन्होंने दर्शकों से समर्थन की अपील की.

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बाहर होने पर छलका दर्द
जैसे ही जेवलिन हाथ से छूटा नीरज चोपड़ा का असंतोष उनके चेहरे पर साफ दिखाई दिया. उन्होंने मुंह बनाया और फिर लाइन पार कर गए, जिससे उनका आखिरी थ्रो अमान्य हो गया. हताशा में उन्होंने अपनी बेल्ट उतार दी, चीखे और अपना चेहरा ढक लिया. जिससे अपने प्रदर्शन पर उनकी निराशा जाहिर हुई. फाइनल में चोपड़ा का सर्वश्रेष्ठ थ्रो 84.02 मीटर रहा, जो उनके व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 90.23 मीटर से काफी कम था. हालांकि प्रशंसक तुरंत चोपड़ा के पीछे एकजुट हो गए. उन्हें विश्वास है कि वह और मजबूती से वापसी करेंगे. लेकिन नीरज चोपड़ा का सफर आज भी प्रेरणादायी है. इससे यह साबित हुआ कि सर्वश्रेष्ठ एथलीट भी मुश्किल दौर से गुजरते हैं, लेकिन नए सिरे से मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ वापसी कर सकते हैं.

नीरज चोपड़ा भाला फेंक स्पर्धा के फाइनल में आठवें स्थान पर रहे. (Photo- AP)
तकनीकी समस्या और फाउल: नीरज चोपड़ा की सबसे बड़ी परेशानी उनकी तकनीक थी. पेरिस ओलंपिक में रजत पदक जीतने के बाद उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि यह उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं था. वह बार-बार फाउल कर रहे थे, जिससे उनके थ्रो की दूरी पर असर पड़ रहा था. रनवे पर उनके कदमों का सही तालमेल न बनना भी एक प्रमुख कारण था, जिसकी वजह से वह अपनी पूरी ताकत से भाला नहीं फेंक पा रहे थे.

चोट का असर: नीरज की पुरानी कमर की चोट भी उनके प्रदर्शन में बाधा बन रही थी. हालांकि चोट बहुत गंभीर नहीं थी, लेकिन यह उनकी पूरी क्षमता से थ्रो करने की लय को प्रभावित कर रही थी. ऐसी स्थिति में, एक एथलीट के लिए अपनी पूरी ताकत और स्पीड का इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है.

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अत्यधिक उम्मीदों का दबाव: एक ओलंपिक और विश्व चैंपियन होने के नाते नीरज चोपड़ा पर लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करने का भारी दबाव था. पेरिस ओलंपिक में रजत पदक जीतने के बावजूद उनका प्रदर्शन उनके अपने उच्च मानकों से काफी नीचे था. इस तरह की भारी उम्मीदों का दबाव कभी-कभी एथलीट की मानसिक और शारीरिक स्थिति पर बुरा असर डाल सकता है, जिससे वह अपने स्वाभाविक खेल पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता.

लगातार प्रतियोगिताओं की थकान: नीरज चोपड़ा पिछले कुछ समय से लगातार विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे थे. एक एथलीट के शरीर को रिकवरी के लिए पर्याप्त आराम की जरूरत होती है. लगातार प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने से शरीर में थकान जमा हो सकती है, जिसका असर उसके प्रदर्शन पर दिखता है. हालांकि नीरज ने यह नहीं कहा कि यह एक कारण था, लेकिन यह एक कारण हो सकता है.

मानसिक फोकस में कमी: जब शरीर पूरी तरह से फिट नहीं होता और तकनीक में भी कमी होती है, तो इसका सीधा असर मानसिक एकाग्रता पर पड़ता है. नीरज ने स्वयं स्वीकार किया कि उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या गलत हो रहा है. जब कोई एथलीट अपने सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में नहीं होता, तो उसका आत्मविश्वास डगमगा जाता है. जिससे वह अपनी पूरी क्षमता से प्रदर्शन नहीं कर पाता.

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वाल्कॉट ने जीता गोल्ड मेडल
नीरज चोपड़ा का दिन खराब था, लेकिन फाइनल में अन्य एथलीटों ने भी शानदार प्रदर्शन किया. भारत के सचिन यादव ने 86.27 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ चौथा स्थान हासिल किया. जिससे भाला फेंक में भारत की बढ़ती ताकत का पता चलता है. लंदन ओलंपिक 2012 के स्वर्ण पदक सहित दो बार के ओलंपिक पदक विजेता केशोर्न वाल्कॉट ने 88.16 मीटर के थ्रो के साथ अपना पहला विश्व चैंपियनशिप पदक जीता. जमैका के एंडरसन पीटर्स ने 87.38 मीटर के साथ सिल्वर और अमेरिका के कर्टिस थॉम्पसन ने 86.67 मीटर के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता. मौजूदा ओलंपिक चैंपियन पाकिस्तान के अरशद नदीम भी चौथे राउंड के बाद बाहर हो गए और कुल मिलाकर 10वें स्थान पर रहे.

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Location :

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First Published :

September 19, 2025, 14:31 IST

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