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मधुपुर. सुकृत के खदानों में मजदूरों से कराई जा रही ब्लास्टिंग, सुरक्षा इंतज़ामों की खुली पोल

JK Gupta by JK Gupta
September 16, 2025
in सोनभद्र
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मधुपुर/सोनभद्र (मुकेश द्विवेदी)……..


सुकृत खनन क्षेत्र में खदान मालिक और ठेकेदार मजदूरों की जिंदगी से खिलवाड़ करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। यहां ब्लास्टिंग के दौरान सुरक्षा नियमों की ऐसी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं कि हादसे होना आम बात हो गई है। खदान में ब्लास्टर कागजों पर लिखित में हैं और धरातल पर मजदूर।

ब्लास्टर फोरमैन केवल कागज़ों पर:

खनन अधिनियम के मुताबिक खदानों में ब्लास्टिंग केवल प्रशिक्षित और लाइसेंसधारी ब्लास्टर फोरमैन की मौजूदगी में ही की जा सकती है। लेकिन हकीकत यह है कि सुकृत खदानों में ये जिम्मेदार लोग अक्सर मौके पर मौजूद ही नहीं होते। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार तो ब्लास्टर और फोरमैन नाम के लिए कागज़ों पर दर्ज रहते हैं, जबकि वास्तविकता में धमाके कोई और कराता है।

मजदूरों से जबरन कराई जाती है ब्लास्टिंग:

ग्रामीणों और मजदूरों का आरोप है कि जब ब्लास्टर या फोरमैन मौजूद नहीं होते, तब बारूद सप्लाई करने वाले लोग मजदूरों को धमकी देकर या मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे ही ब्लास्टिंग करा देते हैं। बिना किसी प्रशिक्षण और सुरक्षा उपकरण के मजदूरों को बारूद के ढेर से खिलवाया जाता है। यही वजह है कि आए दिन धमाके मौत और हादसों में तब्दील हो जाते हैं।

हादसों के बाद समझौते की परंपरा:

जानकारी के मुताबिक जब भी कोई मजदूर घायल होता है या उसकी जान चली जाती है, तो खदान मालिक और संचालक परिवार को कुछ रुपये थमा कर मामला दबा देते हैं। परिवार गरीबी और रोज़गार खोने के डर से चुप रह जाता है। न तो कोई केस दर्ज होता है और न ही जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होती है।

प्रशासन की संदिग्ध भूमिका:

सबसे बड़ा सवाल प्रशासन और खनन विभाग पर उठ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन पूरी तरह से आंख मूंदे बैठे हैं। कागज़ों पर जांच और सुरक्षा रिपोर्ट बनाई जाती है, लेकिन हकीकत खदानों में जाकर साफ देखी जा सकती है। हादसों पर न तो कोई ठोस कार्रवाई होती है और न ही खदान संचालकों पर कोई सख्त कदम।

लोगों की मांग:

ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि –

खदानों में ब्लास्टर और फोरमैन की अनिवार्य मौजूदगी सुनिश्चित की जाए।

मजदूरों को सुरक्षा उपकरण (हेलमेट, जूते, मास्क, ग्लव्स आदि) दिए जाएं।

हादसों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

मजदूरों की सुरक्षा की अनदेखी करने वाले खदान मालिकों के लाइसेंस रद्द किए जाएं।

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