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Gorakhpur News: चिड़ियाघर के डॉक्टर योगेश बताते हैं कि शावकों की उम्र एक माह से भी कम है. ऐसे में उनकी परवरिश और सुरक्षा बड़ी चुनौती है. प्राणी उद्यान प्रशासन ने सभी इंतज़ाम किए हैं, ताकि शावक स्वस्थ माहौल में बड़े हो सकें. यहां उन्हें बेहतर देखभाल और पोषण मिलेगा. गोरखपुर प्राणी उद्यान में तेंदुआ और उसके शावकों का आना न सिर्फ रोमांच बढ़ाएगा.
तीन दिन पहले लखीमपुर खीरी में मादा तेंदुआ और उसके तीन शावक पकड़े गए थे. शुरुआत में योजना थी कि सभी को जंगल में छोड़ा जाएगा, लेकिन हालात देखते हुए फैसला बदला गया. दरअसल, मादा तेंदुआ की उम्र लगभग 8 साल है और वह अब शिकार करने में पूरी तरह सक्षम नहीं रह गई थी. ऐसे में उसके वापस जंगल जाने पर बस्तियों या खेतों की ओर लौट आने का खतरा था. इसी वजह से उसकी और शावकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें गोरखपुर जू भेजा गया.
DFO संजय विशाल की देखरेख में शुक्रवार रात तेंदुआ और शावक सुरक्षित रूप से गोरखपुर प्राणी उद्यान पहुंचे. यहां चिड़ियाघर प्रशासन ने उनका स्वागत किया और विशेष आवास में रखा. इसके लिए एक अलग टीम बनाई गई है, जो उनकी सेहत, विकास और व्यवहार पर लगातार नजर रखेगी.
शावकों की सुरक्षा पर खास ध्यान
चिड़ियाघर के डॉक्टर योगेश बताते हैं कि, शावकों की उम्र एक माह से भी कम है. ऐसे में उनकी परवरिश और सुरक्षा बड़ी चुनौती है. प्राणी उद्यान प्रशासन ने सभी इंतज़ाम किए हैं, ताकि शावक स्वस्थ माहौल में बड़े हो सकें. यहां उन्हें बेहतर देखभाल और पोषण मिलेगा. गोरखपुर प्राणी उद्यान में तेंदुआ और उसके शावकों का आना न सिर्फ रोमांच बढ़ाएगा, बल्कि लोगों को वन्यजीव संरक्षण के महत्व से भी जोड़ने का काम करेगा.
दर्शकों को दिखेंगे तेंदुआ और तीन शावक
DFO संजय विशाल ने बताया कि यह कदम खास तौर पर शावकों की परवरिश और सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है. गोरखपुर जू को वन्यजीव संरक्षण और शिक्षा का प्रमुख केंद्र बताते हुए उन्होंने कहा कि, यहां आने वाले लोगों को न सिर्फ वन्यजीवों को करीब से देखने का मौका मिलेगा, बल्कि उनके महत्व और संरक्षण के बारे में भी जागरूक किया जाएगा.
