शिवशंकर ने इसके लिए सबसे पहले अपनी पत्नी के प्रेमी विशाल को इस शादी के लिए राजी किया. फिर खुद ही पंडिल बुलाया, मंगलसूत्र और सिंदूर के साथ-साथ वरमाला का भी इंतजाम किया. इसके बाद मंदिर में विशाल और उमा की शादी करावा दी. पति द्वारा पत्नी की शादी करना का यह अजीबो-गरीब मामला अमेठी जिले के कमरौली थाना क्षेत्र के दीना का पुरवा गांव से सामने आया है. यह मामला अब गांव में ही नहीं, बल्कि पूरे अमेठी जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2 मार्च 2025 को शिवशंकर की शादी उमा प्रजापति से हुई थी. उमा शुरू से ही इस रिश्ते से असंतुष्ट थी,क्योंकि शिवशंकर बेरोजगार था. शादी के महज 15 दिन बाद ही उमा अपने मायके चली गई थी. कुछ दिनों बाद शिवशंकर उसे विदा कराके वापस ले गया. लेकिन, उमा का मायके आना-जाना लगातार बना रहा। ससुराल पक्ष को यह बात खटकने लगी और जब पड़ोसियों से पूछताछ की गई तो उमा के अफेयर का खुलासा हुआ.
दो साल पुराना प्रेम, जो अब भी ज़िंदा था
गांव वालों ने बताया कि उमा का अपने मायके के पास के गांव मंगोली के युवक विशाल प्रजापति से दो साल से अफेयर चल रहा था. उमा अब भी उससे फोन पर बात करती थी. शिवशंकर ने जब उमा से इस बारे में बात की, तो उसने शुरुआत में कुछ भी स्वीकार नहीं किया. इसके बाद शिवशंकर स्वयं मायके जाकर स्थिति की पुष्टि की. जब सच्चाई सामने आई, तो उसने उमा को समझाने की कई कोशिशें कीं. लेकिन जब बात नहीं बनी, तो उसने एक अनोखा फैसला लिया… उमा की शादी उसके प्रेमी से करा देने का.
शिवशंकर के इस फैसले से उसके घर में विरोध का तूफ़ान खड़ा हो गया. लेकिन उसने सभी को समझाया कि यह फैसला सभी के भविष्य के लिए बेहतर है. फिर वह उमा के परिवार और विशाल के परिवार से भी मिला. पहले तो कोई तैयार नहीं हुआ, लेकिन युवक ने सहनशीलता और समझदारी से सभी को राजी कर लिया.
मंदिर में हुई शादी, पति बना शादी का आयोजक
शनिवार दोपहर 1 बजे, गांव के मंदिर में तीनों परिवारों की मौजूदगी में उमा और विशाल की शादी पूरी विधि-विधान से कराई गई. शिवशंकर ने स्वयं पंडित, जयमाला, मंगलसूत्र और सिंदूर तक का इंतजाम किया. शादी के बाद सभी परिवारों ने इस फैसले को सराहा और माहौल शांतिपूर्ण रहा.
शिवशंकर बोले: ‘वो मेरे साथ खुश नहीं थी’
शिवशंकर ने की मानें तो उमा मेरे साथ खुश नहीं थी, केवल दो महीने ही मेरे साथ रही. मैंने उसे कई बार समझाया, लेकिन वह प्रेमी से संपर्क नहीं तोड़ पाई. मेरे साथ खुश नहीं थी तो रखकर क्या ही करता. मुझे लगा कि अगर उसे वहीं खुशी मिलती है, तो उसे आज़ादी दे देना ही बेहतर है. इसलिए उसकी शादी करवा दी.
