Last Updated:
सुपरस्टार कभी एक समय पर 41 फिल्मों में काम कर रहे थे, लेकिन एक्टर्स की यूनियन ने उन्हें नोटिस थमाते हुए कहा था कि वे इतनी सारी फिल्में एक साथ नहीं कर सकते हैं. सुपरस्टार के बेटे ने उनके करियर पर अपनी राय जाहिर की है.

नई दिल्ली: सुपरस्टार हिंदी सिनेमा के पहले एक्टर हैं जिनकी फिल्म 100 करोड़ी क्लब में शामिल हुई थी. उन्होंने पहली ही फिल्म के लिए नेशनल अवॉर्ड जीतकर अपना दबदबा कायम कर लिया था, हालांकि उन्हें भारी लोकप्रियता 1982 की फिल्म ‘डिस्को डांसर’ की रिलीज के बाद हासिल हुई. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

80 के दशक में फिल्मों की क्वालिटी में गिरावट आई, तब भी सुपरस्टार ने हार नहीं मानी. हम मिथुन चक्रवर्ती की बात कर रहे हैं, जो मुश्किल वक्त में एक्टर के तौर पर काम करते रहे. उन्होंने इतनी फिल्मों में काम किया कि एक समय पर उनका नाम एक साल में सबसे ज्यादा रिलीज वाली फिल्मों के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ. (फोटो साभार: IMDb)

मिथुन के बेटे नमाशी चक्रवर्ती ने हाल में RVCJ मूवीज को दिए इंटरव्यू में बताया कि उनके पिता ने 249 फिल्मों में हीरो के रूप में काम किया है और 1989 में उनकी 19 फिल्में रिलीज हुई थीं. (फोटो साभार: IMDb)

जब नमाशी से पूछा गया कि मिथुन ने यह सब कैसे किया, तो उन्होंने बताया कि इस समय फिल्में अक्सर स्वतंत्र निर्माताओं द्वारा बनाई जाती थीं और फिल्म बनाना बहुत आसान था. वे बोले, ‘यह वो समय था जब स्टार्स के पास ज्यादा समय नहीं होता था. आज के स्टार्स के पास बहुत समय है. आज, फिल्में स्वतंत्र फिल्ममेकर नहीं बना रहे हैं. उस समय, कोई भी स्टार से संपर्क कर सकता था और फिल्म बना सकता था. आज, सब कुछ कॉर्पोरेट्स द्वारा किया जाता है और वे एक एजेंसी का हिस्सा होते हैं. उस समय, स्टार्स को जो चाहें करने की आजादी थी.’ (फोटो साभार: IMDb)

नमाशी ने याद किया कि उनके पिता और अन्य स्टार्स को 1993 में सिंटा (एक्टर्स की यूनियन) से एक नोटिस मिला था, जिसमें उन्हें 40 से अधिक फिल्मों में काम न करने के लिए कहा गया था. उस समय मिथुन 41 फिल्मों में काम कर रहे थे. (फोटो साभार: IMDb)

नमाशी ने बताया, ‘1993 में मुझे याद है कि मेरे पिता, गोविंदा और राहुल रॉय को CINTAA से एक पत्र मिला था जिसमें कहा गया था कि वे 40 से अधिक फिल्मों में काम नहीं कर सकते और मेरे पिता के पास 41 फिल्में थीं, जिनमें से 35 में वे हीरो थे.’ गोविंदा 1990 के दशक के बड़े स्टार्स में से एक थे और राहुल रॉय 1990 की फिल्म ‘आशिकी’ की सफलता के बाद नए स्टार थे. (फोटो साभार: IMDb)

नमाशी ने बताया कि उनके पिता के पास उन दिनों ज्यादा समय नहीं होता था, क्योंकि वे लगातार शूटिंग कर रहे थे. उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने पिता को 10 साल की उम्र तक ठीक से नहीं जाना क्योंकि उनके पिता शायद ही घर पर होते थे. नमाशी ने आगे कहा, ‘मुझे इन संख्याओं पर आश्चर्य नहीं होता क्योंकि पिता के साथ मेरा कोई खास समय नहीं बीता था. मैंने अपने पिता को 10 साल की उम्र में जाना क्योंकि वे सुबह शूट के लिए निकल जाते थे. जब तक वे वापस आते, मैं सो चुका होता था, इसलिए मुझे पता नहीं था कि वे कौन थे. मैंने उन्हें दशकों तक कड़ी मेहनत करते देखा है और वे अभी भी ऐसा कर रहे हैं.’ (फोटो साभार: IMDb)

मिथुन आखिरी बार विवेक अग्निहोत्री की ‘द बंगाल फाइल्स’ में नजर आए थे. मिथुन को 2024 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
(फोटो साभार: YouTube/Videograb)

